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बीसलपुर नगर पालिका परिषद के चेयरमैन और दो पुत्रों को जेल

Thu, 12 May 2022 12:45 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Thu, 12 May 2022 12:45 AM IST
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नूर अहमद, बीसलपुर चेयरमैन। - फोटो : PILIBHIT
पीलीभीत। धोखाधड़ी के पुराने मामले में बीसलपुर नगर पालिका परिषद के चेयरमैन नूर अहमद अंसारी और उसके पुत्रों शहबाज उर्फ निक्की तथा मोहम्मद आगाज को जेल जाना पड़ा। अदालत ने अंतरिम जमानत खारिज करते हुए न्यायिक हिरासत में भेज दिया।
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बीसलपुर थाने में गुलाम नबी आजाद ने 28 नवंबर 2018 को चेयरमैन नूर अहमद अंसारी और उसके दो पुत्रों शहबाज उर्फ निक्की, मोहम्मद आगाज आदि के खिलाफ नौकरी लगवाने के नाम पर रुपये लेने का आरोप लगाते हुए रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। इस मामले में पालिका के चेयरमैन ने अपना पक्ष रखते हुए उच्च न्यायालय तक दस्तक दी। उच्च न्यायालय ने 27 अप्रैल के अपने आदेश में अभियुक्तों को 15 दिवस के अंदर जमानत प्रार्थना पत्र संबंधित अदालत के समक्ष पेश करने का आदेश दिया था।
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इसी क्रम में पालिकाध्यक्ष अपने पुत्रों के साथ 09 मई को अदालत में पेश हुआ था। उसे अंतरिम जमानत मिल गई थी। इस मामले में 11 मई की तिथि लगी थी। इसीलिए चेयरमैन और उसके पुत्र फिर अदालत में पेश हुए। अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम मुन्नालाल की अदालत ने जमानत के पक्ष में दो प्रार्थना पत्रों पर सुनवाई की। एक प्रार्थना पत्र में चेयरमैन को बुजुर्ग और प्रतिष्ठित व्यक्ति बताकर उसकी जमानत देने का आग्रह किया गया था और दूसरे प्रार्थना पत्र में उसके पुत्रों की जमानत के लिए अदालत से प्रार्थना की गई थी।
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अदालत ने आरोपी पक्ष और अभियोजन पक्ष के तर्कों को सुना। अभियोजन पक्ष ने चेयरमैन के खिलाफ दर्ज मामलों का ब्योरा रखा। वहीं आरोपी पक्ष ने बताया कि जिस तरह के आरोप लगाए गए हैं, उसका कोई साक्ष्य नहीं है। चेयरमैन की उम्र 72 वर्ष है। उसका कोई आपराधिक इतिहास नहीं है। इन बातों को गौर करते हुए उसे जमानत दे दी जाए। इस पर अभियोजन पक्ष ने थाना पुलिस से मिला वह विवरण रखा जिसमें चेयरमैन के खिलाफ कई मामले थे। जमानत के विषय में दोनों पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने अपने आदेश में कहा है कि अपराध गंभीर प्रकृति का है। अपराध की गंभीरता तथा मामले के तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए अभियुक्तों को जमानत पर रिहा किए जाने का पर्याप्त आधार नहीं है। इसके बाद तीनों आरोपियों को न्यायिक हिरासत में जेल भेजने का आदेश दिया गया।
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