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Pilibhit News: चीनी के बढ़ते भाव के बीच गन्ने की घटती उपज ने बढ़ाई चिंता
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पीलीभीत। बाजार में चीनी के लगातार बढ़ते भाव के बीच जिले में गन्ने की खेती और चीनी उत्पादन के आंकड़े नई चिंता खड़ी कर रहे हैं। जिले में गन्ने का रकबा बढ़ाने के बावजूद प्रति हेक्टेयर पैदावार में अपेक्षित सुधार नहीं हो पा रहा है।
पिछले पांच वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो वर्ष 2021-22 से 2023-24 तक गन्ने का क्षेत्रफल लगातार बढ़ा और वर्ष 2023-24 में यह पांच साल के सबसे ऊंचे स्तर 1,10,737 हेक्टेयर तक पहुंच गया। इसके बावजूद उसी साल उत्पादन वर्ष 2022-23 के मुकाबले करीब 55 लाख क्विंटल कम हो गया। बाद के वर्ष में रकबा घटने के साथ उत्पादन और औसत उपज में भी गिरावट दर्ज की गई।
चीनी के बढ़ते दाम के बीच यह आंकड़े इसलिए महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि गन्ने का उत्पादन सीधे तौर पर जिले की चार चीनी मिलों की पेराई और चीनी उत्पादन से जुड़ा है। बड़ी संख्या में किसान गन्ने की खेती पर निर्भर हैं और जिले की चीनी मिलों को भी स्थानीय स्तर पर पर्याप्त गन्ना उपलब्ध रहना जरूरी है। यदि रकबा बढ़ने के बावजूद उत्पादकता में सुधार नहीं होता है तो भविष्य में गन्ने की कुल उपलब्धता और चीनी उत्पादन को लेकर दबाव बढ़ सकता है। हालांकि मौजूदा समय में जिले की चीनी मिलों में पर्याप्त चीनी स्टॉक होने की बात सामने आई है।
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गन्ना विभाग के उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2021-22 में जिले में 1,02,813 हेक्टेयर क्षेत्रफल में गन्ने की खेती हुई थी। इस वर्ष 821.56 लाख क्विंटल गन्ने का उत्पादन हुआ और औसत उपज 799.08 क्विंटल प्रति हेक्टेयर रही। इसके बाद वर्ष 2022-23 में किसानों ने गन्ने का रकबा बढ़ाया। क्षेत्रफल बढ़कर 1,09,019 हेक्टेयर पहुंच गया। करीब 6,200 हेक्टेयर क्षेत्रफल बढ़ने के साथ गन्ने का उत्पादन भी बढ़कर 878.87 लाख क्विंटल हो गया। इस वर्ष औसत उपज 806.16 क्विंटल प्रति हेक्टेयर रही।
वर्ष 2023-24 में भी गन्ने का क्षेत्रफल बढ़ने का सिलसिला जारी रहा। इस साल जिले में 1,10,737 हेक्टेयर में गन्ना बोया गया। यह पांच वर्षों में सबसे अधिक रकबा था, लेकिन रकबा बढ़ने के बावजूद उत्पादन बढ़ने के बजाय घट गया। इस वर्ष 823.34 लाख क्विंटल गन्ने का उत्पादन दर्ज हुआ। यानी वर्ष 2022-23 की तुलना में करीब 55 लाख क्विंटल कम गन्ना पैदा हुआ। औसत उपज भी घटकर 802.68 कुंतल प्रति हेक्टेयर रह गई।
गन्ने की खेती में उतार-चढ़ाव के बीच जिले की चीनी मिलों में चीनी उत्पादन जरूर बढ़ा है। जिला गन्ना अधिकारी की रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2024-25 में जिले की चीनी मिलों में कुल 2,54,243.50 मीट्रिक टन चीनी का उत्पादन हुआ था। वर्ष 2025-26 में यह बढ़कर 2,65,858 मीट्रिक टन पहुंच गया। यानी एक वर्ष में चीनी उत्पादन में 11,614.50 मीट्रिक टन की बढ़ोतरी हुई।
