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अंत्येष्टि स्थल बनाने को आई रकम खर्च न करने पर दो बाबू निलंबित
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पीलीभीत। अंत्येष्टि स्थल और पंचायत भवन निर्माण को शासन से मिले 1.14 करोड़ रुपये लेप्स हो गए। जिला विकास अधिकारी (डीडीओ) ने पंचायत विभाग के दो वरिष्ठ सहायकों की लापरवाही मानते हुए उन्हें निलंबित कर दिया। उन्हें विकास विभाग से सम्बद्ध किया गया है।
शासन ने चार अंत्येष्टि स्थल और एक पंचायत भवन निर्माण के लिए गत वर्ष अक्तूबर में पंचायत विभाग को 1.14 करोड़ धनराशि दी थी। बताते हैं कि पंचायत विभाग ने मिली धनराशि कोषागार को दरकिनार कर अपने माध्यम से चयनित ग्राम पंचायतों में धनराशि भेज दी। 31 मार्च को जब वित्तीय वर्ष की समाप्ति के दौरान मामला सामने आया तो अफसरों के होश उड़ गए। 31 मार्च को स्वत: ही 1.14 करोड़ रुपये की धनराशि लेप्स हो गई। नियमानुसार यह धनराशि कोषागार के माध्यम से ही ग्राम पंचायतों में भेजी जानी चाहिए थी।
इस गड़बड़ी पर संबंधित पटल के दो वरिष्ठ सहायकों को जिम्मेदार बताते हुए जिला विकास अधिकारी योगेंद्र पाठक ने सोमवार शाम उन्हें निलंबित कर दिया। इनमें वरिष्ठ सहायक श्याम बाबू और हरिशंकर अग्रवाल शामिल हैं। साथ ही पंचायत विभाग में तैनात डीपीएम अभिषेक मिश्रा को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण तलब किया है। इस संबंध में डीपीआरओ प्रमोद कुमार यादव ने कार्रवाई की बात को स्वीकारते हुए बताया कि भुगतान से संबंधित अभिलेखों को छुपाने और गुमराह करने के मामले में दोनों वरिष्ठ सहायकों को निलंबित किया गया।
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शासन ने चार अंत्येष्टि स्थल और एक पंचायत भवन निर्माण के लिए गत वर्ष अक्तूबर में पंचायत विभाग को 1.14 करोड़ धनराशि दी थी। बताते हैं कि पंचायत विभाग ने मिली धनराशि कोषागार को दरकिनार कर अपने माध्यम से चयनित ग्राम पंचायतों में धनराशि भेज दी। 31 मार्च को जब वित्तीय वर्ष की समाप्ति के दौरान मामला सामने आया तो अफसरों के होश उड़ गए। 31 मार्च को स्वत: ही 1.14 करोड़ रुपये की धनराशि लेप्स हो गई। नियमानुसार यह धनराशि कोषागार के माध्यम से ही ग्राम पंचायतों में भेजी जानी चाहिए थी।
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इस गड़बड़ी पर संबंधित पटल के दो वरिष्ठ सहायकों को जिम्मेदार बताते हुए जिला विकास अधिकारी योगेंद्र पाठक ने सोमवार शाम उन्हें निलंबित कर दिया। इनमें वरिष्ठ सहायक श्याम बाबू और हरिशंकर अग्रवाल शामिल हैं। साथ ही पंचायत विभाग में तैनात डीपीएम अभिषेक मिश्रा को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण तलब किया है। इस संबंध में डीपीआरओ प्रमोद कुमार यादव ने कार्रवाई की बात को स्वीकारते हुए बताया कि भुगतान से संबंधित अभिलेखों को छुपाने और गुमराह करने के मामले में दोनों वरिष्ठ सहायकों को निलंबित किया गया।
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