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बाढ़ से लोगों को बचाने के काम समय से शुरू होने पर भी संशय
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माधोटांडा। कोरोना महामारी के चलते बंद पड़े बाढ़ नियंत्रण कार्यों को सिंचाई विभाग नेे शुरू करने को हरी झंडी दे तो दी है, मगर करोड़ों रुपये के ये काम कब शुरू हो पाएंगे, कुछ कहा नहीं जा सकता। लगातार बारिश होने से शारदा नदी जलस्तर बढ़ चुका है और अब तो जून में मौसम शुरू होने पर काम पूरे हो पाना मुश्किल ही दिख रहा है। अफसर भी इस बात को मानते हैं।
तराई क्षेत्र में शारदा नदी की बाढ़ विभीषिका कई साल से निरंतर जारी है। शारदा नदी के दाहिने किनारे की ओर 22 किलोमीटर लंबे शारदा सागर डैम का अस्तित्व बचाने को अभियंताओं द्वारा लगभग हर साल ही करोड़ों रुपया खर्च किया जाता है। इतनी बड़ी धनराशि खर्च होने के बाद भी शारदा सागर डैम पर खतरा मंडराता रहता है। इसका मुख्य कारण यह है कि एक तो समय से बाढ़ नियंत्रण कार्य नहीं कराए जाते और दूसरे जो बजट मंजूर होता है उसका बंदरबांट भी कर लिया जाता है। यही वजह है कि बाढ़ नियंत्रण के जो कार्य कराए जाते हैं, एक-दो साल में ही बेकार हो जाते हैं। इधर, इस वर्ष भी जिले में बाढ़ नियंत्रण की कई परियोजनाएं स्वीकृत हुई थीं। जिसमें शारदा सागर डैम के सामने नगरिया खुर्दकलां से लेकर ढकिया ताल्लुके महाराजपुर, रामनगरा तक स्पर नंबर सात तक दाहिने किनारे की ओर बाढ़ नियंत्रण कार्य कराने को 5.87 करोड़ के एक प्रोजेक्ट को मंजूरी दी थी। बाढ़ खंड के अधीक्षण अभियंता (लखीमपुर) ने टेंडर भी निकाले थे। टेंडर प्रक्रिया में कम दरें आने के चलते 33 प्रतिशत कम दर पर ठेका कर दिया गया, मगर लॉकडाउन के चलते सारे कामों पर रोक लगा दी गई थी।
इधर, पूरनपुर विधायक बाबूराम पासवान ने प्रदेश के सिंचाई मंत्री डॉ. महेंद्र सिंह से मिलकर पूरनपुर क्षेत्र में बाढ़ नियंत्रण कार्य शुरू कराने का आग्रह किया था। ताकि बरसात से पूर्व स्थायी रूप से बाढ़ नियंत्रण कार्य कराए जा सकें। इस पर प्रदेश सरकार ने जिले में स्वीकृत बाढ़ नियंत्रण कार्यों को तत्काल शुरू करने के निर्देश दिए हैं। स्थानीय सिंचाई विभाग ने भी समय कम होने के कारण तत्काल कार्य करने को हरी झंडी दे दी। ताकि नदी का जलस्तर बढ़ने से पहले काम पूरा कराया जा सके, मगर जलस्तर तो बढ़ ही चुका है। हालांकि बाढ़ खंड के अधिशासी अभियंता शैलेश कुमार का कहना है कि शीघ्र कार्य शुरू कराने के प्रयास किए जा रहे हैं।
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शारदा नदी पर नगरिया खुर्द कलां से लेकर ढकिया ताल्लुके महाराजपुर में स्पर सात तक परियोजना स्वीकृत हुई है। शीघ्र कार्य शुरू कराने के प्रयास किए जा रहे हैं। विधायक बाबूराम पासवान का भी सहयोग मिला है। -शैलेश कुमार, अधिशासी अभियंता, बाढ़ खंड
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तराई क्षेत्र में शारदा नदी की बाढ़ विभीषिका कई साल से निरंतर जारी है। शारदा नदी के दाहिने किनारे की ओर 22 किलोमीटर लंबे शारदा सागर डैम का अस्तित्व बचाने को अभियंताओं द्वारा लगभग हर साल ही करोड़ों रुपया खर्च किया जाता है। इतनी बड़ी धनराशि खर्च होने के बाद भी शारदा सागर डैम पर खतरा मंडराता रहता है। इसका मुख्य कारण यह है कि एक तो समय से बाढ़ नियंत्रण कार्य नहीं कराए जाते और दूसरे जो बजट मंजूर होता है उसका बंदरबांट भी कर लिया जाता है। यही वजह है कि बाढ़ नियंत्रण के जो कार्य कराए जाते हैं, एक-दो साल में ही बेकार हो जाते हैं। इधर, इस वर्ष भी जिले में बाढ़ नियंत्रण की कई परियोजनाएं स्वीकृत हुई थीं। जिसमें शारदा सागर डैम के सामने नगरिया खुर्दकलां से लेकर ढकिया ताल्लुके महाराजपुर, रामनगरा तक स्पर नंबर सात तक दाहिने किनारे की ओर बाढ़ नियंत्रण कार्य कराने को 5.87 करोड़ के एक प्रोजेक्ट को मंजूरी दी थी। बाढ़ खंड के अधीक्षण अभियंता (लखीमपुर) ने टेंडर भी निकाले थे। टेंडर प्रक्रिया में कम दरें आने के चलते 33 प्रतिशत कम दर पर ठेका कर दिया गया, मगर लॉकडाउन के चलते सारे कामों पर रोक लगा दी गई थी।
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इधर, पूरनपुर विधायक बाबूराम पासवान ने प्रदेश के सिंचाई मंत्री डॉ. महेंद्र सिंह से मिलकर पूरनपुर क्षेत्र में बाढ़ नियंत्रण कार्य शुरू कराने का आग्रह किया था। ताकि बरसात से पूर्व स्थायी रूप से बाढ़ नियंत्रण कार्य कराए जा सकें। इस पर प्रदेश सरकार ने जिले में स्वीकृत बाढ़ नियंत्रण कार्यों को तत्काल शुरू करने के निर्देश दिए हैं। स्थानीय सिंचाई विभाग ने भी समय कम होने के कारण तत्काल कार्य करने को हरी झंडी दे दी। ताकि नदी का जलस्तर बढ़ने से पहले काम पूरा कराया जा सके, मगर जलस्तर तो बढ़ ही चुका है। हालांकि बाढ़ खंड के अधिशासी अभियंता शैलेश कुमार का कहना है कि शीघ्र कार्य शुरू कराने के प्रयास किए जा रहे हैं।
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शारदा नदी पर नगरिया खुर्द कलां से लेकर ढकिया ताल्लुके महाराजपुर में स्पर सात तक परियोजना स्वीकृत हुई है। शीघ्र कार्य शुरू कराने के प्रयास किए जा रहे हैं। विधायक बाबूराम पासवान का भी सहयोग मिला है। -शैलेश कुमार, अधिशासी अभियंता, बाढ़ खंड