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सरकार की गाइड लाइन पर लगी निगाहें, पटरी पर लौटती दिखेगी जिदंगी
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पीलीभीत। कोविड-19 के चलते 29 दिन के लॉकडाउन से ठहरी जिंदगी 20 अप्रैल के बाद कुछ हद तक पटरी पर लौटती नजर आएगी। इसके लिए सबकी निगाहें सरकार की लॉकडाउन में कुछ शर्तों में ढील देने पर लगी हैं। शासन के दिशा निर्देश मिलने के बाद प्रशासन ने भी कई ऐसे काम शुरू कराने की तैयारी की है, जिससे आम नागरिकों केे कुछ राहत मिल सके। सरकारी दफ्तरों को स्टाफ की 33 फीसदी उपस्थिति के साथ खोला जाएगा। इसके आदेश हो चुके हैं।
चूंकि अब पीलीभीत जिले में कोरोना का कोई संक्रमित नहीं रहा है, इसलिए सरकार की ओर से छूट में जिन जिलों को शामिल किया जाएगा, उनमें पीलीभीत के भी पक्की संभावना है। 20 अप्रैल के बाद मनरेगा के काम भी शुरू होने की बात कही जा रही है। इनके शुरू होने का सीधा फायदा मजदूर वर्ग को मिलेगा। यह वर्ग लॉकडाउन में सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ हैं। हालांकि उन्हें सामाजिक दूरी, मास्क, हैंडवाश और सैनिटाइजर जैसी शर्तों का कड़ाई से पालन करना होगा। लॉकडाउन पार्ट टू को लेकर जारी नई गाइडलाइन से लोगों को 20 अप्रैल से मामूली राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। शासन ने गेहूं कटाई की अनुमति शर्तों के साथ पहले ही दे दी है। कृषि फसलों के मंडियों में पहुंचने का रास्ता भी साफ कर दिया गया है। कृषि उर्वरक और इससे जुड़े मशीनों के काम भी पाबंदी हटा ली गई है। इससे किसान वर्ग को कुछ राहत है। प्रशासनिक स्तर पर भी इसके लिए कमेटी बना दी गई है।
3.82 लाख मजदूरों को मिलेगा फायदा
ग्रामीण क्षेत्रों में मजदूरों की आजीविका का बड़ा स्रोत मनरेगा मजदूरी है। लॉकडाउन में मनरेगा के काम पूरी तरह से बंद थे। 20 अप्रैल के बाद इनके शुरू होने के संकेत प्रशासनिक स्तर पर दिए गए हैं। इसके तहत अब गांवों में जल संचयन के लिए तालाब की खुदाई, सिंचाई, पशु अभयारण्य स्थल निर्माण और अन्य जरूरी आवश्यकताओं से जुड़े काम कराए जा सकते हैं। मजदूरों को सामाजिक दूरी को ध्यान में रखते हुए मास्क लगाकर काम करना होगा। जनपद की 721 ग्राम पंचायतों में करीब 3.82 लाख मनरेगा मजदूर हैं।
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सोमवार से खुलेंगे सरकारी दफ्तर
प्रदेश सरकार ने सोमवार से सभी सरकारी दफ्तर खोलने के निर्देश दिए हैं। 33 फीसदी उपस्थिति के साथ दफ्तरों को खोला जाएगा। सरकारी विभागों ने कर्मचारियों की ड्यूटी को लेकर रोस्टर बनाने का काम शुरू कर दिया है। सरकारी दफ्तरों के खुलने से जहां रुके पड़े शासकीय कार्य पूरे हो सकेंगे, वहीं इससे आम लोगों को भी राहत मिलेगी। बहुत ज्यादा जरूरी होने पर लोग अपने काम भी करवा सकेंगे। यहां भी सामाजिक दूरी, मास्क आदि की शर्तें लागू रहेंगी।
रेलवे रोडवेज समेत ये सेवाएं बंद ही रहेंगी
केंद्र सरकार की नई गाइडलाइन के मुताबिक अभी परिवहन सेवाएं बंद रहेंगी। राज्यों की सीमाएं सील ही रहेंगी। बस, ट्रेन, स्कूल, कॉलेज, कोचिंग सेंटर, सिनेमाहॉल, मार्ट, जिम, खेल परिसर, स्विमिंग पूल तीन मई तक बंद रहेंगे। एक से दूसरे जिले में जाना पर तो रोक पूरी तरह जारी रहेगी, जिले के अंदर पर रहेगी। सामाजिक, वैवाहिक, राजनीतिक, खेल, धार्मिक समारोह, धार्मिक स्थल आदि तीन मई तक बंद रहेंगे।
औद्योगिक इकाईयों के ताले खोलने को बनी कमेटी
लॉकडाउन के दौरान बंद पड़े औद्योगिक इकाइयों के ताले खुलने का रास्ता साफ लगभग साफ हो चुका है। शासन ने हरी झंडी के मिलने के बाद कपड़ा, पेपर, चीनी मिल, सीमेंट, रसायन उर्वरक, रिफाइनरीज, फाउंड्रीज, डायर, कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट संचालन को 21 अप्रैल से चलाने की मंजूरी दे दी है। इन्हें कुछ शर्तों के साथ शुरू करने की बात कही जा रही है। शासनादेश मिलते ही जिला प्रशासन ने एडीएम न्यायिक देवेंद्र प्रताप मिश्र की अध्यक्षता में इसके लिए आठ सदस्यीय कमेटी भी बना दी है। हालांकि जनपद में 11 औद्योगिक इकाईयों में से चीनी मिल को छोड़कर दूसरी बड़ी इकाई नहीं है। चारों चीनी मिलें कृषि उद्योग से जुड़ी होने की वजह से पहले से ही संचालित हैं।
