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बसपाइयों ने धरना दे केंद्र, प्रदेश सरकार को कोसा
पीलीभीत।
Updated Mon, 27 Apr 2015 11:57 PM IST
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प्रांतीय आह्वान पर बसपा कार्यकर्ताओं ने भूमि अधिग्रहण कानून में किसानों
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के हितों की अनदेखी करने व पीड़ित किसानों के मामले में केंद्र व प्रदेश
सरकार द्वारा की जा रही उपेक्षा के विरोध में जिला मुख्यालय पर धरना
प्रदर्शन किया। इस दौरान हुई सभा में वक्ताओं ने केंद्र व प्रदेश सरकार को
किसान विरोधी बताते हुए लोगों से बसपा के साथ जुड़ने का आह्वान किया।
शहर के नेहरू ऊर्जा उद्यान में हुए धरना प्रदर्शन के दौरान आयोजित सभा को संबोधित करते हुए जोन कोआर्डीनेटर काशीराम सरोज ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा भूमि अधिग्रहण कानून के पीछे धन्नासेठों का हाथ है। यह कानून उद्योगपतियों के हितों के लिए बनाया जा रहा है। किसानों की जमीनों को औने पौने दामों में हथियाकर उद्योगपतियों को लाभ पहुंचाने की योजना बनाई जा रही है। जिसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
रामसनेही गौतम ने कहा कि केंद्र व प्रदेश की सरकार मुआवजा देने के बावत सक्रिय नहीं है। केदारनाथ गौतम ने कहा कि प्रदेश की सपा सरकार हर मोर्चे पर विफल है। प्रदेश में कानून व्यवस्था नाम की कोई चीज नहीं रह गई है। पूर्व मंत्री अनीस अहमद खां उर्फ फूलबाबू ने कहा कि केंद्र व प्रदेश में बैठी सरकारें किसानों का शोषण करा रहीं हैं।
मुआवजे के नाम पर खानापूरी कर सौ से तीन सौ रुपये का चेक देकर उनका मजाक उड़ाया जा रहा है। कहा कि बसपा सरकार द्वारा गन्ने की बढाई गई कीमत को सपा सरकार ने 40 रुपये कम करके अपनी नाकामी का परिचय दिया है।
पूर्व विधायक अरशद खां ने कहा कि किसानों, मजलूमों, पिछड़ों, अल्पसंख्यक आदि की लड़ाई बसपा ही लड़ती आई है और आने वाले समय में भी इन सभी के लिए संघर्ष करने को तत्पर है।
धरना प्रदर्शन को बालकराम सागर, प्रेम गौतम, डॉ. शमशुल हसन, डॉ. राधेश्याम मौर्य, कल्यान सिंह, अरविंद तिवारी, वेदप्रकाश गौतम, दिनेश भारती आदि ने संबोधित किया। इस मौके पर श्रीराम कोरी, हाफिज नूरअहमद, परविंदर सिंह, गुरदेव सिंह, ओमप्रकाश कठेरिया, रामबहादुर भारती, प्रदीप गौतम, शराफत, रुद्रपाल, रामपाल, हरचरनलाल, केके भाष्कर, सोहनलाल, ईश्वरदयाल पासवान, सुरेंद्र मोहन आदि मौजूद रहे।
किसानों के बहाने बसपा ने कराया ‘ताकत’ का अहसास
पीलीभीत। बहुजन समाज पार्टी ने किसान समस्या को लेकर प्रांतीय आह्वान पर किए गए धरना प्रदर्शन के माध्यम से लगे हाथ अपनी ताकत का भी प्रदर्शन कर दिया। यही नहीं पार्टी नेताओं के निशाने पर मुख्यरूप से प्रदेश सरकार ही रही। पार्टी के हर नेता ने किसानों पर कम, प्रदेश की कथित लचर कानून व्यवस्था पर अधिक देर तक भाषण दिया।
बसपा की यह रैली मुख्य रूप से किसानों की समस्या के विरोध में आयोजित की गई थी। प्रांतीय आह्वान पर जिला मुख्यालय पर कार्यकर्ताओं द्वारा किसान समस्या को लेकर धरना प्रदर्शन किया जाना था। काफी लंबे समय के बाद बसपा को किसी प्रदर्शन की इजाज़त हाई कमान से मिली थी, लिहाजा पार्टी के नेता इसके माध्यम से पिछले कई दिनों से भीड़ जुटाने को गांव-गांव संपर्क कर रहे थे।
ताकि कार्यक्रम के दिन वह इसी बहाने अपनी ‘ताकत’ का अहसास भी दूसरे दलों का करा सकें। इसमे वह एक हद तक सफल भी हुए। ट्रैक्टर-ट्राली से लेकर विभिन्न चौपहिया वाहनों से दोपहर तक हजारों कार्यकर्ता धरना स्थल पर जमा हो गए।
