{"_id":"5f47fe9c8ebc3e19615199de","slug":"corrupt-system-pilibhit-news-bly417710631","type":"story","status":"publish","title_hn":"कई बड़े अफसरों तक जुड़े हैं मनरेगा घोटाले के तार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कई बड़े अफसरों तक जुड़े हैं मनरेगा घोटाले के तार
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पीलीभीत। करोड़ों रुपये के मनरेगा घोटाले में अमरिया ब्लॉक के एपीओ और तीन रोजगार सेवकों पर हुई सख्त कार्रवाई से प्रशासनिक स्तर पर खलबली मच गई है। शासन से मिले निर्देश के बाद डीएम ने इस प्रकरण में सख्ती की तो मनरेगा से जुड़े अफसर कर्मचारी तक सहमे हुए हैं। घोटाले के तार कई बड़े अफसरों तक जुड़ने की चर्चा है। जांच में खुद के फंसने का डर मनरेगा अधिकारियों को सता रहा है।
मनरेगा में फर्जी मस्टररोल बनाकर और खुद के नाम से बनाई गई फर्म से करोड़ों की धनराशि अनाधिकृत रूप से गबन करने के मामले में अमरिया ब्लॉक के एपीओ (अतिरिक्त कार्यक्रम अधिकारी) अजय कुमार और तीन रोजगार सेवक सुरेश कुमार वर्मा, गुरविंदर सिंह और हरीश कुमार की सेवाएं समाप्त कर दी गई थीं। बुधवार रात डीसी मनरेगा मृणाल सिंह की तहरीर पर कोतवाली में चारों पर संगीन धाराओं में एफआईआर दर्ज कर उनकी गिरफ्तारी भी की गई थी। दूसरे दिन बृहस्पतिवार को पुलिस ने इनका चालान कर दिया। कोर्ट में पेश करने के बाद चारों आरोपियों को जेल भेज दिया। इस कार्रवाई से ब्लॉक से लेकर मुख्यालय तक हलचल मची है। अभी भले ही घोटाले में एपीओ और तीन रोजगार सेवक ही कार्रवाई में घिरे हों, मगर इस घोटाले के तार कई बड़े अधिकारियों के अलावा एक ब्लॉक प्रमुख और एक बड़े नेता से भी जुड़े हैं। ये अफसर एपीओ की शिकायतें मिलने के बाद उसे बचाने का पूरा ध्यान रखते थे। बताते हैं कि कई बार उसकी शिकायतों पर मनरेगा के बड़े अफसरों ने परदा डाला। जान बूझकर एपीओ के घपले की अनदेखी की गई। मामले की जांच कराकर कार्रवाई कराने के बजाय ठंडे बस्ते में शिकायत डाल दी जाती थीं। प्रशासन के भी कई अधिकारियों से एपीओ ने करीबियां बना ली थी। एपीओ को राजनीतिक संरक्षण भी प्राप्त था। इस वजह से अधिकारियों पर दबाव बनाने में भी उसे अधिक जद्दोजहद नहीं होती थी। उसकी गिरफ्तारी के बाद माननीयों के करीबियों का कोतवाली तक पहुंचना इसकी पुष्टि करने के लिए काफी है। इस प्रकरण को लेकर शासन और डीएम के स्तर से सख्ती होने के बाद एपीओ के करीबी और संरक्षण देने में जुटे रहे अधिकारियों को खुद के फंसने का डर सता रहा है। कलक्ट्रेट और विकास भवन में चर्चा है कि अभिलेखों को खंगालते हुए मनरेगा से जुड़े अफसर अपने बचाव की तैयारी भी करने लगे हैं। मनरेगा के एक बड़े अफसर की पूरे घोटोले में भूमिका संदेहास्पद है। शायद यही वजह है कि एपीओ और तीन रोजगार सेवकों पर सख्त कार्रवाई के बाद भी यह अफसर कुछ भी बोलने से बचते दिखे।
2009 से थी एपीओ की तैनाती, पूरे कार्यकाल की होगी जांच
पीलीभीत। करोड़ों के मनरेगा घोटाले में जेल गए एपीओ की मुश्किलें अभी कम नहीं हुई है। एक तरफ कोतवाली में दर्ज कराई गई एफआईआर की विवेचना किसी डिप्टी एसपी द्वारा कराए जाने पर विचार चल रहा है। वहीं दूसरी तरफ प्रशासन भी पूरे घोटाले के सच का पता लगाने को नए सिरे से जांच शुरू करेगा। इसमें सभी बिंदुओं पर पड़ताल की जाएगी। जांच की जिम्मेदारी सीडीओ श्रीनिवास मिश्र को मिली है।
