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सपा को भारी पड़ा बागी पर दांव लगाना, भाजपा की डॉ. दलजीत कौर निर्विरोध जिला पंचायत अध्यक्ष
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पीलीभीत। चंद रोज पहले भाजपा से सपा में आए स्वामी प्रवक्तानंद ने मंगलवार सुबह भाजपा में वापसी कर ली। इसके बाद उन्होंने जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए सपा की ओर से अपना दावा वापस ले लिया। उनके नाम वापसी के बाद भाजपा प्रत्याशी डॉ. दलजीत कौर निर्विरोध जिला पंचायत अध्यक्ष घोषित हो गईं। जिला निर्वाचन अधिकारी ने उन्हें जीत का प्रमाण पत्र दे दिया।
सपा को बागी पर दांव लगाना भारी पड़ गया। पिछले कई दिनों से जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए भाजपा और सपा के बीच चल रहे घमासान का अंत हो गया। भाजपा से बगावत कर वार्ड नंबर-15 से जीते जिला पंचायत सदस्य जयद्रथ उर्फ स्वामी प्रवक्तानंद ने सपा का दामन थाम लिया था। सपा के प्रत्याशी के तौर पर नामांकन कराया। भाजपा से डॉ. दलजीत कौर ने नामांकन किया। इसके बाद कांटे की टक्कर मानी जा रही थी। मगर मंगलवार सुबह अचानक सियासत ने करवट ली। तड़के ही भाजपा के कई नेताओं संग स्वामी प्रवक्तानंद को देखा जाने लगा। सपा नेताओं का उनसे संपर्क टूट सा गया। इसी बीच पूर्वाह्न करीब 11 बजे भाजपा नेताओं संग स्वामी प्रवक्तानंद कलक्ट्रेट पहुंचे और अपना नामांकन वापस ले लिया।
ये है दलगत स्थिति
भाजपा -6
सपा - 6
बसपा - 6
निर्दलीय - 16
भाजपाई बोले- यह सियासी सर्जिकल स्ट्राइक...
एक होटल में हुई प्रेसवार्ता में इस पूरे घटनाक्रम को बताया भाजपा की सोची समझी रणनीति
पीलीभीत। जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए चली बगावत की इस सियासत को भाजपा नेताओं ने सर्जिकल स्ट्राइक का नाम दिया। इसे प्रवक्तानंद ने भी स्वीकारा। नामांकन वापस लेने के बाद एक बार फिर भाजपाई बने स्वामी प्रवक्तानंद का फूल मालाओं से स्वागत किया गया।
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शहर के नौगवां चौराहा के पास एक होटल में दोपहर एक बजे हुई प्रेसवार्ता में स्वामी प्रवक्तानंद भाजपा के तमाम दिग्गजों संग मंचासीन थे। सबसे पहले भाजपा जिलाध्यक्ष संजीव प्रताप सिंह ने प्रत्याशी डॉ. दलजीत कौर के निर्विरोध चुनने पर बधाई दी। इसमें स्वामी प्रवक्तानंद का मुख्य योगदान करार दिया। स्वामी प्रवक्तानंद ने कहा कि वह पहले भी भाजपा के सच्चे सिपाही थे, आज भी हैं। सपा में उनकी एंट्री और अब वापसी सर्जिकल स्ट्राइक थी। जिस तरह से पाकिस्तान में घुसकर अभिनंदन ने सर्जिकल स्ट्राइक की थी। उसी तरह से संगठन की ओर से सौंपे गए काम को वह करके वापस आ गए हैं। कहा कि राजनीति में साम, दाम, दंड, भेद सभी जायज है। जहां जिस शस्त्र की जरूरत विपक्षी को हराने के लिए पड़ी, उसे इस्तेमाल किया गया। इस मौके पर बीसलपुर विधायक रामसरन वर्मा, शहर विधायक संजय सिंह गंगवार, उत्तर प्रदेश को-ऑपरेटिव यूनियन के सभापति सुरेश गंगवार, प्रत्याशी डॉ. दलजीत कौर, उनके पति निवर्तमान जिला महामंत्री गुरुभाग सिंह, लेखराज भारती, धीरेंद्र मिश्र आदि मौजूद थे।
