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डीसी मनरेगा तबीयत बिगड़ने पर छुट्टी पर गए, अब दूसरे अधिकारी को जांच सौंपने की तैयारी
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पीलीभीत। मनरेगा में काम कर रही 2026 फर्मों में नियमों की अनदेखी और बड़े पैमाने पर गड़बड़ी का अंदेशा होने पर कराई जा रही जांच अधर में रह गई है। जांच अधिकारी डीसी मनरेगा तबीयत बिगड़ने पर लंबी छुट्टी पर चले गए हैं। वहीं अब जांच को गति देने के लिए डीएम ने किसी दूसरे जिला स्तरीय अधिकारी को जिम्मेदारी देने का मन बनाया है। सीडीओ को दूसरे अधिकारी को लगाकर जांच पूरी कराने के निर्देश दिए हैं।
मनरेगा में जॉबकार्ड धारकों से वसूली, दूसरे गांवों से श्रमिक बुलाकर काम कराने, फर्जी मस्टररोल बनाने जैसी आम शिकायतें के बाद फर्म बनाकर बड़े घोटाले किए गए। अगस्त 2020 में अमरिया के एपीओ और तीन रोजगार सेवक बर्खास्त कर जेल भेजे गए थे। इन पर निजी फर्म और फर्जी मस्टररोल बनाकर करोड़ों के घोटाले का आरोप था। इसके बाद माधोटांडा के रोजगार सेवक इस्लामुद्दीन खां और पूरनपुर के तकनीकी सहायक राजीव भारती, भगवान सिंह की भी दो फर्में चलती मिली थीं। इन फर्मों से भी बड़ा घोटाला किया गया था। इस मामले में भी तीनों को बर्खास्त कर रिपोर्ट दर्ज कराई जा चुकी है। इन घोटालों का संज्ञान लेकर डीएम ने 2026 फर्म की सूची बनाकर सत्यापन की जिम्मेदारी डीसी मनरेगा मृणाल सिंह को दी थी। डीसी मनरेगा की ओर से की गई जांच में 1100 फर्म बिना जीएसटी पंजीकरण चलती मिली थीं। 400 फर्म जीएसटी पंजीकृत थीं, उनमें भी 80 के कागजात नहीं मिल सके थे। अधूरी पत्रावली होने पर डीएम ने पत्रावली वापस कर दी थी। इसी बीच डीसी मनरेगा का स्वास्थ्य बिगड़ा और वह छुट्टी पर चले गए। इससे जांच अधर में अटकी हुई है। अब इसे गति देने के लिए डीएम ने दूसरे अफसर को लगाने का मन बनाया है।
मनरेगा में घोटालों पर शिकंजा कसने को कई बिंदुओं पर काम करा रहे हैं। लंबे समय से जमे कर्मचारियों के कार्यक्षेत्र में बदलाव किया जा चुका है। 2026 फर्म की जांच भी चल रही है। अभी तक डीसी मनरेगा को जिम्मेदारी दी गई थी। मगर वह स्वास्थ्य बिगड़ने पर छुट्टी पर चले गए हैं। सीडीओ को दूसरे अफसर को लगाकर जांच पूरी कराने के निर्देश दिए गए हैं। - पुलकित खरे, डीएम
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मनरेगा में जॉबकार्ड धारकों से वसूली, दूसरे गांवों से श्रमिक बुलाकर काम कराने, फर्जी मस्टररोल बनाने जैसी आम शिकायतें के बाद फर्म बनाकर बड़े घोटाले किए गए। अगस्त 2020 में अमरिया के एपीओ और तीन रोजगार सेवक बर्खास्त कर जेल भेजे गए थे। इन पर निजी फर्म और फर्जी मस्टररोल बनाकर करोड़ों के घोटाले का आरोप था। इसके बाद माधोटांडा के रोजगार सेवक इस्लामुद्दीन खां और पूरनपुर के तकनीकी सहायक राजीव भारती, भगवान सिंह की भी दो फर्में चलती मिली थीं। इन फर्मों से भी बड़ा घोटाला किया गया था। इस मामले में भी तीनों को बर्खास्त कर रिपोर्ट दर्ज कराई जा चुकी है। इन घोटालों का संज्ञान लेकर डीएम ने 2026 फर्म की सूची बनाकर सत्यापन की जिम्मेदारी डीसी मनरेगा मृणाल सिंह को दी थी। डीसी मनरेगा की ओर से की गई जांच में 1100 फर्म बिना जीएसटी पंजीकरण चलती मिली थीं। 400 फर्म जीएसटी पंजीकृत थीं, उनमें भी 80 के कागजात नहीं मिल सके थे। अधूरी पत्रावली होने पर डीएम ने पत्रावली वापस कर दी थी। इसी बीच डीसी मनरेगा का स्वास्थ्य बिगड़ा और वह छुट्टी पर चले गए। इससे जांच अधर में अटकी हुई है। अब इसे गति देने के लिए डीएम ने दूसरे अफसर को लगाने का मन बनाया है।
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मनरेगा में घोटालों पर शिकंजा कसने को कई बिंदुओं पर काम करा रहे हैं। लंबे समय से जमे कर्मचारियों के कार्यक्षेत्र में बदलाव किया जा चुका है। 2026 फर्म की जांच भी चल रही है। अभी तक डीसी मनरेगा को जिम्मेदारी दी गई थी। मगर वह स्वास्थ्य बिगड़ने पर छुट्टी पर चले गए हैं। सीडीओ को दूसरे अफसर को लगाकर जांच पूरी कराने के निर्देश दिए गए हैं। - पुलकित खरे, डीएम
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