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चपरासी कॉलोनी के 48 मकान कंडम, कराए जाएंगे खाली
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पीलीभीत। चपरासी कॉलोनी के चार दर्जन आवास कंडम घोषित कर दिए गए हैं। इनमें रहने वाले परिवारों को आवास खाली करने को कहा गया है। इससे चपरासी कॉलोनी में रहने वाले परिवार परेशान हैं। हालांकि अधिकांश लोगों ने किराए का मकान तलाशना शुरू कर दिया है।
सरकारी विभागों में कार्यरत चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के आवास एलआईसी के पास बने हुए हैं। ये आवास कई दशक पुराने हो चुके हैं। इनमें 48 आवास जर्जर हालत में हैं, जिन्हें खाली करने के लिए नोटिस दिए गए थे। मगर बाद में मामला ठंडे बस्ते में चला गया। अब इन कंडम मकानों को खाली कराने की प्रक्रिया शुरू की गई है। एक से लेकर 48 नंबर तक के आवासों को कंडम घोषित किया गया है। इनमें रहने वाले परिवारों को आवास खाली करने के लिए कह दिया गया है।
उधर, चपरासी कॉलोनी में रहने वालों का कहना है कि आवास पुराने हैं, लेकिन उनकी मरम्मत लगातार कराई जा रही थी। इससे कई आवास अभी ठीक हैं। मगर अधिकारी सभी को कंडम बताकर खाली कराने पर तुले हैं। कोरोना संक्रमण काल में किराए का मकान मिलना मुश्किल है। बच्चों की परीक्षाएं सिर पर हैं। ऐसे में अगर कुछ समय मिल जाता तो बेहतर होता। फिलहाल प्रशासन के आदेश के बाद सभी चिंतित हैं।
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कॉलोनी के कई आवासों की हालत जर्जर हो चुकी है। यह कभी भी ढह सकते हैं। ऐसे में यह आवश्यक था कि प्रशासन इसमें तत्काल कदम उठाए। वहां रहने वाले परिवारों की सुरक्षा को देखते हुए निर्णय लिया है। कॉलोनी को तकनीकी समिति के द्वारा निष्प्रयोज्य कराते हुए निस्तारण कराया जाएगा।
- पुलकित खरे, डीएम
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सरकारी विभागों में कार्यरत चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के आवास एलआईसी के पास बने हुए हैं। ये आवास कई दशक पुराने हो चुके हैं। इनमें 48 आवास जर्जर हालत में हैं, जिन्हें खाली करने के लिए नोटिस दिए गए थे। मगर बाद में मामला ठंडे बस्ते में चला गया। अब इन कंडम मकानों को खाली कराने की प्रक्रिया शुरू की गई है। एक से लेकर 48 नंबर तक के आवासों को कंडम घोषित किया गया है। इनमें रहने वाले परिवारों को आवास खाली करने के लिए कह दिया गया है।
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उधर, चपरासी कॉलोनी में रहने वालों का कहना है कि आवास पुराने हैं, लेकिन उनकी मरम्मत लगातार कराई जा रही थी। इससे कई आवास अभी ठीक हैं। मगर अधिकारी सभी को कंडम बताकर खाली कराने पर तुले हैं। कोरोना संक्रमण काल में किराए का मकान मिलना मुश्किल है। बच्चों की परीक्षाएं सिर पर हैं। ऐसे में अगर कुछ समय मिल जाता तो बेहतर होता। फिलहाल प्रशासन के आदेश के बाद सभी चिंतित हैं।
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कॉलोनी के कई आवासों की हालत जर्जर हो चुकी है। यह कभी भी ढह सकते हैं। ऐसे में यह आवश्यक था कि प्रशासन इसमें तत्काल कदम उठाए। वहां रहने वाले परिवारों की सुरक्षा को देखते हुए निर्णय लिया है। कॉलोनी को तकनीकी समिति के द्वारा निष्प्रयोज्य कराते हुए निस्तारण कराया जाएगा।
- पुलकित खरे, डीएम