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शारदा से हुए कटान के नुकसान का किसानों को मिलेगा मुआवजा, सर्वे शुरू
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पीलीभीत। शारदा नदी ने ट्रांस शारदा क्षेत्र के गांव राहुलनगर को निशाने पर लेकर करीब एक हजार एकड़ भूमि का कटान करने के साथ ही दस परिवारों को बेघर कर दिया है। शारदा के विकराल रूप को रोकने के लिए लाखों रुपये पानी में भी बहा दिए गए। इधर, पीड़ित परिवारों को राहत देने के लिए भले ही अब प्रशासन ने कार्रवाई तेज की है। इसके लिए पूरनपुर एसडीएम ने किसानों के कृषि भूमि का आकलन कर मुआवजा और पट्टे की भूमि देने की के लिए सर्वे शुरू कराया है, लेकिन प्रशासन के इस आश्वासन के बाद भी पीड़ित परिवार खुश नहीं दिखाई दे रहे हैं। उनका कहना कि वर्ष 2013 में भी सैकड़ों एकड़ कृषि भूमि का कटान हुआ था, उस समय भी प्रशासन ने पट्टा और मुआवजा देने का आश्वासन दिया था, लेकिन आज तक कोई अमल नहीं किया गया है।
नेपाल में महाकाली के नाम से प्रसिद्ध शारदा नदी नोमेंस लैंड से जनपद सीमा में प्रवेश करती है। कलीनगर तहसील क्षेत्र के अंतर्गत नदी की चौड़ाई अधिक है। इसके चलते नदी में बाढ़ की स्थिति का खतरा कम रहता है। वही जनपद के ट्रांस शारदा क्षेत्र में जाने पर नदी की स्थिति बिगड़ जाती है। नदी हर साल कटान करती आ रही है। वहीं कटान रोकने को बाढ़ खंड के अफसर दावे तो करते हैं, लेकिन ठोस कार्य के बजाए छिटपुट कार्य कराकर ही लाखों रुपये खर्च कर दिए जाते हैं और नतीजा शून्य ही निकलता है। इधर, इस बार नदी ने राहुलनगर को निशाने पर लेकर एक माह के भीतर करीब एक हजार एकड़ भूमि का कटान कर लिया है। इसमें पांच सौ एकड़ कृषि भूमि व पांच सौ एकड़ वन भूमि भी शामिल है। हालांकि राजस्व टीम के आकलन के मुताबिक कृषि में से करीब 250 एकड़ भूमि ऐसी है जो राजस्व अभिलेखों में दर्ज है। हालांकि इसमें पांच किसान ही ऐसे है जिनकी ढ़ाई-ढ़ाई एकड़ पट्टे की भूमि नदी में समाई भूमि है। बाकी ग्राम समाज, वन विभाग की निकली। जिस पर लोगों ने कब्जा कर फसलें बो रखी थी। दो दिन पूर्व से कटान की स्थिति सामान्य हो गई है। कटान में तबाह हुए किसानों को राहत देने के लिए प्रशासन ने कार्रवाई तेज कर दी है। कटान से हुए नुकसान का आकलन करने के लिए सर्वे शुरू किया गया है। प्रशासन के मुताबिक किसानों को कृषि पट्टा देने के साथ ही मुआवजा देने की प्रक्रिया भी तेज की गई है। प्रशासन के इस आश्वासन के बाद भी चंदिया हजारा और राहुलनगर के पीड़ित किसानों में कोई खुशी नहीं दिखाई दी है। उनका कहना कि ऐसे आश्वासन पूर्व में भी दिए गए थे, लेकिन कोई अमल नहीं हुआ, ऐसे में अगर इसपर अमल हो तो राहत मिल सकती है।
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नेपाल में महाकाली के नाम से प्रसिद्ध शारदा नदी नोमेंस लैंड से जनपद सीमा में प्रवेश करती है। कलीनगर तहसील क्षेत्र के अंतर्गत नदी की चौड़ाई अधिक है। इसके चलते नदी में बाढ़ की स्थिति का खतरा कम रहता है। वही जनपद के ट्रांस शारदा क्षेत्र में जाने पर नदी की स्थिति बिगड़ जाती है। नदी हर साल कटान करती आ रही है। वहीं कटान रोकने को बाढ़ खंड के अफसर दावे तो करते हैं, लेकिन ठोस कार्य के बजाए छिटपुट कार्य कराकर ही लाखों रुपये खर्च कर दिए जाते हैं और नतीजा शून्य ही निकलता है। इधर, इस बार नदी ने राहुलनगर को निशाने पर लेकर एक माह के भीतर करीब एक हजार एकड़ भूमि का कटान कर लिया है। इसमें पांच सौ एकड़ कृषि भूमि व पांच सौ एकड़ वन भूमि भी शामिल है। हालांकि राजस्व टीम के आकलन के मुताबिक कृषि में से करीब 250 एकड़ भूमि ऐसी है जो राजस्व अभिलेखों में दर्ज है। हालांकि इसमें पांच किसान ही ऐसे है जिनकी ढ़ाई-ढ़ाई एकड़ पट्टे की भूमि नदी में समाई भूमि है। बाकी ग्राम समाज, वन विभाग की निकली। जिस पर लोगों ने कब्जा कर फसलें बो रखी थी। दो दिन पूर्व से कटान की स्थिति सामान्य हो गई है। कटान में तबाह हुए किसानों को राहत देने के लिए प्रशासन ने कार्रवाई तेज कर दी है। कटान से हुए नुकसान का आकलन करने के लिए सर्वे शुरू किया गया है। प्रशासन के मुताबिक किसानों को कृषि पट्टा देने के साथ ही मुआवजा देने की प्रक्रिया भी तेज की गई है। प्रशासन के इस आश्वासन के बाद भी चंदिया हजारा और राहुलनगर के पीड़ित किसानों में कोई खुशी नहीं दिखाई दी है। उनका कहना कि ऐसे आश्वासन पूर्व में भी दिए गए थे, लेकिन कोई अमल नहीं हुआ, ऐसे में अगर इसपर अमल हो तो राहत मिल सकती है।
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