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बिना मरम्मत के भरा जाएगा शारदा सागर डैम में पानी
ब्यूरो /पीलीभीत
Updated Sun, 02 Jul 2017 10:54 PM IST
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सूखे की स्थिति से निपटने के लिए सिंचाई विभाग के अभियंता 22 किलोमीटर लंबे शारदा सागर डैम को बिना मरम्मत किये ही पानी से भरेंगे। ऐसा बजट न मिलने की वजह से किया जा रहा हैं। डैम की मरम्मत के लिए शासन को कई प्रोजेक्ट भेजे गए, लेकिन बजट रिलीज नहीं किया गया। प्रदेश के पौन दर्जन जनपदों के लिए सिंचाई के लिए पानी मुहैय्या कराने वाले शारदा सागर डैम की हालत जर्जर होती जा रही है। इसकी दशा सुधार के लिए सिंचाई विभाग ने कई प्रोजेक्ट शासन को मंजूरी के लिए भेजे थे। इसमें एक प्रोजेक्ट डैम के बाहरी हिस्से की क्षतिग्रस्त सीपेज लॉग व क्रास ड्रेन एवं आउट फाल की मरम्मत का था, लेकिन इस प्रोजेक्ट पर धनराशि नहीं मिल सकी। इसके अलावा दूसरा प्रोजेक्ट डैम के भीतरी हिस्से की टूटी पिचिंग मरम्मत का था। इसमें भी छह करोड़ के प्रोजेक्ट पर मात्र दो करोड़ की धनराशि मिली। बताते हैं कि शासन से मिली इस रकम से जो कार्य कराया गया, उसमें बड़ा खेल खेला गया। शासन स्तर पर इसकी जांच चल रही है। इधर ठेकेदारों के भुगतान तो कर दिए गए, लेकिन जमानत धनराशि अभी रोकी गई है। अभियंताओं को डर है कि कहीं रिकवरी के आदेश हो गए तो जमानत धनराशि से भरपाई कर ली जाएगी।
प्रथम पंच वर्षीय योजना में बने इस डैम से प्रदेश के पौन दर्जन जनपदों की लाखों एकड़ फसलों की सिंचाई की जाती है। वहीं सूखा पड़ने पर शारदा डैम में भंडार किए गए पानी से ही फसलों की सिंचाई की जाती है। ऐसे में इस बार भी अभियंताओं को जर्जर हालत में ही डैम को पानी से भरना होगा। अभियंता बताते हैं कि डैम मरम्मत को तीन प्रोजेक्ट तो काफी पहले भेजे गए थे। उसमें एक प्रोजेक्ट डैम की मुख्य बॉडी के सर्विस मार्ग का भी था। गत वर्ष सर्विस मार्ग पर जलभराव के चलते गड्ढे होने से डैम की मुख्य बॉडी के कुछ बाहरी हिस्से का भाग धंस गया था। गनीमत रही कि डैम में पानी का स्तर उस दौरान काफी कम था। इधर इस बार अभियंता आला अफसरों के निर्देश पर जर्जर डैम में ही पानी का भंडार करने की तैयारी में हैं। अभियंताओं के मुताबिक डैम को रुक रुककर भरा जाएगा और बीच बीच में नहर के माध्यम से डैम को खाली भी किया जाता रहेगा। कुल मिलाकर बजट न मिलने से डैम की हालत जर्जर तो हो ही रही है, साथ ही सूखे की स्थिति पैदा हुई तो पौन दर्जन जनपदों में सिंचाई का संकट भी खड़ा हो सकता है।
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प्रथम पंच वर्षीय योजना में बने इस डैम से प्रदेश के पौन दर्जन जनपदों की लाखों एकड़ फसलों की सिंचाई की जाती है। वहीं सूखा पड़ने पर शारदा डैम में भंडार किए गए पानी से ही फसलों की सिंचाई की जाती है। ऐसे में इस बार भी अभियंताओं को जर्जर हालत में ही डैम को पानी से भरना होगा। अभियंता बताते हैं कि डैम मरम्मत को तीन प्रोजेक्ट तो काफी पहले भेजे गए थे। उसमें एक प्रोजेक्ट डैम की मुख्य बॉडी के सर्विस मार्ग का भी था। गत वर्ष सर्विस मार्ग पर जलभराव के चलते गड्ढे होने से डैम की मुख्य बॉडी के कुछ बाहरी हिस्से का भाग धंस गया था। गनीमत रही कि डैम में पानी का स्तर उस दौरान काफी कम था। इधर इस बार अभियंता आला अफसरों के निर्देश पर जर्जर डैम में ही पानी का भंडार करने की तैयारी में हैं। अभियंताओं के मुताबिक डैम को रुक रुककर भरा जाएगा और बीच बीच में नहर के माध्यम से डैम को खाली भी किया जाता रहेगा। कुल मिलाकर बजट न मिलने से डैम की हालत जर्जर तो हो ही रही है, साथ ही सूखे की स्थिति पैदा हुई तो पौन दर्जन जनपदों में सिंचाई का संकट भी खड़ा हो सकता है।
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