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मरीज न भर्तीं करने को लेकर अब सीएमओ और सीएमएस में ठनी
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पीलीभीत। बुखार और सेप्टिसीमिया की शिकार महिला की इलाज के अभाव में मौत के बाद लापरवाही का एक और मामला मंगलवार को सामने आया। क्वारंटीन सेंटर में भर्ती एक कोरोना संदिग्ध युवक में सांस लेने में तकलीफ बढ़ने के बाद एंबुलेंस से जिला अस्पताल ले तो आया गया, मगर डॉक्टरों और सीएमएस ने उसका इलाज करने से मना कर दिया। इस मामले को लेकर सीएमओ और सीएमएस के बीच मतभेद हो गए हैं। कोरोना संक्रमण के डर से अफसर और कर्मचारियों के बचने से स्थिति गंभीर होती जा रही है।
पूरनपुर के जटपुरा गांव के रहने वाला युवक कोरोना संक्रमित लोगों की चपेट में आने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने उसे चार दिन पहले उसका सैंपल लेकर 14 दिन के लिए क्वारंटीन सेंटर में भर्ती कर दिया था। सोमवार को उसकी अचानक तबीयत खराब होने लगी। क्वारंटीन में ड्यूटी करने वाले डॉक्टरों ने जब मरीज से पूछा तो उसने बताया उसे सांस लेने में तकलीफ हो रही है। इस पर क्वारंटीन का स्टाफ उसे एंबुलेंस से लेकर जिला अस्पताल पहुंचा। वहां डॉक्टरों ने उसका इलाज करने से मना कर दिया। इस पर स्टाफ उसे वापस क्वारंटीन सेंटर पर लेकर पहुुंच गया। स्वास्थ्य कर्मी ने मामला सीएमओ डॉ. सीमा अग्रवाल को बताया तो उन्होंने जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. रतनपाल सुमन से फोन पर बात कर मरीज भर्ती करने को कहा। सीएमएस ने उसे भर्ती करने से मना कर दिया। तब सीएमओ ने डॉ. पीके मिश्रा को क्वारंटीन सेंटर भेजकर युवक का इलाज करने साथ भेजा। इसे लेकर सीएमओ और सीएमएस के बीच भी खींचतान शुरू हो गई है। महिला और पुरुष सीएमएस में खींचतान पहले से ही चल रही है। स्वास्थ्य विभाग के अफसरों की खींचतान में स्वास्थ्य सेवाएं लड़खड़ाने लगी हैं।
क्वारंटीन वार्ड में कोरोना संदिग्ध को सांस लेने में तकलीफ हो रही थी। उसे जिला अस्पताल में भर्ती करने के लिए भिजवाया गया। वहां उसका इलाज करने से मना कर दिया। इस मामले में लिखित पत्र भेजा जा रहा है। -डॉ. सीमा अग्रवाल, सीएमओ
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अस्पताल में किसी भी मरीज को कोई परेशानी नहीं होने दी जा रही है। मरीज का मैंने और डॉ. संजीव ने परीक्षण किया था। वह एकदम ठीक है। इसलिए उसे भर्ती नहीं किया गया। अगर कोई परेशानी होती तो भर्ती किया जाता। -डॉ. रतनपाल सिंह सुमन, सीएमएस, जिला पुरुष अस्पताल
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पूरनपुर के जटपुरा गांव के रहने वाला युवक कोरोना संक्रमित लोगों की चपेट में आने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने उसे चार दिन पहले उसका सैंपल लेकर 14 दिन के लिए क्वारंटीन सेंटर में भर्ती कर दिया था। सोमवार को उसकी अचानक तबीयत खराब होने लगी। क्वारंटीन में ड्यूटी करने वाले डॉक्टरों ने जब मरीज से पूछा तो उसने बताया उसे सांस लेने में तकलीफ हो रही है। इस पर क्वारंटीन का स्टाफ उसे एंबुलेंस से लेकर जिला अस्पताल पहुंचा। वहां डॉक्टरों ने उसका इलाज करने से मना कर दिया। इस पर स्टाफ उसे वापस क्वारंटीन सेंटर पर लेकर पहुुंच गया। स्वास्थ्य कर्मी ने मामला सीएमओ डॉ. सीमा अग्रवाल को बताया तो उन्होंने जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. रतनपाल सुमन से फोन पर बात कर मरीज भर्ती करने को कहा। सीएमएस ने उसे भर्ती करने से मना कर दिया। तब सीएमओ ने डॉ. पीके मिश्रा को क्वारंटीन सेंटर भेजकर युवक का इलाज करने साथ भेजा। इसे लेकर सीएमओ और सीएमएस के बीच भी खींचतान शुरू हो गई है। महिला और पुरुष सीएमएस में खींचतान पहले से ही चल रही है। स्वास्थ्य विभाग के अफसरों की खींचतान में स्वास्थ्य सेवाएं लड़खड़ाने लगी हैं।
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क्वारंटीन वार्ड में कोरोना संदिग्ध को सांस लेने में तकलीफ हो रही थी। उसे जिला अस्पताल में भर्ती करने के लिए भिजवाया गया। वहां उसका इलाज करने से मना कर दिया। इस मामले में लिखित पत्र भेजा जा रहा है। -डॉ. सीमा अग्रवाल, सीएमओ
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अस्पताल में किसी भी मरीज को कोई परेशानी नहीं होने दी जा रही है। मरीज का मैंने और डॉ. संजीव ने परीक्षण किया था। वह एकदम ठीक है। इसलिए उसे भर्ती नहीं किया गया। अगर कोई परेशानी होती तो भर्ती किया जाता। -डॉ. रतनपाल सिंह सुमन, सीएमएस, जिला पुरुष अस्पताल