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Pilibhit News: शारदा की धीमी रफ्तार से बड़ा खतरा, करोड़ों की लागत से बना बांध संकट में
Tue, 26 Aug 2025 12:37 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत
संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत
Updated Tue, 26 Aug 2025 12:37 AM IST
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गांव खिरकिया बरगदिया के समीप कटान करती नदी स्रोत: ग्रामीण
- फोटो : बाघ के ताजा पगचिह्न मिले।
कलीनगर। शारदा का जलस्तर इस वर्ष भले ही सामान्य रहा हो, लेकिन नोमैंस लैंड पर जारी धीमी गति का कटान प्रशासन के लिए खतरे की घंटी बजा रहा है। ग्रामीणों के अनुसार अगर यही स्थिति बनी रही तो आगामी वर्षा ऋतु तक नदी दाहिने किनारे पर करोड़ों की लागत से बने मजबूत बांध को निगल सकती है। सिंचाई विभाग ने पूर्व वर्षों की तरह इस बार भी नोमैंस लैंड पर अस्थायी बाढ़ नियंत्रण कार्य नहीं कराया है, इसका नतीजा है कि नदी लगातार अपनी धार बदलते हुए खतरनाक ढंग से कटान कर रही है।
नेपाल से भारतीय क्षेत्र में प्रवेश करने के बाद शारदा और जगबूड़ा का संगम स्थल सबसे अधिक प्रभावशाली है। यहां जलस्तर कम होने के बावजूद दोनों नदियां मिलकर दाहिने किनारे पर कटान कर रही हैं। बीते वर्षों में शारदा नदी अंतरराष्ट्रीय पिलर नंबर 22 और 23 को काट चुकी है और इस साल भी स्थिति वैसी ही बन रही है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि करीब 10 करोड़ रुपये की लागत से बना बांध भी अभियंताओं की लापरवाही से खतरे में पड़ रहा है। दरअसल, बांध नोमैंस लैंड से बनना चाहिए था, लेकिन इसे करीब 300 मीटर डाउनस्ट्रीम में बनाया गया। पिछले वर्षों में यहां केवल अस्थायी बाढ़ नियंत्रण कार्य कराए जाते रहे, मगर इस साल कोई पुख्ता कदम नहीं उठाया गया। बांध को नुकसान पहुंचने से उससे सटे नौजल्हा, बंदरभोज आदि गांव की आबादी भी प्रभावित होगी।
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गुनहान क्षेत्र में तबाही, 300 एकड़ भूमि नदी में समाई
तहसील कलीनगर का गुनहान क्षेत्र भी शारदा की मार झेल रहा है। यहां नदी की दो धाराएं बनने से घाट संख्या 6 और 7 के क्षेत्र में करीब 300 एकड़ कृषि भूमि नदी ने काट दी। नदी की बाई धार बमनी नदी में जा मिली और बचा हुआ गांव टापू बनकर रह गया। इस स्थिति ने ट्रांस शारदा क्षेत्र में बाढ़ जैसी परिस्थितियां पैदा कर दी हैं।
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अफसर अब भी बेखबर
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि सिंचाई विभाग के अभियंता इस खतरे से बेपरवाह बने हुए हैं। वहीं, क्षेत्रीय लेखपाल वेद प्रकाश का कहना है कि शारदा का जलस्तर अधिक होने के कारण फिलहाल सटीक सर्वे संभव नहीं है। जलस्तर घटने के बाद ही वास्तविक नुकसान का आकलन किया जाएगा।
जब बांध बनाया गया था तो उसे नोमैंस लैंड से सटे इलाके से बनाना चाहिए, लेकिन 300 मीटर पीछे हटकर बांध बनाया गया। इससे दोनों नदियां मिलकर नोमैंस लैंड पर कटान कर रही हैं जो आगे बड़ा खतरा बन सकती है। - संजय तिवारी
नोमैंस लैंड पर दोनों नदियों का धीमी गति से कटान जारी है। अगर भविष्य में बाढ़ की स्थिति बनती है तो नदी बांध को नुकसान पहुंचाने के साथ ही आबादी क्षेत्र को भी प्रभावित करेगी। - अरुण भंडार
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हजारा और खिरकिया में 15 एकड़ गन्ना फसल नदी में समाई
संवाद न्यूज एजेंसी
पूरनपुर। शारदा का जलस्तर कम होने के बाद सोमवार को कटान की गति तेज रही। गांव हजारा के सात किसानों की 12 एकड़ और गांव खिरकिया बरगदिया में चार किसानों की तीन एकड़ में खड़ी गन्ने की फसल व एक किसान का एक एकड़ खेत नदी में समा गया। सिद्धनगर के समीप भी नदी ने तेजी से कटान शुरू किया है। सिद्धनगर के आठ किसानों के खेतों में नदी तेजी से कटान कर रही है। वहीं, कई गांवों के रास्ते पर अभी पानी भरा हुआ है।
नदी का जलस्तर कम होने पर सोमवार को गांव हजारा, खिरकिया बरगदिया, सिद्धनगर के समीप नदी ने तेजी से कटान शुरू कर दिया। गांव हजारा के धनीराम की तीन एकड़, रमेश, विजय, बर्दी, कांशीराम, परमात्मा की ड़ेढ़-डेढ़ एकड़ गन्ना की फसल नदी में समा गई। गांव खिरकिया बरगदिया के रघुनाथ की पौन एकड़, विद्यावती की तीन एकड़, उमेश की एक एकड़ गन्ना की फसल रविवार को नदी में समा गई थी। सोमवार को रघुनाथ की पौन एकड़, रामायन की एक एकड़, अलवीर की डेढ़ एकड़ जमीन पर खड़ी गन्ना की फसल और गांव के रामाधार का एक एकड़ का खाली पड़ा खेत नदी की भेंट चढ़ गया। इसके अलावा नदी गांव सिद्धनगर के समीप तेजी से कटान कर रही है। सिद्धनगर के प्रधान महेंंद्र सिंह ने बताया कि गांव के आठ किसानों की जमीन तेजी से कट रही है।
