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मशीन लगाने में कर दिए लाखों खर्च, फिर भी कोरोना काल में मरीजों को नहीं मिला लाभ

Fri, 25 Jun 2021 12:23 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Fri, 25 Jun 2021 12:23 AM IST
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जिला अस्पताल में बना सीटी स्कैन कक्ष। - फोटो : PILIBHIT
पीलीभीत। कोरोना वायरस म्यूटेशन बदला तो एंटीजन और आरटीपीसीआर की रिपोर्ट निगेटिव आने लगी। वायरस सीधे फेफड़ों को छलनी कर रहा था। जिसकी पुष्टि के लिए एचआरसीटी स्कैन (हाई रेजोल्यूशन सिटी स्कैन)की मांग बढ़ गई थी, लेकिन जिला अस्पताल में लाखों रुपये खर्च कर लगाई गई सीटी स्कैन मशीन का लाभ किसी भी मरीज को नहीं मिल सका। मरीजों को अपनी जांच के लिए निजी सेंटरों पर सीटी स्कैन करना पड़ा था। जहां प्राइवेट लैबों में लाइनें लग रही थी। तो वहीं जिला अस्पताल में पूरे कोरोना काल में सिर्फ 70 मरीजों का सीटी स्कैन किया गया था। हैरानी की बात यह है कि इन 70 में एक भी मरीज कोविड अस्पताल का नहीं है। इसका मतलब साफ है कि एल-2 कोविड अस्पताल में भर्ती मरीजों को शासन की मंशा के अनुरूप संक्रमण की पुष्टि के लिए एचआरसीटी स्कैन नहीं कराया गया था। इसलिए अब उनकी मौत के बाद रिपोर्ट को लेकर भी असमंजस बना हुआ है।
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जिला अस्पताल में 2017 दिसंबर में पीपीई मॉडल के तहत सीटी स्कैन मशीन लगाई गई थी। मकसद था कि गरीब मरीजों को निशुल्क इसका लाभ मिल सके। कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर में जब कोरोना ने रफ्तार पकड़ी थी, तो वायरस फेफड़ों में अटैक कर रहा था। सीटी स्कैन को लेकर मारामारी मची थी। जिले के कोविड अस्पताल में 770 मरीज भर्ती हुए थे। जिनमें 80 फीसदी से अधिक मरीजों के लंग्स में संक्रमण मिला था। इस पर शासन ने निर्देश दिए थे कि कोविड अस्पताल में भर्ती होने वाले मरीज की एंटीजन, आरटीपीसीआर या फिर लंग्स का सीटी स्कैन करने के निर्देश दिए थे, मगर जिले में संक्रमण के दौरान इन बातों का कोई ध्यान नहीं रखा गया। सांस फूलने वाले मरीजों को भर्ती करने के बाद उनकी जांच तक नहीं कराई गई। ऐसे में अधिकांश मरीजों के तीमारदारों ने अपने मरीजों को स्वयं प्राइवेट सेंटरों में ले जाकर उनका सीटी स्कैन कराया। शहर के तीन लैबों की बात करें तो आईएमए अध्यक्ष डॉ. पीयूष अग्रवाल के मुताबिक करीब तीन हजार से अधिक लोगों के सीटी स्कैन हुए। जबकि जिला अस्पताल में सिर्फ 70 एचआरसीटी हुए हैं। इन 70 मरीजों में एक भी मरीज कोविड अस्पताल से सीटी स्कैन करने के लिए नहीं पहुंचा। रिपोर्ट न होने के कारण कोविड अस्पताल से किसी भी नॉन कोविड मरीज को हालत गंभीर होने पर हायर सेंटर रेफर नहीं किया गया। क्योंकि वहां रिपोर्ट की मांग की जा रही थी। हालांकि कुछ मरीजों के परिवार वालों ने जबरन अपने मरीज को डिस्चार्ज करने के बाद स्वयं ही हायर सेंटर ले गए। कोविड में अब तक 201 मरीजों की मौत हो गई थी। जिसमें 187 मरीज नॉन कोविड वाले थे। जिनमें 176 मरीजों के पास कोविड से जुड़ी कोई रिपोर्ट मौजूद नहीं है। अब उनकी मौत के बाद उन्हें नॉन कोविड का दर्जा देकर पोर्टल पर अपडेट करने की तैयारी चल रही है, मगर हकीकत में उनकी मौत की क्या वजह रही यह जानकारी किसी को भी नहीं है।