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एपीओ अजय कुमार की जनपद में तैनाती वर्ष 2009 से है। 11 साल के लंबे कार्यकाल में उसकी तैनाती अमरिया के अलावा पूरनपुर समेत अन्य ब्लॉकों में भी रही है। उसके कार्यकाल में कई बार घोटाले के आरोप लगने की भी चर्चा हैं। शासन से हुई शिकायत पर अब उसे बर्खास्त करते हुए जेल भेजा जा चुका है। मगर अब भी घोटाले की तस्वीर पूरी तरह से साफ नहीं है। बताया जाता है कि पूरनपुर और बिलसंडा ब्लॉकों में भी मनरेगा से खरीदी निर्माण सामग्री और मजदूरों का भुगतान इस एपीओ की ही फर्म से होता है। हालांकि अभी इसे स्पष्ट करने के लिए जांच नए सिरे से शुरू की जाएगी। एपीओ की पूरे कार्यकाल की पड़ताल होगी। उसकी फर्म कब से और कहां काम कर चुकी है। एपीओ किस-किस ब्लॉक में तैनाती रही, यह भी देखा जाएगा। उसके बैंक खातों का भी पूरा ब्योरा तलब किया गया है। एपीओ और तीन रोजगार सेवकों के अलावा कौन इस घोटाले में शामिल हैं? कितने रुपये का घोटाला किया गया? घोटालेबाज एपीओ की पत्नी भी एपीओ हैं, उसकी तैनाती वाले स्थानों पर भी तो इसी फर्म से काम नहीं कराया गया, इन सभी बिंदुओं को जांच में शामिल किया जाएगा। इसके संबंध में सीडीओ ने अभिलेख तलब किए हैं।
डीसी मनरेगा को पता ही नहीं, कहां तैनात रहा एपीओ
डीसी मनरेगा मृणाल सिंह ने एफआईआर दर्ज कराई है। इस जनपद में उनका भी लंबा कार्यकाल है। जुलाई 2017 से वह जनपद मेें तैनात हैं। मगर, करोड़ों के घोटाले में उनकी संजीदगी नहीं दिखती। घोटाला करने वाले एपीओ के बारे में उन्हें खास जानकारी नहीं। वह अब हर चीज से अनभिज्ञता जताते हैं।
शासन से निर्देश मिलने पर अभी प्रारंभिक जांच ही हो सकी है। पूरे प्रकरण का पता लगाने के लिए जांच गहराई से की जाएगी। एपीओ की फर्म से हुए लेनदेन, बैंक खाता समेत कई अभिलेख तलब किए गए हैं। समस्त ब्लॉकों से ब्योरा मिलने के बाद उसका अध्ययन किया जाएगा। गंभीरता से जांच कराकर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। -श्रीनिवास मिश्र, सीडीओ
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मनरेगा में फर्जी मस्टररोल बनाकर और खुद के नाम से बनाई गई फर्म से करोड़ों की धनराशि अनाधिकृत रूप से गबन करने के मामले में अमरिया ब्लॉक के एपीओ (अतिरिक्त कार्यक्रम अधिकारी) अजय कुमार और तीन रोजगार सेवक सुरेश कुमार वर्मा, गुरविंदर सिंह और हरीश कुमार की सेवाएं समाप्त कर दी गई थीं। बुधवार रात डीसी मनरेगा मृणाल सिंह की तहरीर पर कोतवाली में चारों पर संगीन धाराओं में एफआईआर दर्ज कर उनकी गिरफ्तारी भी की गई थी। दूसरे दिन बृहस्पतिवार को पुलिस ने इनका चालान कर दिया। कोर्ट में पेश करने के बाद चारों आरोपियों को जेल भेज दिया। इस कार्रवाई से ब्लॉक से लेकर मुख्यालय तक हलचल मची है। अभी भले ही घोटाले में एपीओ और तीन रोजगार सेवक ही कार्रवाई में घिरे हों, मगर इस घोटाले के तार कई बड़े अधिकारियों के अलावा एक ब्लॉक प्रमुख और एक बड़े नेता से भी जुड़े हैं। ये अफसर एपीओ की शिकायतें मिलने के बाद उसे बचाने का पूरा ध्यान रखते थे। बताते हैं कि कई बार उसकी शिकायतों पर मनरेगा के बड़े अफसरों ने परदा डाला। जान बूझकर एपीओ के घपले की अनदेखी की गई। मामले की जांच कराकर कार्रवाई कराने के बजाय ठंडे बस्ते में शिकायत डाल दी जाती थीं। प्रशासन के भी कई अधिकारियों से एपीओ ने करीबियां बना ली थी। एपीओ को राजनीतिक संरक्षण भी प्राप्त था। इस वजह से अधिकारियों पर दबाव बनाने में भी उसे अधिक जद्दोजहद नहीं होती थी। उसकी गिरफ्तारी के बाद माननीयों के करीबियों का कोतवाली तक पहुंचना इसकी पुष्टि करने के लिए काफी है। इस प्रकरण को लेकर शासन और डीएम के स्तर से सख्ती होने के बाद एपीओ के करीबी और संरक्षण देने में जुटे रहे अधिकारियों को खुद के फंसने का डर सता रहा है। कलक्ट्रेट और विकास भवन में चर्चा है कि अभिलेखों को खंगालते हुए मनरेगा से जुड़े अफसर अपने बचाव की तैयारी भी करने लगे हैं। मनरेगा के एक बड़े अफसर की पूरे घोटोले में भूमिका संदेहास्पद है। शायद यही वजह है कि एपीओ और तीन रोजगार सेवकों पर सख्त कार्रवाई के बाद भी यह अफसर कुछ भी बोलने से बचते दिखे।
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2009 से थी एपीओ की तैनाती, पूरे कार्यकाल की होगी जांच
पीलीभीत। करोड़ों के मनरेगा घोटाले में जेल गए एपीओ की मुश्किलें अभी कम नहीं हुई है। एक तरफ कोतवाली में दर्ज कराई गई एफआईआर की विवेचना किसी डिप्टी एसपी द्वारा कराए जाने पर विचार चल रहा है। वहीं दूसरी तरफ प्रशासन भी पूरे घोटाले के सच का पता लगाने को नए सिरे से जांच शुरू करेगा। इसमें सभी बिंदुओं पर पड़ताल की जाएगी। जांच की जिम्मेदारी सीडीओ श्रीनिवास मिश्र को मिली है।
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एपीओ अजय कुमार की जनपद में तैनाती वर्ष 2009 से है। 11 साल के लंबे कार्यकाल में उसकी तैनाती अमरिया के अलावा पूरनपुर समेत अन्य ब्लॉकों में भी रही है। उसके कार्यकाल में कई बार घोटाले के आरोप लगने की भी चर्चा हैं। शासन से हुई शिकायत पर अब उसे बर्खास्त करते हुए जेल भेजा जा चुका है। मगर अब भी घोटाले की तस्वीर पूरी तरह से साफ नहीं है। बताया जाता है कि पूरनपुर और बिलसंडा ब्लॉकों में भी मनरेगा से खरीदी निर्माण सामग्री और मजदूरों का भुगतान इस एपीओ की ही फर्म से होता है। हालांकि अभी इसे स्पष्ट करने के लिए जांच नए सिरे से शुरू की जाएगी। एपीओ की पूरे कार्यकाल की पड़ताल होगी। उसकी फर्म कब से और कहां काम कर चुकी है। एपीओ किस-किस ब्लॉक में तैनाती रही, यह भी देखा जाएगा। उसके बैंक खातों का भी पूरा ब्योरा तलब किया गया है। एपीओ और तीन रोजगार सेवकों के अलावा कौन इस घोटाले में शामिल हैं? कितने रुपये का घोटाला किया गया? घोटालेबाज एपीओ की पत्नी भी एपीओ हैं, उसकी तैनाती वाले स्थानों पर भी तो इसी फर्म से काम नहीं कराया गया, इन सभी बिंदुओं को जांच में शामिल किया जाएगा। इसके संबंध में सीडीओ ने अभिलेख तलब किए हैं।
डीसी मनरेगा को पता ही नहीं, कहां तैनात रहा एपीओ
डीसी मनरेगा मृणाल सिंह ने एफआईआर दर्ज कराई है। इस जनपद में उनका भी लंबा कार्यकाल है। जुलाई 2017 से वह जनपद मेें तैनात हैं। मगर, करोड़ों के घोटाले में उनकी संजीदगी नहीं दिखती। घोटाला करने वाले एपीओ के बारे में उन्हें खास जानकारी नहीं। वह अब हर चीज से अनभिज्ञता जताते हैं।
शासन से निर्देश मिलने पर अभी प्रारंभिक जांच ही हो सकी है। पूरे प्रकरण का पता लगाने के लिए जांच गहराई से की जाएगी। एपीओ की फर्म से हुए लेनदेन, बैंक खाता समेत कई अभिलेख तलब किए गए हैं। समस्त ब्लॉकों से ब्योरा मिलने के बाद उसका अध्ययन किया जाएगा। गंभीरता से जांच कराकर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। -श्रीनिवास मिश्र, सीडीओ