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संक्रमण की रफ्तार थमी तो स्वास्थ्य विभाग ने बंद कर दी कांट्रेक्ट ट्रेसिंग
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पीलीभीत। कोरोना संक्रमण की रफ्तार कम होने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने लापरवाही शुरू कर दी है। नए संक्रमित मिलने के बाद अब स्वास्थ्य विभाग ने संपर्क में आए लोगों की ट्रेसिंग करना बंद कर दी है। ऐसे में यह लापरवाही संक्रमण को और बढ़ा सकती है। जबकि जिला कोरोना मुक्त होने की दौड़ में है। शुक्रवार को कोई केस नहीं आया। सिर्फ 20 केस ही एक्टिव चल रहे हैं।
जिले में पिछले साल मार्च 2020 में कोरोना संक्रमण की शुरुआत हुई थी। जिले में पहला केस 19 मार्च 2020 को मिला था। इसके बाद संक्रमण ने तेजी के साथ अपने पैर पसराना शुरू कर दिए थे। स्वास्थ्य विभाग ने मरीज को ट्रेस करने और संक्रमित मिलने के बाद उनके संपर्क में आने वाले लोगों की ट्रेसिंग के लिए टीमें लगाई थी। इस दौरान 1,73240 संक्रमितों के संपर्क में आने वाले मरीज ट्रेस किए गए थे। जिनमें 2551 लोग कोरोना पॉजिटिव मिले थे। इस हिसाब से अब तक 11019 लोगों में कोरोना संक्रमण की पुष्टि हुई थी। वहीं 368 लोगों की मौत हुई थी। हालांकि स्वास्थ्य विभाग के यूपी कोविन पोर्टल पर महज 188 लोगों की मौत को ही दर्शाया गया है। दस जून के बाद संक्रमण की रफ्तार धीमी पड़ गई। अब स्थिति यह है कि एक या दो केस प्रतिदिन मिल रहे हैं कभी भी कभी तो कोई केस नहीं आता है। शुक्रवार को भी कोई संक्रमित नहीं मिला। जून माह में 291 कोरोना संक्रमित निकले हैं। वर्तमान में 20 केस एक्टिव चल रहे हैं। इनमें नौ होम आइसोलेट हैं, जबकि 11 बाहरी जिलों के अस्पतालों में भर्ती है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग के द्वारा पूरे जून माह में मिले संक्रमितों के संपर्क में आने वाले किसी भी व्यक्ति को ट्रेस करने की जहमत नहीं उठाई गई है। सिर्फ संक्रमित मिलने पर उसे कोविड अस्पताल या फिर होम आइसोलेट कर छोड़ दिया जा रहा है। यहां तक की 14 दिन पूरे होने के बाद उसकी जानकारी भी नहीं की जा रही है। स्वास्थ्य विभाग के पास किसी भी मरीज की कांटेक्ट हिस्ट्री मौजूद नहीं है। अगर संक्रमित के संपर्क में आने वाला व्यक्ति पॉजिटिव हुआ। तो वह न जाने कितने लोगों को संक्रमित कर सकता है। स्वास्थ्य विभाग की यह लापरवाही कहीं दोबारा से जिले में भारी न पड़ जाए।
संक्रमण की रफ्तार कम हुई है। लेकिन अभी खत्म नहीं हुआ है। जिला सर्विलांस अधिकारी को कांटेक्ट ट्रेसिंग करने के निर्देश दिए गए हैं। किसी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। - डॉ. सीमा अग्रवाल, सीएमओ
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जिले में पिछले साल मार्च 2020 में कोरोना संक्रमण की शुरुआत हुई थी। जिले में पहला केस 19 मार्च 2020 को मिला था। इसके बाद संक्रमण ने तेजी के साथ अपने पैर पसराना शुरू कर दिए थे। स्वास्थ्य विभाग ने मरीज को ट्रेस करने और संक्रमित मिलने के बाद उनके संपर्क में आने वाले लोगों की ट्रेसिंग के लिए टीमें लगाई थी। इस दौरान 1,73240 संक्रमितों के संपर्क में आने वाले मरीज ट्रेस किए गए थे। जिनमें 2551 लोग कोरोना पॉजिटिव मिले थे। इस हिसाब से अब तक 11019 लोगों में कोरोना संक्रमण की पुष्टि हुई थी। वहीं 368 लोगों की मौत हुई थी। हालांकि स्वास्थ्य विभाग के यूपी कोविन पोर्टल पर महज 188 लोगों की मौत को ही दर्शाया गया है। दस जून के बाद संक्रमण की रफ्तार धीमी पड़ गई। अब स्थिति यह है कि एक या दो केस प्रतिदिन मिल रहे हैं कभी भी कभी तो कोई केस नहीं आता है। शुक्रवार को भी कोई संक्रमित नहीं मिला। जून माह में 291 कोरोना संक्रमित निकले हैं। वर्तमान में 20 केस एक्टिव चल रहे हैं। इनमें नौ होम आइसोलेट हैं, जबकि 11 बाहरी जिलों के अस्पतालों में भर्ती है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग के द्वारा पूरे जून माह में मिले संक्रमितों के संपर्क में आने वाले किसी भी व्यक्ति को ट्रेस करने की जहमत नहीं उठाई गई है। सिर्फ संक्रमित मिलने पर उसे कोविड अस्पताल या फिर होम आइसोलेट कर छोड़ दिया जा रहा है। यहां तक की 14 दिन पूरे होने के बाद उसकी जानकारी भी नहीं की जा रही है। स्वास्थ्य विभाग के पास किसी भी मरीज की कांटेक्ट हिस्ट्री मौजूद नहीं है। अगर संक्रमित के संपर्क में आने वाला व्यक्ति पॉजिटिव हुआ। तो वह न जाने कितने लोगों को संक्रमित कर सकता है। स्वास्थ्य विभाग की यह लापरवाही कहीं दोबारा से जिले में भारी न पड़ जाए।
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संक्रमण की रफ्तार कम हुई है। लेकिन अभी खत्म नहीं हुआ है। जिला सर्विलांस अधिकारी को कांटेक्ट ट्रेसिंग करने के निर्देश दिए गए हैं। किसी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। - डॉ. सीमा अग्रवाल, सीएमओ
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