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सिटी मजिस्ट्रेट की जांच से ब्लड बैंक कर्मियों की मुश्किलें बढ़ीं
पीलीभीत, अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 05 Jul 2016 11:48 PM IST
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सत्रह वर्षीय किशोर गुड्डू की मौत के बाद आरोपों में घिरे ब्लड बैंक कर्मचारियों की मुश्किलें बढ़ती दिख रही हैं। शिकायत पर कराई गई जांच में ब्लड बैंक पर लगाए गए आरोप काफी हद तक सही पाए गए है। जांच अधिकारी से रिपोर्ट मिलने के बाद सिटी मजिस्ट्रेट ने कार्रवाई की संस्तुति करते हुए रिपेार्ट डीएम को भेज दी है।
बता दें कि दियोरियाकलां कोतवाली क्षेत्र के दियोहना पट्टी गांव के किसान छेदालाल का 17 वर्षीय बेटा गुड्डू पीलिया से पीड़ित था। शनिवार रात हालत बिगड़ने पर गुड्डू को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। चेकअप के बाद डॉक्टरों ने खून की कमी बताई। आरोप है कि ब्लड बैंक से रक्त लेने के लिए गुड्डू के पिता छह डोनर को लेकर ब्लड बैंक में खड़े रहे, लेकिन स्टाफ ने न तो खून लिया और न ही गुड्डू को चढ़ाने के लिए खून दिया। जब उन्होंने विरोध किया तो उन्हें खून बेचने के आरोप में जेल भिजवाने की धमकी दी गई। खून न चढ़ पाने से किशोर की मौत हो गई थी। शिकायत मिलने पर सिटी मजिस्ट्रेट जितेंद्र शर्मा ने मामले की जांच एक्स्ट्रा मजिस्ट्रेट अरुणमणि त्रिपाठी से कराई। मंगलवार को जांच रिपोर्ट सिटी मजिस्ट्रेट को सौंपी गई। इसमें बताया जा रहा है कि ब्लड बैंक स्टाफ पर लगाए गए आरोप काफी हद तक सही हैं। इसके बाद सिटी मजिस्ट्रेट ने कार्रवाई की संस्तुति कर रिपोर्ट डीएं को भेज दी है।
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सीएमएस भी जांच में घिरे
किशोर की मौत के बाद ब्लड बैंक कर्मचारियों की लापरवाही का पता लगाने के लिए शुरू की गई जांच में जिला अस्पताल के सीएमएस भी घिरते दिखाई दे रहे हैं। उनकी मौजूदगी को लेकर भी सवाल उठे हैं। इसको भी डीएम को भेजी गई जांच रिपोर्ट में शामिल किया गया है।
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जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर कार्रवाई की संस्तुति कर रिपोर्ट डीएम को भेजी गई है। इसमें लापरवाही के आरोप सही पाए गए है।
- जितेंद्र शर्मा, सिटी मजिस्ट्रेट
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बता दें कि दियोरियाकलां कोतवाली क्षेत्र के दियोहना पट्टी गांव के किसान छेदालाल का 17 वर्षीय बेटा गुड्डू पीलिया से पीड़ित था। शनिवार रात हालत बिगड़ने पर गुड्डू को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। चेकअप के बाद डॉक्टरों ने खून की कमी बताई। आरोप है कि ब्लड बैंक से रक्त लेने के लिए गुड्डू के पिता छह डोनर को लेकर ब्लड बैंक में खड़े रहे, लेकिन स्टाफ ने न तो खून लिया और न ही गुड्डू को चढ़ाने के लिए खून दिया। जब उन्होंने विरोध किया तो उन्हें खून बेचने के आरोप में जेल भिजवाने की धमकी दी गई। खून न चढ़ पाने से किशोर की मौत हो गई थी। शिकायत मिलने पर सिटी मजिस्ट्रेट जितेंद्र शर्मा ने मामले की जांच एक्स्ट्रा मजिस्ट्रेट अरुणमणि त्रिपाठी से कराई। मंगलवार को जांच रिपोर्ट सिटी मजिस्ट्रेट को सौंपी गई। इसमें बताया जा रहा है कि ब्लड बैंक स्टाफ पर लगाए गए आरोप काफी हद तक सही हैं। इसके बाद सिटी मजिस्ट्रेट ने कार्रवाई की संस्तुति कर रिपोर्ट डीएं को भेज दी है।
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सीएमएस भी जांच में घिरे
किशोर की मौत के बाद ब्लड बैंक कर्मचारियों की लापरवाही का पता लगाने के लिए शुरू की गई जांच में जिला अस्पताल के सीएमएस भी घिरते दिखाई दे रहे हैं। उनकी मौजूदगी को लेकर भी सवाल उठे हैं। इसको भी डीएम को भेजी गई जांच रिपोर्ट में शामिल किया गया है।
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जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर कार्रवाई की संस्तुति कर रिपोर्ट डीएम को भेजी गई है। इसमें लापरवाही के आरोप सही पाए गए है।
- जितेंद्र शर्मा, सिटी मजिस्ट्रेट