दिल्ली दरबार ने तरेरी निगाहें तो स्वामी को मनाने भागे नेता
पीलीभीत। बगावत और वापसी की इस राजनीति को भले ही भाजपा की ओर से सर्जिकल स्ट्राइक का नाम देते हुए तय रणनीति का हिस्सा बताया जा रहा हो, मगर इस पूरे राजनीतिक घटनाक्रम में पर्दे के पीछे की कहानी कुछ और ही है। सियासी गलियारों में भी सपा प्रत्याशी केे नाम वापसी करने के बाद भाजपा में जाने पर इसकी चर्चाएं तेज हैं। पहले नाराजगी पर भाजपा से हुई बगावत और अब नाम वापसी के पीछे दो मुख्य वजह मानी जा रही हैं। उसमें एक हार का आभास और दूसरी बड़े नेताओं की नाराजगी को माना जा रहा है। कुछ भाजपा नेताओं ने दबी जुबां से इसे स्वीकार भी किया।
दरअसल, स्वामी प्रवक्तानंद ने जिला पंचायत के वार्ड नंबर-15 से भाजपा समर्थित उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा था। उनकी शुरूआत से ही तैयारी जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए चल रही थी। जीतने के बाद दावेदारों की दौड़ में उनका नाम शामिल भी रहा, मगर टिकट नहीं मिला। भाजपा ने डॉ. दलजीत कौर को अपना प्रत्याशी बनाने का इशारा उन्हें दे दिया था। इस पर नाराज होकर वह बगावत कर गए और सपा से प्रत्याशी घोषित होने पर चुनावी तैयारी में जुट गए थे।
सपा के पास इससे पूर्व कोई मजबूत चेहरा नहीं था। सपा नेताओं को विश्वास था कि भाजपा प्रत्याशी की जाति को लेकर आपत्ति की जाएगी तो उनका निर्वाचन निरस्त हो जाएगा और स्वामी प्रवक्तानंद सपा के जिपं अध्यक्ष बन जाएंगे। मगर जब आपत्ति ही निरस्त हो गई तो उसी समय सपा खेमे में चिंतन बढ़ गया था। कुछ सदस्य भी इसे भांप गए थे और सत्ता की तरफ रुख करने लग गए थे। चर्चा है कि इसकी जानकारी होने पर सपा में जीत मुश्किल प्रतीत हो रही थी। उधर, स्वामी प्रवक्तानंद की पहचान भाजपा के एक बड़े नेता के खेमे से है। उन्हीं की सूची पर टिकट भाजपा से मिला था। ऐसे में जब वह सपा में गए तो बड़े नेता भी नाराज हो गए थे। इन सबके बीच वापसी पर सोच विचार शुरू हो चुका था। दिल्ली दरबार से बड़े नेता ने निगाहें तरेरीं और फिर जनपद स्तर पर भी संगठन के तमाम दिग्गज मनाने में लगे हुए थे। इस पर आंकलन करने के बाद वापसी करने को ही सही समझा गया।
नाम वापसी के लिए स्वामी प्रवक्तानंद को मनाने के लिए भाजपाई खेमा सोमवार रात से ही एक्टिव हो गया था। बीसलपुर विधायक रामसरन वर्मा, शहर विधायक संजय सिंह गंगवार, जिलाध्यक्ष संजीव प्रताप सिंह आदि स्वामी प्रवक्तानंद से बात करने पहुंचे। रात भर कवायद चलती रही। फिर मंगलवार सुबह बीसलपुर विधायक की डेयरी पर घंटों वार्ता हुई और बाद में सीधे कलक्ट्रेट पहुंचकर नाम वापसी की गई। भाजपा नेता भले इससे इनकार कर रहे हों, मगर आम चर्चा यही हो रही है।
कांग्रेस ने सपा को घेरा, कहा- सब पहले से तय, भाजपा को दिया गया वॉकओवर
पीलीभीत। जिला पंचायत अध्यक्ष पद की दौड़ में भले ही कांग्रेस नहीं थी। उसका सिर्फ एक सदस्य जीतकर आया था, वह भी पिछड़ी जाति से नहीं था। मगर इस पूरे राजनीतिक खेल पर कांग्रेस की भी लगातार नजर बनी हुई थी। मगर मंगलवार को हुए घटनाक्रम के बाद कांग्रेस ने सपा को घेरना शुरू कर दिया है।
