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इको डेवलपमेंट कमेटियां बनाएंगी वन, वन्यजीवों और मानव के बीच तालमेल
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पीलीभीत। जंगल से सटे गांवों की सीमा में हिंसक वन्यजीवों की बढ़ती सक्रियता और वन्यजीवों की सुरक्षा को लेकर उत्पन्न खतरे को टालने के लिए टाइगर रिजर्व के अफसर संजीदा हुए हैं। इसके लिए इको डेवलपमेंट कमेटियों का गठन किया जा रहा है। प्रथम चरण में टाइगर रिजर्व की बराही रेंज के पांच गांवों को शामिल किया जा रहा है। प्रत्येक गांव से करीब दस जागरूक लोगों को जोड़ने की कवायद शुरू की जा रही है। विभागीय अधिकारी इन समितियां की मॉनीटिरिंग करेंगे। अफसरों के निर्देश पर इस पर अमल शुरू कर दिया गया है।
टाइगर रिजर्व का जंगल पांच रेंजों में बंटा हुआ है। अनुकूल वातावरण होने के चलते जंगल में बाघ, तेंदुए समेत अन्य वन्यजीवों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। वहीं संसाधन और फील्ड स्टाफ की कमी के चलते वन और वन्यजीवों की सुरक्षा में चूक सामने आती रही है। यही वजह है कि जंगल में अवैध घुसपैठ के साथ बाघ, तेंदुओं की मौत की घटनाएं भी सामने आ रही हैं। बाघ, तेंदुए जंगल से बाहर निकलकर सीमा से सटे गांवों में दस्तक दे रहे हैं। इधर, बराही रेंज के अंतर्गत पिछले डेढ़ साल से जंगल से बाहर तेंदुए की दस्तक लगातार बढ़ती जा रही है। तेंदुए आबादी क्षेत्र में घुसकर मवेशियों को निवाला बना रहे हैं। विभागीय अफसर वन्यजीवों की निगरानी तो करा रहे हैं, लेकिन आबादी में उनकी लगातार चहलकदमी से जहां इंसानों को खतरा बना हुआ है, वहीं वन्यजीवों का जीवन भी संकट में है। इस सबको ध्यान में रखते हुए टाइगर रिजर्व के अफसरों ने नई कवायद शुरू करने का निर्णय किया है। इसके लिए बराही रेंज के अंतर्गत तेंदुए की अधिक सक्रियता वाले गांवों में इको डेवलपमेंट कमेटी का गठन किया जा रहा है। इसमें रमनगरा, सेल्हा, सिमरा, टांडा क्षतपति और नौजल्हा गांव शामिल है। कमेटी में गांव के करीब आठ से दस जागरूक लोगों को जोड़ा जाएगा। विभाग के स्तर से कमेटी को फंड दिया जाएगा।
इको डेवलपमेंट कमेटियों का गठन किया जा रहा है। इसमें बराही रेंज के पांच गांवों को शामिल किया गया है। प्रत्येक गांव के जागरूक लोगों को इसमें जोड़ा जाएगा। इससे वन्यजीवों की सुरक्षा के साथ ग्रामीणों को रोजगार के अवसर भी मिल सकेंगे।
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- नवीन खंडेलवाल, डीएफओ, पीलीभीत टाइगर रिजर्व
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टाइगर रिजर्व का जंगल पांच रेंजों में बंटा हुआ है। अनुकूल वातावरण होने के चलते जंगल में बाघ, तेंदुए समेत अन्य वन्यजीवों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। वहीं संसाधन और फील्ड स्टाफ की कमी के चलते वन और वन्यजीवों की सुरक्षा में चूक सामने आती रही है। यही वजह है कि जंगल में अवैध घुसपैठ के साथ बाघ, तेंदुओं की मौत की घटनाएं भी सामने आ रही हैं। बाघ, तेंदुए जंगल से बाहर निकलकर सीमा से सटे गांवों में दस्तक दे रहे हैं। इधर, बराही रेंज के अंतर्गत पिछले डेढ़ साल से जंगल से बाहर तेंदुए की दस्तक लगातार बढ़ती जा रही है। तेंदुए आबादी क्षेत्र में घुसकर मवेशियों को निवाला बना रहे हैं। विभागीय अफसर वन्यजीवों की निगरानी तो करा रहे हैं, लेकिन आबादी में उनकी लगातार चहलकदमी से जहां इंसानों को खतरा बना हुआ है, वहीं वन्यजीवों का जीवन भी संकट में है। इस सबको ध्यान में रखते हुए टाइगर रिजर्व के अफसरों ने नई कवायद शुरू करने का निर्णय किया है। इसके लिए बराही रेंज के अंतर्गत तेंदुए की अधिक सक्रियता वाले गांवों में इको डेवलपमेंट कमेटी का गठन किया जा रहा है। इसमें रमनगरा, सेल्हा, सिमरा, टांडा क्षतपति और नौजल्हा गांव शामिल है। कमेटी में गांव के करीब आठ से दस जागरूक लोगों को जोड़ा जाएगा। विभाग के स्तर से कमेटी को फंड दिया जाएगा।
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इको डेवलपमेंट कमेटियों का गठन किया जा रहा है। इसमें बराही रेंज के पांच गांवों को शामिल किया गया है। प्रत्येक गांव के जागरूक लोगों को इसमें जोड़ा जाएगा। इससे वन्यजीवों की सुरक्षा के साथ ग्रामीणों को रोजगार के अवसर भी मिल सकेंगे।
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- नवीन खंडेलवाल, डीएफओ, पीलीभीत टाइगर रिजर्व