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वाहनों के लिए दूसरे दिन भी भकटते रहे श्रद्धालु
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पीलीभीत। मां पूर्णागिरि के दर्शन करने को जाने वाले श्रद्धालुओं को बुधवार दूसरे दिन भी मुसीबतें झेलने पड़ीं। पूर्णागिरि धाम जाने वाले श्रद्धालुओं को सवारी के लिए इधर-उधर भटकना पड़ा। दिन में टनकपुर जाने को कोई ट्रेन नहीं है। रोडवेज बसों की संख्या सवारियों के लिहाज से कम है। डग्गामार मार वाहनों वाले मनमाना किराया वसूल रहे हैं। इसकी वजह से श्रद्धालु खासे परेशान हैं।
उत्तराखंड के चंपावत में स्थित मां पूर्णागिरि धाम में हर वर्ष तीन माह तक मेला लगता है। इसमें देशभर से श्रद्धालु मां पूर्णागिरि के दर्शन करने पहुंचते हैं। मां पूर्णागिरि धाम के लिए एक रास्ता पीलीभीत होकर जाता है। अभी टनकपुर तक केवल दो ट्रेनें संचालित हैं। इनमें एक पैसेंजर और एक पूर्णागिरि जन शताब्दी एक्सप्रेस है। पूर्णागिरि जन शताब्दी एक्सप्रेस में तत्काल टिकट की सुविधा नहीं है। ऐसे में कोई व्यक्ति यात्रा के दिन टिकट बुक नहीं कर पाता है। रोडवेज की केवल सात बसें टनकपुर जा रही हैं। इनमें तीन बसें पहले से चल रही थीं, चार और बढ़ा दीं। बसें कम होने से श्रद्धालुओं को इधर-उधर भटकते के साथ घंटों इंतजार करना पड़ता है।
पूर्णागिरि मेला शुरू होने के दूसरे दिन बुधवार को कई यात्री रेलवे स्टेशन पहुंचे, लेकिन वहां कोई ट्रेन नहीं थी। वहां से रोडवेज बस स्टैंड गए। वहां बसों का घंटों इंतजार करना पड़ा। बता दें कि 30 मार्च से मेला शुरू हो चुका है। ऐसे में गैर जनपदों से श्रद्धालुओं का भी आवागमन शुरू होने से भीड़ बढ़ी है। जिससे साधन को लेकर समस्या और बढ़ गई है।
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उत्तराखंड के चंपावत में स्थित मां पूर्णागिरि धाम में हर वर्ष तीन माह तक मेला लगता है। इसमें देशभर से श्रद्धालु मां पूर्णागिरि के दर्शन करने पहुंचते हैं। मां पूर्णागिरि धाम के लिए एक रास्ता पीलीभीत होकर जाता है। अभी टनकपुर तक केवल दो ट्रेनें संचालित हैं। इनमें एक पैसेंजर और एक पूर्णागिरि जन शताब्दी एक्सप्रेस है। पूर्णागिरि जन शताब्दी एक्सप्रेस में तत्काल टिकट की सुविधा नहीं है। ऐसे में कोई व्यक्ति यात्रा के दिन टिकट बुक नहीं कर पाता है। रोडवेज की केवल सात बसें टनकपुर जा रही हैं। इनमें तीन बसें पहले से चल रही थीं, चार और बढ़ा दीं। बसें कम होने से श्रद्धालुओं को इधर-उधर भटकते के साथ घंटों इंतजार करना पड़ता है।
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पूर्णागिरि मेला शुरू होने के दूसरे दिन बुधवार को कई यात्री रेलवे स्टेशन पहुंचे, लेकिन वहां कोई ट्रेन नहीं थी। वहां से रोडवेज बस स्टैंड गए। वहां बसों का घंटों इंतजार करना पड़ा। बता दें कि 30 मार्च से मेला शुरू हो चुका है। ऐसे में गैर जनपदों से श्रद्धालुओं का भी आवागमन शुरू होने से भीड़ बढ़ी है। जिससे साधन को लेकर समस्या और बढ़ गई है।
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