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काजी-ए-शहर ने राम मंदिर निर्माण से जुड़ी विवादित पोस्ट की वायरल, बाद में हटाई
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पीलीभीत। अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के भूमि पूजन के बाद अब आस्तान-ए-हशमतिया के सज्जादनशीन एवं काजी ए शहर मौलाना जरताब रजा खां ने सोशल मीडिया पर एक विवादित पोस्ट डाल दी। हालांकि काजी ए शहर ने कुछ ही देर बाद यह पोस्ट डिलीट कर दी। इस बीच हिंदू संगठनों ने इस पोस्ट रोष जताया है।
व्हाट्सऐप के स्टेटस में लिखा गया था कि मुसलमान गमगीन न हो। सब्र से काम लो, हर चीज का एक वक्त होता है। अगर हम अपने इतिहास को देखें तो सैकड़ों सालों तक काबा शरीफ के अंदर मूर्तियां (बुत) रखे हुए थे और जब इस्लाम का गलबा हुआ तो काबा शरीफ को बुतों से पाक कर दिया गया। विवादित पोस्ट में मुसलमानों से सब्र करने की बात कहते हुए अप्रत्यक्ष रूप से अयोध्या में फतेह हासिल करने जैसा संदेश दिया गया। हालांकि जब विवादित पोस्ट के बारे में काजी ए शहर से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले का वह पूरा सम्मान करते हैं। कहीं से पोस्ट आई थी। बच्चे ने गलती से पोस्ट कर दिया, जिसके बाद उन्होंने पोस्ट हटा ली है।
मेरे मोबाइल फोन पर कहीं से यह पोस्ट आई थी। उसे परिवार के बच्चों ने मेरे व्हाट्सऐप के स्टेटस पर लगा दिया। जब मुझे इसकी जानकारी हुई तो मैने उसे तत्काल डिलीट कर दिया। मैं सुप्रीम कोर्ट के फैसले का पूरा सम्मान करता हूं। किसी तरह का विवाद नहीं है। - मौलाना जरताब रजा खां, सज्जादानशीन, आस्तान ए हशमतिया
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व्हाट्सऐप के स्टेटस में लिखा गया था कि मुसलमान गमगीन न हो। सब्र से काम लो, हर चीज का एक वक्त होता है। अगर हम अपने इतिहास को देखें तो सैकड़ों सालों तक काबा शरीफ के अंदर मूर्तियां (बुत) रखे हुए थे और जब इस्लाम का गलबा हुआ तो काबा शरीफ को बुतों से पाक कर दिया गया। विवादित पोस्ट में मुसलमानों से सब्र करने की बात कहते हुए अप्रत्यक्ष रूप से अयोध्या में फतेह हासिल करने जैसा संदेश दिया गया। हालांकि जब विवादित पोस्ट के बारे में काजी ए शहर से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले का वह पूरा सम्मान करते हैं। कहीं से पोस्ट आई थी। बच्चे ने गलती से पोस्ट कर दिया, जिसके बाद उन्होंने पोस्ट हटा ली है।
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मेरे मोबाइल फोन पर कहीं से यह पोस्ट आई थी। उसे परिवार के बच्चों ने मेरे व्हाट्सऐप के स्टेटस पर लगा दिया। जब मुझे इसकी जानकारी हुई तो मैने उसे तत्काल डिलीट कर दिया। मैं सुप्रीम कोर्ट के फैसले का पूरा सम्मान करता हूं। किसी तरह का विवाद नहीं है। - मौलाना जरताब रजा खां, सज्जादानशीन, आस्तान ए हशमतिया
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