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ओपीडी खुलने के बाद भी स्थिति बदहाल, मरीज परेशान
कोरोना संक्रमण काल में तो किसी मरीज को सीटी स्कैन का लाभ नहीं मिल सका था। इधर एक जून से ओपीडी सेवा शुरू होने के बाद भी सीटी स्कैन लैब की स्थिति नहीं सुधर सकी है। मरीज डॉक्टरों से पर्चा बनवाकर सीटी स्कैन रूम के बाहर लाइन लगाकर खड़े रहते है, लेकिन उनका सीटी स्कैन नहीं हो पाता है, कभी इंटरनेट की समस्या बताकर मरीज को टहला दिया जाता है, तो कभी सर्वर और मशीन की तकनीकी खराबी बताकर अगले दिन का समय देते हैं, कुछ स्वास्थ्य कर्मियों की मानें तो मरीज का सीटी स्कैन करने के लिए लैब से जुड़े लोग पांच सौ से एक हजार रुपये तक वसूलते हैं।
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भर्ती होने के दो दिन बाद भी जांच नहीं
न्यूरिया क्षेत्र के गांव बल्देवपुर निवासी अजय ने बताया कि उसकी मां चंद्रवती की एक मई को अचानक सांस फूलने की समस्या हुई थी। जिस पर वह उन्हें जिला अस्पताल लेकर पहुंचा था। वहां बिना जांच के ही उसे कोविड अस्पताल भेज दिया गया था। भर्ती होने के दो दिन बाद भी कोविड अस्पताल में कोई जांच नहीं की गई। परिजनों ने बरेली मेडिकल कॉलेज में भर्ती करने के लिए बात की थी लेकिन वहां मरीज की रिपोर्ट की मांग की जा रही थी। जो उनके पास उपलब्ध नहीं थी। इलाज के अभाव में तीन मई को उनकी मौत हो गई। अब रिपोर्ट में उन्हें नॉन कोविड बताया दिया गया है।
क्या कहते है मरीज और तीमारदार
जिला अस्पताल में अपने भाई का सीटी स्कैन कराने के लिए आए थे। दो दिन पहले डॉक्टर से पर्चा बनवा लिया था। लेकिन सीटी स्कैन में कोई न कोई बहाना बनाकर लौट दिया जाता है। सुबह 11 बजे से इंतजार कर रहे हैं। मगर स्वास्थ्य कर्मी का पता नहीं है। - रामकुमार धनकुनी
जिला अस्पताल में मशीन तो लगा दी है, मगर इसका लाभ नहीं मिल रहा है। सीटी स्कैन के लिए पहले डॉक्टरों के चैंबर के बाहर लाइन में लगना पड़ता है फिर सीटी स्कैन रूम में बैठे कर्मचारी समय से नहीं आते हैं। मजबूरी में प्राइवेट सेंटरों का सहारा लेना पड़ता है। पप्पू, राजीव कॉलोनी
सीटी स्कैन प्राइवेट संस्था के द्वारा ठेके पर चल रही है। मरीजों का डॉक्टरों के पर्चे पर सीटी स्कैन लिखकर दिया जाता है। जो भी मरीज पहुंचता है। उसका सीटी स्कैन होता है। कोविड के मरीजों के सीटी स्कैन के लिए कोविड अस्पताल से ही लिखकर आने पर सीटी किया जाता है। फिलहाल कोई मरीज नहीं पहुंचा था। - डॉ. अनिल कुमार मिश्र, सीएमएस, जिला अस्पताल

कोविड अस्पताल में भर्ती होने वाले अधिकांश मरीज नॉन कोविड के थे। सभी को बेहतर इलाज दिया गया था। कुछ मरीजों के पास कोई रिपोर्ट नहीं है। वरना सभी की जांच कराई गई है। जिन मरीजों के पास कोई रिपोर्ट नहीं थी। उन्हें नॉन कोविड में पोर्टल पर अपलोड किया जा रहा है। - डॉ. सीमा अग्रवाल, सीएमओ
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