इसके बावजूद मौजूदा समय में बाजार में चीनी के भाव बढ़ने से उपभोक्ताओं की चिंता बढ़ी है। चीनी कारोबारियों के अनुसार पहले करीब 4,400 से 4,500 रुपये प्रति क्विंटल की दर पर चीनी उपलब्ध होती थी, जबकि अब यह करीब 5,900 से 6,000 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गई है। कारोबारियों ने कीमत बढ़ने के पीछे चीनी मिलों से बढ़े हुए रेट पर चीनी मिलने की बात बताई है। संवाद
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मिलों में 65.65 हजार मीट्रिक टन चीनी उपलब्ध
जिला विपणन अधिकारी प्रज्ञा शर्मा की रिपोर्ट के अनुसार जिले की चीनी मिलों में कुल 65,651.80 मीट्रिक टन चीनी का स्टॉक उपलब्ध है। चीनी मिल प्रबंधनों ने भी जिले में पर्याप्त स्टॉक होने की जानकारी दी है। यानी मौजूदा स्तर पर जिले में चीनी की उपलब्धता को लेकर कमी नहीं बताई जा रही है। इसके बावजूद बाजार में कीमतों में बढ़ोतरी ने मांग और आपूर्ति के साथ-साथ मिलों से बाजार तक चीनी के रेट को लेकर सवाल खड़े किए हैं। अधिकारियों की ओर से चीनी कारोबारियों के स्टॉक पर भी नजर रखी जा रही है। पुराने स्टॉक को पुराने रेट पर उपभोक्ताओं को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।
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चीनी संकट से निपटने के लिए गन्ने की उत्पादकता बढ़ाना जरूरी
मौजूदा स्थिति में चीनी के दाम बढ़ने के बीच जिले के लिए सबसे अहम सवाल यह है कि आने वाले वर्षों में गन्ने की उपलब्धता और चीनी उत्पादन को कैसे मजबूत रखा जाए। आंकड़े बताते हैं कि गन्ने का रकबा बढ़ाने के साथ उत्पादकता पर उतना जोर नहीं दिया गया, जितनी जरूरत थी। वर्ष 2023-24 में इसका सबसे स्पष्ट उदाहरण सामने आया, जब सर्वाधिक रकबे के बावजूद उत्पादन पिछले वर्ष से कम हो गया।
गन्ना उत्पादन बढ़ाने के लिए प्रति हेक्टेयर उपज बढ़ाना जरूरी है। किसानों को अच्छी गुणवत्ता और रोगरोधी बीज गन्ने का चयन करना होगा। इसके साथ ही समय से बुवाई, उचित दूरी, संतुलित उर्वरक का इस्तेमाल, सिंचाई, निराई-गुड़ाई और पेड़ी प्रबंधन पर ध्यान देना होगा। जलभराव और रोगों से फसल को बचाने के लिए खेतों में जल निकासी की उचित व्यवस्था भी जरूरी है।
मौसम में बदलाव भी गन्ने की पैदावार को प्रभावित कर रहा है। अत्यधिक बारिश, लंबे समय तक खेत में पानी भरा रहना, तापमान में उतार-चढ़ाव और समय पर सिंचाई न मिलना उत्पादन को प्रभावित कर सकता है। इसके अलावा लाल सड़न जैसे रोग और कीटों का प्रकोप भी उपज कम कर देता है। ऐसे में गन्ना विभाग की सलाह के अनुसार उन्नत प्रजातियों और वैज्ञानिक तकनीक का इस्तेमाल उत्पादन बढ़ाने में मददगार हो सकता है।
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रकबा नहीं, उत्पादकता बढ़ाना अब बड़ी चुनौती
