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एक और इको टूरिज्म स्पॉट विकसित करेगा पीटीआर
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पीलीभीत। पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए पीलीभीत टाइगर रिजर्व (पीटीआर) एक और इको टूरिज्म स्पॉट विकसित करेगा। यह टूरिज्म स्पॉट टाइगर रिजर्व क्षेत्र के बाहर स्थापित किया जाएगा और वहां पर्यटकों के लिए रात्रि विश्राम की भी सुविधा उपलब्ध होगी। इसके लिए टाइगर रिजर्व प्रशासन ने जिला प्रशासन के सहयोग से जमीन तलाशने की कवायद शुरू की है।
‘चूका बीच’ इको टूरिज्म स्पॉट टाइगर रिजर्व के कोर एरिया में है। जब इसे विकसित किया गया था, तब यहां का जंगल टाइगर रिजर्व क्षेत्र घोषित नहीं हुआ था। मात्र आरक्षित वन के रूप में ही यहां की पहचान थी। चूका बीच को विकसित करने के लिए जाइका योजना से एक अरण्य कुटी, थारु हट, बेंबो हट, वॉटर हट समेत अन्य हटें भी बनाई गई। वर्ष 2014 में जिले के जंगल को टाइगर रिजर्व घोषित किया गया। इसके बाद यहां कई मंत्री और शासन के बड़े आला अफसर आए। उनके साथ गाड़ियों के काफिले भी आते रहे। इससे वन विभाग दबी जुबान से वाइल्ड लाइफ प्रभावित होने की बात कहता रहा है। इसी वजह से अब टाइगर रिजर्व क्षेत्र से बाहर एक और पिकनिक स्पॉट बनाने की योजना बनी है।
एनटीसीए लगा चुका है रात्रि विश्राम पर पाबंदी
कोर एरिया में बढ़ते दबाव को देखते हुए एनटीसीए (नेशनल टाइगर कंजर्वेेशन ऑफ अथॉरिटी) ने चूका बीच समेत सभी टाइगर रिजर्वों के कोर एरिया में पर्यटकों के रात्रि विश्राम पर प्रतिबंध लगाने के आदेश दिए हैं। हालांकि टाइगर रिजर्व प्रशासन के अनुसार नया पिकनिक स्पॉट बनने में चार-पांच साल का वक्त लग सकता है। तब तक चूका बीच में पर्यटक रात में भी ठहर सकेंगे।
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नया इको टूरिज्म स्पॉट बराही रेंज के आसपास बनाने की संभावना
एनटीसीए के आदेश के बाद यह साफ हो गया है कि एक न एक दिन टाइगर रिजर्व प्रशासन को कोर एरिया में स्थित चूका बीच से बोरिया बिस्तर हटाना ही होगा। इसी के मद्देनजर और पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से टाइगर रिजर्व प्रशासन ने अब जंगल क्षेत्र के बाहर एक और इको टूरिज्म स्पॉट विकसित करने की योजना बनाई है। इस नए टूरिज्म स्पॉट को लेकर टाइगर रिजर्व प्रशासन ने जिला प्रशासन के सहयोग से जमीन की तलाश भी शुरू कर दी है। हालांकि अभी बराही रेंज के आसपास को ही प्रमुखता दी जा रही है। इस इलाके में टूरिज्म स्पॉट बनने पर वहां तक पहुंचने के लिए माधोटांडा से ही रास्ता गुजरेगा। फिलहाल जिला प्रशासन के ऊपर निर्भर करता है कि वह यहां टाइगर रिजर्व प्रशासन को जमीन मुहैया करा सकेगा या नहीं। हालांकि टाइगर रिजर्व प्रशासन अन्य स्थानों पर भी जमीन की तलाश में है।
फॉरेस्ट थीम पर बनेगा नया टूरिज्म स्पॉट
सबसे समृद्ध और घने जंगलों की संपदा वाले टाइगर रिजर्व में यदि बाघ संरक्षित क्षेत्र को छोड़ दें तो उसके बाहरी परिसर में पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। टाइगर रिजर्व प्रशासन के मुताबिक नया टूरिज्म स्पॉट चूका बीच से भी बेहतर होगा। यहां पर्यटकों के रात्रि विश्राम के लिए हट तो बनाई ही जाएंगी। सूत्रों के मुताबिक यहां सेल्फी प्वाइंट, कैफेटेरिया, नेचर ट्रेल आदि की भी संभावना है। जंगल क्षेत्र से बाहर बनने वाला यह नया इको टूरिज्म स्पॉट पूरी तरह से फारेस्ट थीम पर ही विकसित किया जाएगा, ताकि पर्यटकों को जंगल से बाहर होने के बावजूद जंगल जैसा ही अनुभव हो।