11 औद्योगिक इकाईयों के अलावा ग्रामीण क्षेत्र के अन्य छोटे-बड़े उद्योग यदि कोई चलाना चाहता है तो आठ सदस्यीय कमेटी उसकी मदद करेगी। जो उद्योग पहले से चल रहे हैं, उनके मानक का परीक्षण किया जाएगा। -देवेंद्र प्रताप सिंह, एडीएम न्यायिक
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चूंकि अब पीलीभीत जिले में कोरोना का कोई संक्रमित नहीं रहा है, इसलिए सरकार की ओर से छूट में जिन जिलों को शामिल किया जाएगा, उनमें पीलीभीत के भी पक्की संभावना है। 20 अप्रैल के बाद मनरेगा के काम भी शुरू होने की बात कही जा रही है। इनके शुरू होने का सीधा फायदा मजदूर वर्ग को मिलेगा। यह वर्ग लॉकडाउन में सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ हैं। हालांकि उन्हें सामाजिक दूरी, मास्क, हैंडवाश और सैनिटाइजर जैसी शर्तों का कड़ाई से पालन करना होगा। लॉकडाउन पार्ट टू को लेकर जारी नई गाइडलाइन से लोगों को 20 अप्रैल से मामूली राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। शासन ने गेहूं कटाई की अनुमति शर्तों के साथ पहले ही दे दी है। कृषि फसलों के मंडियों में पहुंचने का रास्ता भी साफ कर दिया गया है। कृषि उर्वरक और इससे जुड़े मशीनों के काम भी पाबंदी हटा ली गई है। इससे किसान वर्ग को कुछ राहत है। प्रशासनिक स्तर पर भी इसके लिए कमेटी बना दी गई है।
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3.82 लाख मजदूरों को मिलेगा फायदा
ग्रामीण क्षेत्रों में मजदूरों की आजीविका का बड़ा स्रोत मनरेगा मजदूरी है। लॉकडाउन में मनरेगा के काम पूरी तरह से बंद थे। 20 अप्रैल के बाद इनके शुरू होने के संकेत प्रशासनिक स्तर पर दिए गए हैं। इसके तहत अब गांवों में जल संचयन के लिए तालाब की खुदाई, सिंचाई, पशु अभयारण्य स्थल निर्माण और अन्य जरूरी आवश्यकताओं से जुड़े काम कराए जा सकते हैं। मजदूरों को सामाजिक दूरी को ध्यान में रखते हुए मास्क लगाकर काम करना होगा। जनपद की 721 ग्राम पंचायतों में करीब 3.82 लाख मनरेगा मजदूर हैं।
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सोमवार से खुलेंगे सरकारी दफ्तर
प्रदेश सरकार ने सोमवार से सभी सरकारी दफ्तर खोलने के निर्देश दिए हैं। 33 फीसदी उपस्थिति के साथ दफ्तरों को खोला जाएगा। सरकारी विभागों ने कर्मचारियों की ड्यूटी को लेकर रोस्टर बनाने का काम शुरू कर दिया है। सरकारी दफ्तरों के खुलने से जहां रुके पड़े शासकीय कार्य पूरे हो सकेंगे, वहीं इससे आम लोगों को भी राहत मिलेगी। बहुत ज्यादा जरूरी होने पर लोग अपने काम भी करवा सकेंगे। यहां भी सामाजिक दूरी, मास्क आदि की शर्तें लागू रहेंगी।
रेलवे रोडवेज समेत ये सेवाएं बंद ही रहेंगी
केंद्र सरकार की नई गाइडलाइन के मुताबिक अभी परिवहन सेवाएं बंद रहेंगी। राज्यों की सीमाएं सील ही रहेंगी। बस, ट्रेन, स्कूल, कॉलेज, कोचिंग सेंटर, सिनेमाहॉल, मार्ट, जिम, खेल परिसर, स्विमिंग पूल तीन मई तक बंद रहेंगे। एक से दूसरे जिले में जाना पर तो रोक पूरी तरह जारी रहेगी, जिले के अंदर पर रहेगी। सामाजिक, वैवाहिक, राजनीतिक, खेल, धार्मिक समारोह, धार्मिक स्थल आदि तीन मई तक बंद रहेंगे।
औद्योगिक इकाईयों के ताले खोलने को बनी कमेटी
लॉकडाउन के दौरान बंद पड़े औद्योगिक इकाइयों के ताले खुलने का रास्ता साफ लगभग साफ हो चुका है। शासन ने हरी झंडी के मिलने के बाद कपड़ा, पेपर, चीनी मिल, सीमेंट, रसायन उर्वरक, रिफाइनरीज, फाउंड्रीज, डायर, कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट संचालन को 21 अप्रैल से चलाने की मंजूरी दे दी है। इन्हें कुछ शर्तों के साथ शुरू करने की बात कही जा रही है। शासनादेश मिलते ही जिला प्रशासन ने एडीएम न्यायिक देवेंद्र प्रताप मिश्र की अध्यक्षता में इसके लिए आठ सदस्यीय कमेटी भी बना दी है। हालांकि जनपद में 11 औद्योगिक इकाईयों में से चीनी मिल को छोड़कर दूसरी बड़ी इकाई नहीं है। चारों चीनी मिलें कृषि उद्योग से जुड़ी होने की वजह से पहले से ही संचालित हैं।
11 औद्योगिक इकाईयों के अलावा ग्रामीण क्षेत्र के अन्य छोटे-बड़े उद्योग यदि कोई चलाना चाहता है तो आठ सदस्यीय कमेटी उसकी मदद करेगी। जो उद्योग पहले से चल रहे हैं, उनके मानक का परीक्षण किया जाएगा। -देवेंद्र प्रताप सिंह, एडीएम न्यायिक