पांच साल के आंकड़ों से यह तस्वीर सामने आती है कि जिले में गन्ने की खेती का क्षेत्रफल बढ़ाने में किसानों ने रुचि दिखाई, लेकिन प्रति हेक्टेयर उत्पादन में वैसी वृद्धि नहीं हो सकी।
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साल-दर साल हुई औसत उपज के आंकड़े
जिले में गन्ने के क्षेत्रफल में उतार-चढ़ाव के साथ उत्पादन और औसत उपज में भी बदलाव दर्ज हुआ है। वर्ष 2021-22 में 1,02,813 हेक्टेयर में गन्ने की खेती हुई और 821.56 लाख क्विंटल उत्पादन हुआ। औसत उपज 799.08 क्विंटल प्रति हेक्टेयर रही। वर्ष 2022-23 में रकबा बढ़कर 1,09,019 हेक्टेयर पहुंचा और उत्पादन 878.87 लाख क्विंटल हो गया। औसत उपज भी बढ़कर 806.16 क्विंटल प्रति हेक्टेयर रही। वर्ष 2023-24 में गन्ने का रकबा पांच साल के सर्वाधिक 1,10,737 हेक्टेयर पर पहुंचा। इस वर्ष उत्पादन 919.16 लाख क्विंटल और औसत उपज 830.04 कुंतल प्रति हेक्टेयर रही। इसके बाद वर्ष 2024-25 में रकबा घटकर 1,02,574 हेक्टेयर रह गया और उत्पादन 823.34 लाख क्विंटल हुआ। औसत उपज 802.68 कुंतल रही। वर्ष 2025-26 में रकबा मामूली बढ़कर 1,02,792 हेक्टेयर हुआ, लेकिन उत्पादन 796.56 लाख क्विंटल और औसत उपज 774.92 क्विंटल रह गई।
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वर्जन
किसानों को गन्ने की अच्छी उपज के लिए गुणवत्तापूर्ण बीज का चयन करना चाहिए। कई किसान खराब बीज गन्ने का इस्तेमाल करते हैं, जिससे पैदावार प्रभावित होती है। समय पर निराई-गुड़ाई और पेड़ी प्रबंधन भी जरूरी है। किसान यदि सही प्रजाति का चयन कर वैज्ञानिक तरीके से गन्ने की खेती करें और फसल की समय से देखभाल करें तो प्रति हेक्टेयर उत्पादन काफी बेहतर किया जा सकता है। जिले में कई किसान ऐसे हैं, जो हर वर्ष अच्छी उपज ले रहे हैं।
- खुशीराम भार्गव, जिला गन्ना अधिकारी
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पिछले पांच वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो वर्ष 2021-22 से 2023-24 तक गन्ने का क्षेत्रफल लगातार बढ़ा और वर्ष 2023-24 में यह पांच साल के सबसे ऊंचे स्तर 1,10,737 हेक्टेयर तक पहुंच गया। इसके बावजूद उसी साल उत्पादन वर्ष 2022-23 के मुकाबले करीब 55 लाख क्विंटल कम हो गया। बाद के वर्ष में रकबा घटने के साथ उत्पादन और औसत उपज में भी गिरावट दर्ज की गई।
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चीनी के बढ़ते दाम के बीच यह आंकड़े इसलिए महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि गन्ने का उत्पादन सीधे तौर पर जिले की चार चीनी मिलों की पेराई और चीनी उत्पादन से जुड़ा है। बड़ी संख्या में किसान गन्ने की खेती पर निर्भर हैं और जिले की चीनी मिलों को भी स्थानीय स्तर पर पर्याप्त गन्ना उपलब्ध रहना जरूरी है। यदि रकबा बढ़ने के बावजूद उत्पादकता में सुधार नहीं होता है तो भविष्य में गन्ने की कुल उपलब्धता और चीनी उत्पादन को लेकर दबाव बढ़ सकता है। हालांकि मौजूदा समय में जिले की चीनी मिलों में पर्याप्त चीनी स्टॉक होने की बात सामने आई है।
