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पहले माफिया बताकर बंद किए सट्टे, अब बता रहे किसान
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बीसलपुर। परासी रामकिशन गन्ना क्रय केंद्र पर अफसरों को देखकर वाहन छोड़कर भागने वाले कथित माफिया पर कार्रवाई के बजाय अधिकारी बैकफुट पर आ गए हैं। अब तक जिन्हें माफिया बताकर सख्ती की बात कही जाती रही, अब उन्हें ही जांच का हवाला देकर किसान करार दे दिया गया है। अब बंद किए गए सभी नौ सट्टे खोलने की भी अनुमति मांगी गई है। अधिकारियों की यह कार्रवाई किसी के गले नहीं उतर रही है।
भाजपा विधायक रामसरन वर्मा, डीसीओ जितेंद्र मिश्रा, गन्ना समिति सचिव आरपी कुशवाहा और एससीडीआई मनोज साहू ने 20 दिसंबर को गांव परासी रामकिशन के गन्ना केंद्रों पर छापा मारा था। अधिकारियों को देखते ही गन्ना लदे वाहनों के पास खड़े पांच लोग भाग गए थे। अधिकारियों ने भागने वालों को गन्ना माफिया मानते हुए उनके गन्ना लदे वाहन जब्त कर समिति सचिव की सुपुर्दगी में दे दिए थे। डीसीओ कें निर्देश पर परासी रामकिशन के नौ लोगों केे गन्ना सट्टा उसी दिन बंद कर दिए गए थे। इसके बाद सचिव की सुपुर्दगी में दिए गए गन्ना वाहन भी सभी खींच ले गए थे। समिति सचिव ने डीसीओ को पूरे मामले की रिपोर्ट भेजकर कार्रवाई को अनुमति मांगी थी। इसके बाद सभी की जांच कराई गई। अब सभी को किसान बताकर अधिकारियों ने कार्रवाई से हाथ खींच लिए हैं।
समिति सचिव ने बताया कि शनिवार को समिति कार्यालय पहुंचकर सभी ने खुद के किसान होने का लिखित प्रमाण दिया था। अभिलेखों से भी मिलान करा लिया है। अब अनुमति लेकर बंद किए सट्टे खोले जाएंगे। हालांकि अधिकारियों को देेखकर वाहन छोड़कर भागने की वजह वह अभी भी नहीं बता पाए। फिलहाल पहले माफिया बताकर सख्ती दर्शा पीठ थपथपाई गई। अब किसान बताकर क्लीन चिट देना चर्चा का विषय बना है।
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भाजपा विधायक रामसरन वर्मा, डीसीओ जितेंद्र मिश्रा, गन्ना समिति सचिव आरपी कुशवाहा और एससीडीआई मनोज साहू ने 20 दिसंबर को गांव परासी रामकिशन के गन्ना केंद्रों पर छापा मारा था। अधिकारियों को देखते ही गन्ना लदे वाहनों के पास खड़े पांच लोग भाग गए थे। अधिकारियों ने भागने वालों को गन्ना माफिया मानते हुए उनके गन्ना लदे वाहन जब्त कर समिति सचिव की सुपुर्दगी में दे दिए थे। डीसीओ कें निर्देश पर परासी रामकिशन के नौ लोगों केे गन्ना सट्टा उसी दिन बंद कर दिए गए थे। इसके बाद सचिव की सुपुर्दगी में दिए गए गन्ना वाहन भी सभी खींच ले गए थे। समिति सचिव ने डीसीओ को पूरे मामले की रिपोर्ट भेजकर कार्रवाई को अनुमति मांगी थी। इसके बाद सभी की जांच कराई गई। अब सभी को किसान बताकर अधिकारियों ने कार्रवाई से हाथ खींच लिए हैं।
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समिति सचिव ने बताया कि शनिवार को समिति कार्यालय पहुंचकर सभी ने खुद के किसान होने का लिखित प्रमाण दिया था। अभिलेखों से भी मिलान करा लिया है। अब अनुमति लेकर बंद किए सट्टे खोले जाएंगे। हालांकि अधिकारियों को देेखकर वाहन छोड़कर भागने की वजह वह अभी भी नहीं बता पाए। फिलहाल पहले माफिया बताकर सख्ती दर्शा पीठ थपथपाई गई। अब किसान बताकर क्लीन चिट देना चर्चा का विषय बना है।
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