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Pilibhit News: राम ताल की सफाई शुरू, 11 करोड़ से होगा सुंदरीकरण
Tue, 31 Dec 2024 12:40 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत
संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत
Updated Tue, 31 Dec 2024 12:40 AM IST
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जलालाबाद। अमृत सरोवर योजना में चयनित भगवान परशुराम की जन्मस्थली में स्थित राम ताल का 11 करोड़ रुपये की लागत से सुंदरीकरण होगा। इस राशि से वहां पहुंचने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा से जुड़े कई कार्य कराए जाएंगे।
शासन से बजट की पहली किस्त 11 लाख रुपये जारी होने के साथ कार्यदायी संस्था सीएंडडीएस ने मजदूर लगाकर तालाब की सफाई का काम शुरू करा दिया है। पहले चरण में तालाब की गंदगी और उसमें उपजी जलकुंभी निकाली जा रही है। नगर के मोहल्ला खेड़ा (परशुरामपुरी वार्ड) स्थित भगवान परशुराम के मंदिर के सामने करीब 42 बीघा क्षेत्रफल में काफी बड़ा तालाब है। यह तालाब पूरे वर्ष पानी से भरा रहता है, लेकिन कई मोहल्लों के घरों से निकलने वाले गंदे पानी वाले छह से अधिक नालों का रुख तालाब में होने से इसका पानी दूषित हो गया है।
मान्यता है कि क्षत्रियों का विनाश करने के बाद भगवान परशुराम ने इसी तालाब में अपना फरसा फेंका था। इसीलिए तालाब का नाम रामताल पड़ा। सीएंडडीएस के परियोजना प्रबंधक रघुवंश राम ने बताया कि रामताल की सफाई की जो कार्ययोजना बनाई गई, उसी के तहत क्रम वार सभी कार्य कराए जाएंगे।
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प्रस्तावित हैं यह सभी कार्य
तालाब की सफाई के बाद आईआईटी के विशेषज्ञों की टीम द्वारा तैयार किए गए मास्टर प्लान के अनुरूप गंदे पानी को तालाब में जाने से रोककर उसे दूसरे स्थान पर एकत्र किया जाएगा। आधुनिक तकनीक के माध्यम से साफ-सुथरा करके तालाब में डालने की व्यवस्था की जाएगी। वहां नए घाट का निर्माण नहीं होगा, बल्कि पहले से बने घाट की मरम्मत कराकर उसे आकर्षक बनाया जाएगा। वहां वाहनों की पार्किंग की व्यवस्था सहित पहुंच मार्ग बनाया जाना भी प्रस्तावित है। यहां तक पहुंचने के लिए अलग से एप्रोच रोड का भी निर्माण होगा।
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शासन से बजट की पहली किस्त 11 लाख रुपये जारी होने के साथ कार्यदायी संस्था सीएंडडीएस ने मजदूर लगाकर तालाब की सफाई का काम शुरू करा दिया है। पहले चरण में तालाब की गंदगी और उसमें उपजी जलकुंभी निकाली जा रही है। नगर के मोहल्ला खेड़ा (परशुरामपुरी वार्ड) स्थित भगवान परशुराम के मंदिर के सामने करीब 42 बीघा क्षेत्रफल में काफी बड़ा तालाब है। यह तालाब पूरे वर्ष पानी से भरा रहता है, लेकिन कई मोहल्लों के घरों से निकलने वाले गंदे पानी वाले छह से अधिक नालों का रुख तालाब में होने से इसका पानी दूषित हो गया है।
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मान्यता है कि क्षत्रियों का विनाश करने के बाद भगवान परशुराम ने इसी तालाब में अपना फरसा फेंका था। इसीलिए तालाब का नाम रामताल पड़ा। सीएंडडीएस के परियोजना प्रबंधक रघुवंश राम ने बताया कि रामताल की सफाई की जो कार्ययोजना बनाई गई, उसी के तहत क्रम वार सभी कार्य कराए जाएंगे।
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प्रस्तावित हैं यह सभी कार्य
तालाब की सफाई के बाद आईआईटी के विशेषज्ञों की टीम द्वारा तैयार किए गए मास्टर प्लान के अनुरूप गंदे पानी को तालाब में जाने से रोककर उसे दूसरे स्थान पर एकत्र किया जाएगा। आधुनिक तकनीक के माध्यम से साफ-सुथरा करके तालाब में डालने की व्यवस्था की जाएगी। वहां नए घाट का निर्माण नहीं होगा, बल्कि पहले से बने घाट की मरम्मत कराकर उसे आकर्षक बनाया जाएगा। वहां वाहनों की पार्किंग की व्यवस्था सहित पहुंच मार्ग बनाया जाना भी प्रस्तावित है। यहां तक पहुंचने के लिए अलग से एप्रोच रोड का भी निर्माण होगा।