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गन्ना विभाग के उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2021-22 में जिले में 1,02,813 हेक्टेयर क्षेत्रफल में गन्ने की खेती हुई थी। इस वर्ष 821.56 लाख क्विंटल गन्ने का उत्पादन हुआ और औसत उपज 799.08 क्विंटल प्रति हेक्टेयर रही। इसके बाद वर्ष 2022-23 में किसानों ने गन्ने का रकबा बढ़ाया। क्षेत्रफल बढ़कर 1,09,019 हेक्टेयर पहुंच गया। करीब 6,200 हेक्टेयर क्षेत्रफल बढ़ने के साथ गन्ने का उत्पादन भी बढ़कर 878.87 लाख क्विंटल हो गया। इस वर्ष औसत उपज 806.16 क्विंटल प्रति हेक्टेयर रही।
वर्ष 2023-24 में भी गन्ने का क्षेत्रफल बढ़ने का सिलसिला जारी रहा। इस साल जिले में 1,10,737 हेक्टेयर में गन्ना बोया गया। यह पांच वर्षों में सबसे अधिक रकबा था, लेकिन रकबा बढ़ने के बावजूद उत्पादन बढ़ने के बजाय घट गया। इस वर्ष 823.34 लाख क्विंटल गन्ने का उत्पादन दर्ज हुआ। यानी वर्ष 2022-23 की तुलना में करीब 55 लाख क्विंटल कम गन्ना पैदा हुआ। औसत उपज भी घटकर 802.68 कुंतल प्रति हेक्टेयर रह गई।
गन्ने की खेती में उतार-चढ़ाव के बीच जिले की चीनी मिलों में चीनी उत्पादन जरूर बढ़ा है। जिला गन्ना अधिकारी की रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2024-25 में जिले की चीनी मिलों में कुल 2,54,243.50 मीट्रिक टन चीनी का उत्पादन हुआ था। वर्ष 2025-26 में यह बढ़कर 2,65,858 मीट्रिक टन पहुंच गया। यानी एक वर्ष में चीनी उत्पादन में 11,614.50 मीट्रिक टन की बढ़ोतरी हुई।
इसके बावजूद मौजूदा समय में बाजार में चीनी के भाव बढ़ने से उपभोक्ताओं की चिंता बढ़ी है। चीनी कारोबारियों के अनुसार पहले करीब 4,400 से 4,500 रुपये प्रति क्विंटल की दर पर चीनी उपलब्ध होती थी, जबकि अब यह करीब 5,900 से 6,000 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गई है। कारोबारियों ने कीमत बढ़ने के पीछे चीनी मिलों से बढ़े हुए रेट पर चीनी मिलने की बात बताई है। संवाद
मिलों में 65.65 हजार मीट्रिक टन चीनी उपलब्ध
जिला विपणन अधिकारी प्रज्ञा शर्मा की रिपोर्ट के अनुसार जिले की चीनी मिलों में कुल 65,651.80 मीट्रिक टन चीनी का स्टॉक उपलब्ध है। चीनी मिल प्रबंधनों ने भी जिले में पर्याप्त स्टॉक होने की जानकारी दी है। यानी मौजूदा स्तर पर जिले में चीनी की उपलब्धता को लेकर कमी नहीं बताई जा रही है। इसके बावजूद बाजार में कीमतों में बढ़ोतरी ने मांग और आपूर्ति के साथ-साथ मिलों से बाजार तक चीनी के रेट को लेकर सवाल खड़े किए हैं। अधिकारियों की ओर से चीनी कारोबारियों के स्टॉक पर भी नजर रखी जा रही है। पुराने स्टॉक को पुराने रेट पर उपभोक्ताओं को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।
चीनी संकट से निपटने के लिए गन्ने की उत्पादकता बढ़ाना जरूरी
