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अभी तीन दिन जारी रहेगी शीतलहर, 22 के बाद हो सकती है बूंदाबांदी

Wed, 19 Jan 2022 02:00 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Wed, 19 Jan 2022 02:00 AM IST
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cold wave next three days
पीलीभीत। शीतलहर का प्रकोप जारी है, अभी तीन दिन और सर्दी का सितम जारी रहने का अनुमान है। दूसरी तरफ 22 जनवरी के बाद बारिश होने की भी संभावना है। उसके बाद राहत मिल सकती है। मंगलवार को सर्द हवाओं ने लोगों को परेशान किया। रात में गलन परेशानी का सबब बन रही है।
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सोमवार को अधिकतम तापमान 16 और न्यूनतम 7 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया गया। मंगलवार को अधिकतम दो डिग्री बढ़ा लेकिन न्यूनतम का हाल पिछले दिन जैसा ही रहा। सुबह से ही घना कोहरा और हवाएं चलीं। मौसम विज्ञानी डॉ. एसएस ढाका के अनुसार अभी तीन दिन शीतलहर जारी रहेगी। 22 से 24 जनवरी के बीच बादल छाए रहने और बूंदाबांदी की संभावना बन रही है। हालांकि उसके बाद मौसम सामान्य रह सकता है।
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मौसम की मार से आलू की फसल झुलसने के आसार
कोहरे और ठंड के साथ मौसम में नमी लगातार बढ़ रही है। ऐसे में आलू की फसल में झुलसा रोग लगने की आशंका बढ़ गई है। हालांकि अभी जिले में इसके लक्षण नहीं मिले हैं, लेकिन अगले कुछ दिनों में कोहरा और ठंड बढ़ने से आलू की फसलें खराब हुई है। ऐसे में समय रहते किसानों को रोग से बचाव के तलाशने होंगे।
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जिले में आलू का करीब साढ़े पांच हजार हेक्टेयर रकबा है। पूरनपुर और कलीनगर तहसील क्षेत्र में सबसे अधिक खेती होती है। पूर्व में चार दिन बारिश होने से खेतों में नमी अभी तक बनी हुई है। बारिश के बाद लगातार ठंड बढ़ी है। तीन दिन से कोहरा भी पड़ रहा है। ठंड के मौसम में कोहरा और ओस पड़ने पर अधिक नमी हो रही है। अधिक नमी में झुलसा रोग की संभावना बढ़ जाता है। हालांकि जिले में अभी तक कहीं से इसकी कोई शिकायत नहीं है, लेकिन मौसम वैज्ञानिकों ने अगले कुछ दिनों में ठंड और कोहरे होने की संभावना जताई है। इसलिए किसानों को भी सचेत रहने की जरूरत है। किसानों को इस रोग के फैलने से पहले ही बचाव के उपाय कर लेने चाहिए।
ऐसे बीमारी को पहचानें
यदि पत्तियों पर पानी जैसे धब्बे नजर आते हैं तो ये झुलसा के लक्षण हो सकते हैं। किसान को तुरंत अलर्ट हो जाना चाहिए। क्योंकि ये धब्बे पत्ते को सुखा देते हैं। जब यह रोग तने तक पहुंच जाए तो फसल बर्बाद हो सकती है। पौधा दो से तीन दिन में ही खत्म हो जाता है।

बीमारी से पहले ही ये करें उपाय
यदि किसानों ने अपनी फसल में फफूंदनाशक दवा का छिड़काव नहीं कराया है तो वह तुंरत मैंकोजेब, या प्रोपीनेब या क्लोरोथेलोनील युक्त दवा का 0.2 से 02.25 प्रतिशत की दर से या 2.0 से 2.5 किलोग्राम दवा एक हजार लीटर पानी में घोलकर प्रति हेक्टेयर छिड़काव करें। वहीं झुलसा रोग लगने पर फफूंदीनाशक साइमोक्सेनिल और मैंकोजेब का तीन किलोग्राम प्रति हेक्टेयर एक हजार लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें। या डाइमथुवेट मार्क एक किलोग्राम, मैंकोजेब दो किलो कुल तीन किलोग्राम मिश्रण बनाकर प्रति हेक्टेयर एक हजार लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें। फफूंदीनाशक को दस दिन में दोहराया जा सकता है। बीमारी के हिसाब से लगाने का समय घटाया या बढ़ाया जा सकता है।
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