जिलाध्यक्ष कांग्रेस हरप्रीत सिंह चब्बा ने कहा कि जिस तरह से पहले बागी को लेकर आना और फिर उसे प्रत्याशी बनाकर उतारना। फिर अब उसी बागी का नाम वापसी कर वापस चला जाना। सीधे तौर पर यही है कि सपा ने भाजपा को वॉकओवर दे दिया। एक वरिष्ठ रालोद नेता पर भी बोले। कहा कि पिछले दिनों किसान आंदोलन को लेकर शारदा पार इलाके में रालोद नेता ने बड़ी सभा भाजपा के खिलाफ कराई। मगर जिला पंचायत अध्यक्ष पद के चुनाव में उनकी पत्नी जोकि जिला पंचायत सदस्य बनी हैं। वह भाजपा प्रत्याशी डॉ. दलजीत कौर की प्रस्तावक बन गई। यह सब खेल भाजपा को जिताने के लिए पहले से फिक्स था। कांग्रेस के पास अगर एक भी पिछड़ी जाति का सदस्य होता तो दमदारी के साथ लड़ाई लड़ती।
भाजपा में जश्न का माहौल, सपा कार्यालय में पसरा सन्नाटा
स्वामी प्रवक्तानंद के यू-टर्न पर पछताए, मगर खुलकर बोल भी न पाए
पीलीभीत। सपा के प्रत्याशी की नाम वापसी के बाद भाजपा की डॉ.दलजीत कौर का निर्विरोध चुना जाना तय हो चुका है। कई दिनों से चली आ रही खींचतान अचानक नया मोड़ ले गई है। इसके बाद भाजपाई तो जश्न में डूब गए हैं। मगर सपा नेताओं को पछतावा हो रहा है। कार्यालय पर भी पूरे दिन सन्नाटा पसरा रहा। हालांकि शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस बल तैनात दिखा।
इस बात पर कोई दो राय नहीं कि स्वामी प्रवक्तानंद को प्रत्याशी बनाए जाने पर सपा नेता खुद को मजबूत मानने लगे थे और भाजपा नेता भी चिंतित हो गए थे। दोनों ही राजनीतिक दलों में भाग-दौड़ की स्थिति बनी हुई थी। मंगलवार को अचानक नाम वापसी हुई तो भाजपा खेमे में जश्र का माहौल बन गया। एक होटल में आयोजित स्वागत समारोह में भी कार्यकर्ताओं ने जमकर नारेबाजी की और पकवान चखे। सेल्फी लेते हुए सोशल मीडिया पर भी जीत की खुशी जाहिर की जाती रही। उधर, कई दिनों से आत्मविश्वास से भरपूर चल रहा सपाई खेमा कहीं गुम रहा। सपा कार्यालय पर सुबह से सन्नाटा पसरा रहा। पूर्व मंत्री हेमराज वर्मा जरूर अपने गोदावरी स्टेट स्थित कार्यालय पर थे। मगर इस विषय पर कोई खास टिप्पणी नहंी की गई। स्वामी प्रवक्तानंद की वापसी पर इतना ही कहा कि अक्सर सपा में आने के बाद लोगों की अहमियत बढ़ ही जाती है।
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सपा को बागी पर दांव लगाना भारी पड़ गया। पिछले कई दिनों से जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए भाजपा और सपा के बीच चल रहे घमासान का अंत हो गया। भाजपा से बगावत कर वार्ड नंबर-15 से जीते जिला पंचायत सदस्य जयद्रथ उर्फ स्वामी प्रवक्तानंद ने सपा का दामन थाम लिया था। सपा के प्रत्याशी के तौर पर नामांकन कराया। भाजपा से डॉ. दलजीत कौर ने नामांकन किया। इसके बाद कांटे की टक्कर मानी जा रही थी। मगर मंगलवार सुबह अचानक सियासत ने करवट ली। तड़के ही भाजपा के कई नेताओं संग स्वामी प्रवक्तानंद को देखा जाने लगा। सपा नेताओं का उनसे संपर्क टूट सा गया। इसी बीच पूर्वाह्न करीब 11 बजे भाजपा नेताओं संग स्वामी प्रवक्तानंद कलक्ट्रेट पहुंचे और अपना नामांकन वापस ले लिया।
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भाजपा -6
सपा - 6
बसपा - 6
निर्दलीय - 16
भाजपाई बोले- यह सियासी सर्जिकल स्ट्राइक...
