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नियम शर्तों पर मिली अनुमति, जंगल में ट्रेनों की स्पीड होगी 20

Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Wed, 07 Apr 2021 11:11 PM IST
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पीलीभीत। वन्यजीवों की सुरक्षा को लेकर आमान परिवर्तन के लिए तीन साल से फंसा एनओसी का पेच अब खत्म हो गया है। वन मंत्रालय के निर्देश पर वन विभाग और रेल अफसरों ने छह मार्च को वन्यजीवों की सुरक्षा को लेकर संयुक्त सर्वे किया था। इसके बाद तार फेंसिंग, ट्रेनों की स्पीड 20 किलोमीटर प्रति घंटा सहित कई शर्तों के साथ जंगल में ब्रॉडगेज की पटरियों को बिछाने के लिए अनुमति दे दी गई है। इससे जल्द ही आमान परिवर्तन का काम शुरू हो सकेगा।
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मैलानी रेल खंड पर आमान परिवर्तन के लिए 30 मई 2018 को मीटरगेज की ट्रेनों का हमेशा के लिए संचालन बंद कर दिया गया था। इसके बाद ब्रॉडगेज की पटरियां डालने के लिए एक जून 2018 से कार्यदायी संस्था ने काम शुरू कर दिया। इस रेल खंड पर पीलीभीत और शहगढ़ के बीच करीब आठ किलोमीटर पीलीभीत टाइगर रिजर्व का जंगल पड़ता है। जंगल में ब्रॉडगेज का काम करने के लिए कार्यदायी संस्था ने वन विभाग से एनओसी के लिए आवेदन किया था। इसमें पर्यावरण और फॉरेस्ट के लिए तो एनओसी मिल गई थी, मगर वन्यजीव सुरक्षा को लेकर एनओसी नहीं मिल पाई थी। कई बार वन विभाग के अफसरों ने सर्वे किया। नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी (एनटीसीए) के डीआईजी ने जुलाई 2020 में सर्वे किया था। इसके बाद भी नतीजा शून्य रहा। केंद्रीय वन मंत्रालय के निर्देश पर छह मार्च को वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (डब्ल्यूआईआई) देहरादून के डॉ. कौशिक बनर्जी, पीटीआर के डीडी नवीन खंडेलवाल और पूर्वोत्तर रेलवे के डीजीएम राकेश सक्सेना ने संयुक्त सर्वे किया था। सर्वे के दौरान वन्यजीवों को ट्रेस करने के लिए 15 दिनों के लिए कैमरे लगाए गए थे। 31 मार्च को एनओसी के लिए मंत्रालय में बैठक हुई। बैठक में वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए अंडरपास, तार फेंसिंग और ट्रेन की स्पीड 20 किलोमीटर प्रति घंटा जंगल एरिया में निर्धारित की गई। इस पर सहमति दे दी। वन विभाग और रेलवे अफसरों ने इस पर जंगल एरिया में ब्रॉडगेज की पटरिया डालने के लिए एनओसी जारी कर दी है। इससे जल्द ही काम शुरू होने की संभावना है।

आमान परिवर्तन के लिए जंगल एरिया का सर्वे किया गया था। इसके बाद सर्वे रिपोर्ट मंत्रालय भेज दी गई थी। 31 मार्च को इस संबंध में बैठक मंत्रालय में हुई थी। एनओसी हो गई है। इस संबंध में अभी लिखित में कोई आदेश नहीं आया है। - नवीन खंडेलवाल, डीडी पीटीआर

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