हालांकि भीड़ जिले के चारों विधान सभा क्षेत्रों से जुटी थी, लेकिन इसमे सबसे अधिक भीड़ बीसलपुर व सदर विधान सभा क्षेत्र की दिखी। सभा में जुटी भारी भीड़ के कारण टनकपुर रोड की यातायात व्यवस्था भी कई बार प्रभावित हुई।
शहर के नेहरू ऊर्जा उद्यान में हुए धरना प्रदर्शन के दौरान आयोजित सभा को संबोधित करते हुए जोन कोआर्डीनेटर काशीराम सरोज ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा भूमि अधिग्रहण कानून के पीछे धन्नासेठों का हाथ है। यह कानून उद्योगपतियों के हितों के लिए बनाया जा रहा है। किसानों की जमीनों को औने पौने दामों में हथियाकर उद्योगपतियों को लाभ पहुंचाने की योजना बनाई जा रही है। जिसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
रामसनेही गौतम ने कहा कि केंद्र व प्रदेश की सरकार मुआवजा देने के बावत सक्रिय नहीं है। केदारनाथ गौतम ने कहा कि प्रदेश की सपा सरकार हर मोर्चे पर विफल है। प्रदेश में कानून व्यवस्था नाम की कोई चीज नहीं रह गई है। पूर्व मंत्री अनीस अहमद खां उर्फ फूलबाबू ने कहा कि केंद्र व प्रदेश में बैठी सरकारें किसानों का शोषण करा रहीं हैं।
मुआवजे के नाम पर खानापूरी कर सौ से तीन सौ रुपये का चेक देकर उनका मजाक उड़ाया जा रहा है। कहा कि बसपा सरकार द्वारा गन्ने की बढाई गई कीमत को सपा सरकार ने 40 रुपये कम करके अपनी नाकामी का परिचय दिया है।
पूर्व विधायक अरशद खां ने कहा कि किसानों, मजलूमों, पिछड़ों, अल्पसंख्यक आदि की लड़ाई बसपा ही लड़ती आई है और आने वाले समय में भी इन सभी के लिए संघर्ष करने को तत्पर है।
धरना प्रदर्शन को बालकराम सागर, प्रेम गौतम, डॉ. शमशुल हसन, डॉ. राधेश्याम मौर्य, कल्यान सिंह, अरविंद तिवारी, वेदप्रकाश गौतम, दिनेश भारती आदि ने संबोधित किया। इस मौके पर श्रीराम कोरी, हाफिज नूरअहमद, परविंदर सिंह, गुरदेव सिंह, ओमप्रकाश कठेरिया, रामबहादुर भारती, प्रदीप गौतम, शराफत, रुद्रपाल, रामपाल, हरचरनलाल, केके भाष्कर, सोहनलाल, ईश्वरदयाल पासवान, सुरेंद्र मोहन आदि मौजूद रहे।
किसानों के बहाने बसपा ने कराया ‘ताकत’ का अहसास
पीलीभीत। बहुजन समाज पार्टी ने किसान समस्या को लेकर प्रांतीय आह्वान पर किए गए धरना प्रदर्शन के माध्यम से लगे हाथ अपनी ताकत का भी प्रदर्शन कर दिया। यही नहीं पार्टी नेताओं के निशाने पर मुख्यरूप से प्रदेश सरकार ही रही। पार्टी के हर नेता ने किसानों पर कम, प्रदेश की कथित लचर कानून व्यवस्था पर अधिक देर तक भाषण दिया।
बसपा की यह रैली मुख्य रूप से किसानों की समस्या के विरोध में आयोजित की गई थी। प्रांतीय आह्वान पर जिला मुख्यालय पर कार्यकर्ताओं द्वारा किसान समस्या को लेकर धरना प्रदर्शन किया जाना था। काफी लंबे समय के बाद बसपा को किसी प्रदर्शन की इजाज़त हाई कमान से मिली थी, लिहाजा पार्टी के नेता इसके माध्यम से पिछले कई दिनों से भीड़ जुटाने को गांव-गांव संपर्क कर रहे थे।
ताकि कार्यक्रम के दिन वह इसी बहाने अपनी ‘ताकत’ का अहसास भी दूसरे दलों का करा सकें। इसमे वह एक हद तक सफल भी हुए। ट्रैक्टर-ट्राली से लेकर विभिन्न चौपहिया वाहनों से दोपहर तक हजारों कार्यकर्ता धरना स्थल पर जमा हो गए।
हालांकि भीड़ जिले के चारों विधान सभा क्षेत्रों से जुटी थी, लेकिन इसमे सबसे अधिक भीड़ बीसलपुर व सदर विधान सभा क्षेत्र की दिखी। सभा में जुटी भारी भीड़ के कारण टनकपुर रोड की यातायात व्यवस्था भी कई बार प्रभावित हुई।