एक होटल में हुई प्रेसवार्ता में इस पूरे घटनाक्रम को बताया भाजपा की सोची समझी रणनीति
पीलीभीत। जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए चली बगावत की इस सियासत को भाजपा नेताओं ने सर्जिकल स्ट्राइक का नाम दिया। इसे प्रवक्तानंद ने भी स्वीकारा। नामांकन वापस लेने के बाद एक बार फिर भाजपाई बने स्वामी प्रवक्तानंद का फूल मालाओं से स्वागत किया गया।
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शहर के नौगवां चौराहा के पास एक होटल में दोपहर एक बजे हुई प्रेसवार्ता में स्वामी प्रवक्तानंद भाजपा के तमाम दिग्गजों संग मंचासीन थे। सबसे पहले भाजपा जिलाध्यक्ष संजीव प्रताप सिंह ने प्रत्याशी डॉ. दलजीत कौर के निर्विरोध चुनने पर बधाई दी। इसमें स्वामी प्रवक्तानंद का मुख्य योगदान करार दिया। स्वामी प्रवक्तानंद ने कहा कि वह पहले भी भाजपा के सच्चे सिपाही थे, आज भी हैं। सपा में उनकी एंट्री और अब वापसी सर्जिकल स्ट्राइक थी। जिस तरह से पाकिस्तान में घुसकर अभिनंदन ने सर्जिकल स्ट्राइक की थी। उसी तरह से संगठन की ओर से सौंपे गए काम को वह करके वापस आ गए हैं। कहा कि राजनीति में साम, दाम, दंड, भेद सभी जायज है। जहां जिस शस्त्र की जरूरत विपक्षी को हराने के लिए पड़ी, उसे इस्तेमाल किया गया। इस मौके पर बीसलपुर विधायक रामसरन वर्मा, शहर विधायक संजय सिंह गंगवार, उत्तर प्रदेश को-ऑपरेटिव यूनियन के सभापति सुरेश गंगवार, प्रत्याशी डॉ. दलजीत कौर, उनके पति निवर्तमान जिला महामंत्री गुरुभाग सिंह, लेखराज भारती, धीरेंद्र मिश्र आदि मौजूद थे।
दिल्ली दरबार ने तरेरी निगाहें तो स्वामी को मनाने भागे नेता
पीलीभीत। बगावत और वापसी की इस राजनीति को भले ही भाजपा की ओर से सर्जिकल स्ट्राइक का नाम देते हुए तय रणनीति का हिस्सा बताया जा रहा हो, मगर इस पूरे राजनीतिक घटनाक्रम में पर्दे के पीछे की कहानी कुछ और ही है। सियासी गलियारों में भी सपा प्रत्याशी केे नाम वापसी करने के बाद भाजपा में जाने पर इसकी चर्चाएं तेज हैं। पहले नाराजगी पर भाजपा से हुई बगावत और अब नाम वापसी के पीछे दो मुख्य वजह मानी जा रही हैं। उसमें एक हार का आभास और दूसरी बड़े नेताओं की नाराजगी को माना जा रहा है। कुछ भाजपा नेताओं ने दबी जुबां से इसे स्वीकार भी किया।
दरअसल, स्वामी प्रवक्तानंद ने जिला पंचायत के वार्ड नंबर-15 से भाजपा समर्थित उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा था। उनकी शुरूआत से ही तैयारी जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए चल रही थी। जीतने के बाद दावेदारों की दौड़ में उनका नाम शामिल भी रहा, मगर टिकट नहीं मिला। भाजपा ने डॉ. दलजीत कौर को अपना प्रत्याशी बनाने का इशारा उन्हें दे दिया था। इस पर नाराज होकर वह बगावत कर गए और सपा से प्रत्याशी घोषित होने पर चुनावी तैयारी में जुट गए थे।
सपा के पास इससे पूर्व कोई मजबूत चेहरा नहीं था। सपा नेताओं को विश्वास था कि भाजपा प्रत्याशी की जाति को लेकर आपत्ति की जाएगी तो उनका निर्वाचन निरस्त हो जाएगा और स्वामी प्रवक्तानंद सपा के जिपं अध्यक्ष बन जाएंगे। मगर जब आपत्ति ही निरस्त हो गई तो उसी समय सपा खेमे में चिंतन बढ़ गया था। कुछ सदस्य भी इसे भांप गए थे और सत्ता की तरफ रुख करने लग गए थे। चर्चा है कि इसकी जानकारी होने पर सपा में जीत मुश्किल प्रतीत हो रही थी। उधर, स्वामी प्रवक्तानंद की पहचान भाजपा के एक बड़े नेता के खेमे से है। उन्हीं की सूची पर टिकट भाजपा से मिला था। ऐसे में जब वह सपा में गए तो बड़े नेता भी नाराज हो गए थे। इन सबके बीच वापसी पर सोच विचार शुरू हो चुका था। दिल्ली दरबार से बड़े नेता ने निगाहें तरेरीं और फिर जनपद स्तर पर भी संगठन के तमाम दिग्गज मनाने में लगे हुए थे। इस पर आंकलन करने के बाद वापसी करने को ही सही समझा गया।