मौजूदा स्थिति में चीनी के दाम बढ़ने के बीच जिले के लिए सबसे अहम सवाल यह है कि आने वाले वर्षों में गन्ने की उपलब्धता और चीनी उत्पादन को कैसे मजबूत रखा जाए। आंकड़े बताते हैं कि गन्ने का रकबा बढ़ाने के साथ उत्पादकता पर उतना जोर नहीं दिया गया, जितनी जरूरत थी। वर्ष 2023-24 में इसका सबसे स्पष्ट उदाहरण सामने आया, जब सर्वाधिक रकबे के बावजूद उत्पादन पिछले वर्ष से कम हो गया।
गन्ना उत्पादन बढ़ाने के लिए प्रति हेक्टेयर उपज बढ़ाना जरूरी है। किसानों को अच्छी गुणवत्ता और रोगरोधी बीज गन्ने का चयन करना होगा। इसके साथ ही समय से बुवाई, उचित दूरी, संतुलित उर्वरक का इस्तेमाल, सिंचाई, निराई-गुड़ाई और पेड़ी प्रबंधन पर ध्यान देना होगा। जलभराव और रोगों से फसल को बचाने के लिए खेतों में जल निकासी की उचित व्यवस्था भी जरूरी है।
मौसम में बदलाव भी गन्ने की पैदावार को प्रभावित कर रहा है। अत्यधिक बारिश, लंबे समय तक खेत में पानी भरा रहना, तापमान में उतार-चढ़ाव और समय पर सिंचाई न मिलना उत्पादन को प्रभावित कर सकता है। इसके अलावा लाल सड़न जैसे रोग और कीटों का प्रकोप भी उपज कम कर देता है। ऐसे में गन्ना विभाग की सलाह के अनुसार उन्नत प्रजातियों और वैज्ञानिक तकनीक का इस्तेमाल उत्पादन बढ़ाने में मददगार हो सकता है।
रकबा नहीं, उत्पादकता बढ़ाना अब बड़ी चुनौती
पांच साल के आंकड़ों से यह तस्वीर सामने आती है कि जिले में गन्ने की खेती का क्षेत्रफल बढ़ाने में किसानों ने रुचि दिखाई, लेकिन प्रति हेक्टेयर उत्पादन में वैसी वृद्धि नहीं हो सकी।
साल-दर साल हुई औसत उपज के आंकड़े
जिले में गन्ने के क्षेत्रफल में उतार-चढ़ाव के साथ उत्पादन और औसत उपज में भी बदलाव दर्ज हुआ है। वर्ष 2021-22 में 1,02,813 हेक्टेयर में गन्ने की खेती हुई और 821.56 लाख क्विंटल उत्पादन हुआ। औसत उपज 799.08 क्विंटल प्रति हेक्टेयर रही। वर्ष 2022-23 में रकबा बढ़कर 1,09,019 हेक्टेयर पहुंचा और उत्पादन 878.87 लाख क्विंटल हो गया। औसत उपज भी बढ़कर 806.16 क्विंटल प्रति हेक्टेयर रही। वर्ष 2023-24 में गन्ने का रकबा पांच साल के सर्वाधिक 1,10,737 हेक्टेयर पर पहुंचा। इस वर्ष उत्पादन 919.16 लाख क्विंटल और औसत उपज 830.04 कुंतल प्रति हेक्टेयर रही। इसके बाद वर्ष 2024-25 में रकबा घटकर 1,02,574 हेक्टेयर रह गया और उत्पादन 823.34 लाख क्विंटल हुआ। औसत उपज 802.68 कुंतल रही। वर्ष 2025-26 में रकबा मामूली बढ़कर 1,02,792 हेक्टेयर हुआ, लेकिन उत्पादन 796.56 लाख क्विंटल और औसत उपज 774.92 क्विंटल रह गई।
वर्जन
किसानों को गन्ने की अच्छी उपज के लिए गुणवत्तापूर्ण बीज का चयन करना चाहिए। कई किसान खराब बीज गन्ने का इस्तेमाल करते हैं, जिससे पैदावार प्रभावित होती है। समय पर निराई-गुड़ाई और पेड़ी प्रबंधन भी जरूरी है। किसान यदि सही प्रजाति का चयन कर वैज्ञानिक तरीके से गन्ने की खेती करें और फसल की समय से देखभाल करें तो प्रति हेक्टेयर उत्पादन काफी बेहतर किया जा सकता है। जिले में कई किसान ऐसे हैं, जो हर वर्ष अच्छी उपज ले रहे हैं।
- खुशीराम भार्गव, जिला गन्ना अधिकारी