टाइगर रिजर्व क्षेत्र से सटे बाहरी क्षेत्र में एक नया इको टूरिज्म स्पॉट विकसित करने की योजना है। जिला प्रशासन के सहयोग से जमीन की तलाश की जा रही है। -नवीन खंडेलवाल, डिप्टी डायरेक्टर, टाइगर रिजर्व
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‘चूका बीच’ इको टूरिज्म स्पॉट टाइगर रिजर्व के कोर एरिया में है। जब इसे विकसित किया गया था, तब यहां का जंगल टाइगर रिजर्व क्षेत्र घोषित नहीं हुआ था। मात्र आरक्षित वन के रूप में ही यहां की पहचान थी। चूका बीच को विकसित करने के लिए जाइका योजना से एक अरण्य कुटी, थारु हट, बेंबो हट, वॉटर हट समेत अन्य हटें भी बनाई गई। वर्ष 2014 में जिले के जंगल को टाइगर रिजर्व घोषित किया गया। इसके बाद यहां कई मंत्री और शासन के बड़े आला अफसर आए। उनके साथ गाड़ियों के काफिले भी आते रहे। इससे वन विभाग दबी जुबान से वाइल्ड लाइफ प्रभावित होने की बात कहता रहा है। इसी वजह से अब टाइगर रिजर्व क्षेत्र से बाहर एक और पिकनिक स्पॉट बनाने की योजना बनी है।
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एनटीसीए लगा चुका है रात्रि विश्राम पर पाबंदी
कोर एरिया में बढ़ते दबाव को देखते हुए एनटीसीए (नेशनल टाइगर कंजर्वेेशन ऑफ अथॉरिटी) ने चूका बीच समेत सभी टाइगर रिजर्वों के कोर एरिया में पर्यटकों के रात्रि विश्राम पर प्रतिबंध लगाने के आदेश दिए हैं। हालांकि टाइगर रिजर्व प्रशासन के अनुसार नया पिकनिक स्पॉट बनने में चार-पांच साल का वक्त लग सकता है। तब तक चूका बीच में पर्यटक रात में भी ठहर सकेंगे।
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नया इको टूरिज्म स्पॉट बराही रेंज के आसपास बनाने की संभावना
एनटीसीए के आदेश के बाद यह साफ हो गया है कि एक न एक दिन टाइगर रिजर्व प्रशासन को कोर एरिया में स्थित चूका बीच से बोरिया बिस्तर हटाना ही होगा। इसी के मद्देनजर और पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से टाइगर रिजर्व प्रशासन ने अब जंगल क्षेत्र के बाहर एक और इको टूरिज्म स्पॉट विकसित करने की योजना बनाई है। इस नए टूरिज्म स्पॉट को लेकर टाइगर रिजर्व प्रशासन ने जिला प्रशासन के सहयोग से जमीन की तलाश भी शुरू कर दी है। हालांकि अभी बराही रेंज के आसपास को ही प्रमुखता दी जा रही है। इस इलाके में टूरिज्म स्पॉट बनने पर वहां तक पहुंचने के लिए माधोटांडा से ही रास्ता गुजरेगा। फिलहाल जिला प्रशासन के ऊपर निर्भर करता है कि वह यहां टाइगर रिजर्व प्रशासन को जमीन मुहैया करा सकेगा या नहीं। हालांकि टाइगर रिजर्व प्रशासन अन्य स्थानों पर भी जमीन की तलाश में है।
फॉरेस्ट थीम पर बनेगा नया टूरिज्म स्पॉट
सबसे समृद्ध और घने जंगलों की संपदा वाले टाइगर रिजर्व में यदि बाघ संरक्षित क्षेत्र को छोड़ दें तो उसके बाहरी परिसर में पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। टाइगर रिजर्व प्रशासन के मुताबिक नया टूरिज्म स्पॉट चूका बीच से भी बेहतर होगा। यहां पर्यटकों के रात्रि विश्राम के लिए हट तो बनाई ही जाएंगी। सूत्रों के मुताबिक यहां सेल्फी प्वाइंट, कैफेटेरिया, नेचर ट्रेल आदि की भी संभावना है। जंगल क्षेत्र से बाहर बनने वाला यह नया इको टूरिज्म स्पॉट पूरी तरह से फारेस्ट थीम पर ही विकसित किया जाएगा, ताकि पर्यटकों को जंगल से बाहर होने के बावजूद जंगल जैसा ही अनुभव हो।
टाइगर रिजर्व क्षेत्र से सटे बाहरी क्षेत्र में एक नया इको टूरिज्म स्पॉट विकसित करने की योजना है। जिला प्रशासन के सहयोग से जमीन की तलाश की जा रही है। -नवीन खंडेलवाल, डिप्टी डायरेक्टर, टाइगर रिजर्व