नाम वापसी के लिए स्वामी प्रवक्तानंद को मनाने के लिए भाजपाई खेमा सोमवार रात से ही एक्टिव हो गया था। बीसलपुर विधायक रामसरन वर्मा, शहर विधायक संजय सिंह गंगवार, जिलाध्यक्ष संजीव प्रताप सिंह आदि स्वामी प्रवक्तानंद से बात करने पहुंचे। रात भर कवायद चलती रही। फिर मंगलवार सुबह बीसलपुर विधायक की डेयरी पर घंटों वार्ता हुई और बाद में सीधे कलक्ट्रेट पहुंचकर नाम वापसी की गई। भाजपा नेता भले इससे इनकार कर रहे हों, मगर आम चर्चा यही हो रही है।
कांग्रेस ने सपा को घेरा, कहा- सब पहले से तय, भाजपा को दिया गया वॉकओवर
पीलीभीत। जिला पंचायत अध्यक्ष पद की दौड़ में भले ही कांग्रेस नहीं थी। उसका सिर्फ एक सदस्य जीतकर आया था, वह भी पिछड़ी जाति से नहीं था। मगर इस पूरे राजनीतिक खेल पर कांग्रेस की भी लगातार नजर बनी हुई थी। मगर मंगलवार को हुए घटनाक्रम के बाद कांग्रेस ने सपा को घेरना शुरू कर दिया है।
जिलाध्यक्ष कांग्रेस हरप्रीत सिंह चब्बा ने कहा कि जिस तरह से पहले बागी को लेकर आना और फिर उसे प्रत्याशी बनाकर उतारना। फिर अब उसी बागी का नाम वापसी कर वापस चला जाना। सीधे तौर पर यही है कि सपा ने भाजपा को वॉकओवर दे दिया। एक वरिष्ठ रालोद नेता पर भी बोले। कहा कि पिछले दिनों किसान आंदोलन को लेकर शारदा पार इलाके में रालोद नेता ने बड़ी सभा भाजपा के खिलाफ कराई। मगर जिला पंचायत अध्यक्ष पद के चुनाव में उनकी पत्नी जोकि जिला पंचायत सदस्य बनी हैं। वह भाजपा प्रत्याशी डॉ. दलजीत कौर की प्रस्तावक बन गई। यह सब खेल भाजपा को जिताने के लिए पहले से फिक्स था। कांग्रेस के पास अगर एक भी पिछड़ी जाति का सदस्य होता तो दमदारी के साथ लड़ाई लड़ती।
भाजपा में जश्न का माहौल, सपा कार्यालय में पसरा सन्नाटा
स्वामी प्रवक्तानंद के यू-टर्न पर पछताए, मगर खुलकर बोल भी न पाए
पीलीभीत। सपा के प्रत्याशी की नाम वापसी के बाद भाजपा की डॉ.दलजीत कौर का निर्विरोध चुना जाना तय हो चुका है। कई दिनों से चली आ रही खींचतान अचानक नया मोड़ ले गई है। इसके बाद भाजपाई तो जश्न में डूब गए हैं। मगर सपा नेताओं को पछतावा हो रहा है। कार्यालय पर भी पूरे दिन सन्नाटा पसरा रहा। हालांकि शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस बल तैनात दिखा।
इस बात पर कोई दो राय नहीं कि स्वामी प्रवक्तानंद को प्रत्याशी बनाए जाने पर सपा नेता खुद को मजबूत मानने लगे थे और भाजपा नेता भी चिंतित हो गए थे। दोनों ही राजनीतिक दलों में भाग-दौड़ की स्थिति बनी हुई थी। मंगलवार को अचानक नाम वापसी हुई तो भाजपा खेमे में जश्र का माहौल बन गया। एक होटल में आयोजित स्वागत समारोह में भी कार्यकर्ताओं ने जमकर नारेबाजी की और पकवान चखे। सेल्फी लेते हुए सोशल मीडिया पर भी जीत की खुशी जाहिर की जाती रही। उधर, कई दिनों से आत्मविश्वास से भरपूर चल रहा सपाई खेमा कहीं गुम रहा। सपा कार्यालय पर सुबह से सन्नाटा पसरा रहा। पूर्व मंत्री हेमराज वर्मा जरूर अपने गोदावरी स्टेट स्थित कार्यालय पर थे। मगर इस विषय पर कोई खास टिप्पणी नहंी की गई। स्वामी प्रवक्तानंद की वापसी पर इतना ही कहा कि अक्सर सपा में आने के बाद लोगों की अहमियत बढ़ ही जाती है।