तीन-तीन फुट जमा हो गई रेत
गांव खिरकिया बरगदिया के समीप कटान के अलावा नदी ने कई खेतों में रेत छोड़ी है। कई किसानों के गन्ना के खेतों में तीन-तीन फिट रेत होने से फसल नष्ट हो जाने की आशंका है। रेत ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
तीन फुट तक पानी में घुसकर पहुुंच रहे खेतों पर
शारदा नदी का जलस्तर कम होने पर आबादी से तो जलभराव समाप्त हो गया, लेकिन रास्तों पर अभी तीन फुट तक पानी का बहाव चल रहा है। किसान फसल को देखने को जाने को रास्तों से पानी में घुसकर आवागमन कर रहे हैं। रास्ते जलमग्न होने से ग्रामीणों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
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नेपाल से भारतीय क्षेत्र में प्रवेश करने के बाद शारदा और जगबूड़ा का संगम स्थल सबसे अधिक प्रभावशाली है। यहां जलस्तर कम होने के बावजूद दोनों नदियां मिलकर दाहिने किनारे पर कटान कर रही हैं। बीते वर्षों में शारदा नदी अंतरराष्ट्रीय पिलर नंबर 22 और 23 को काट चुकी है और इस साल भी स्थिति वैसी ही बन रही है।
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स्थानीय लोगों का आरोप है कि करीब 10 करोड़ रुपये की लागत से बना बांध भी अभियंताओं की लापरवाही से खतरे में पड़ रहा है। दरअसल, बांध नोमैंस लैंड से बनना चाहिए था, लेकिन इसे करीब 300 मीटर डाउनस्ट्रीम में बनाया गया। पिछले वर्षों में यहां केवल अस्थायी बाढ़ नियंत्रण कार्य कराए जाते रहे, मगर इस साल कोई पुख्ता कदम नहीं उठाया गया। बांध को नुकसान पहुंचने से उससे सटे नौजल्हा, बंदरभोज आदि गांव की आबादी भी प्रभावित होगी।
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गुनहान क्षेत्र में तबाही, 300 एकड़ भूमि नदी में समाई
तहसील कलीनगर का गुनहान क्षेत्र भी शारदा की मार झेल रहा है। यहां नदी की दो धाराएं बनने से घाट संख्या 6 और 7 के क्षेत्र में करीब 300 एकड़ कृषि भूमि नदी ने काट दी। नदी की बाई धार बमनी नदी में जा मिली और बचा हुआ गांव टापू बनकर रह गया। इस स्थिति ने ट्रांस शारदा क्षेत्र में बाढ़ जैसी परिस्थितियां पैदा कर दी हैं।
अफसर अब भी बेखबर
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि सिंचाई विभाग के अभियंता इस खतरे से बेपरवाह बने हुए हैं। वहीं, क्षेत्रीय लेखपाल वेद प्रकाश का कहना है कि शारदा का जलस्तर अधिक होने के कारण फिलहाल सटीक सर्वे संभव नहीं है। जलस्तर घटने के बाद ही वास्तविक नुकसान का आकलन किया जाएगा।
जब बांध बनाया गया था तो उसे नोमैंस लैंड से सटे इलाके से बनाना चाहिए, लेकिन 300 मीटर पीछे हटकर बांध बनाया गया। इससे दोनों नदियां मिलकर नोमैंस लैंड पर कटान कर रही हैं जो आगे बड़ा खतरा बन सकती है। - संजय तिवारी
नोमैंस लैंड पर दोनों नदियों का धीमी गति से कटान जारी है। अगर भविष्य में बाढ़ की स्थिति बनती है तो नदी बांध को नुकसान पहुंचाने के साथ ही आबादी क्षेत्र को भी प्रभावित करेगी। - अरुण भंडार
हजारा और खिरकिया में 15 एकड़ गन्ना फसल नदी में समाई
संवाद न्यूज एजेंसी
पूरनपुर। शारदा का जलस्तर कम होने के बाद सोमवार को कटान की गति तेज रही। गांव हजारा के सात किसानों की 12 एकड़ और गांव खिरकिया बरगदिया में चार किसानों की तीन एकड़ में खड़ी गन्ने की फसल व एक किसान का एक एकड़ खेत नदी में समा गया। सिद्धनगर के समीप भी नदी ने तेजी से कटान शुरू किया है। सिद्धनगर के आठ किसानों के खेतों में नदी तेजी से कटान कर रही है। वहीं, कई गांवों के रास्ते पर अभी पानी भरा हुआ है।
नदी का जलस्तर कम होने पर सोमवार को गांव हजारा, खिरकिया बरगदिया, सिद्धनगर के समीप नदी ने तेजी से कटान शुरू कर दिया। गांव हजारा के धनीराम की तीन एकड़, रमेश, विजय, बर्दी, कांशीराम, परमात्मा की ड़ेढ़-डेढ़ एकड़ गन्ना की फसल नदी में समा गई। गांव खिरकिया बरगदिया के रघुनाथ की पौन एकड़, विद्यावती की तीन एकड़, उमेश की एक एकड़ गन्ना की फसल रविवार को नदी में समा गई थी। सोमवार को रघुनाथ की पौन एकड़, रामायन की एक एकड़, अलवीर की डेढ़ एकड़ जमीन पर खड़ी गन्ना की फसल और गांव के रामाधार का एक एकड़ का खाली पड़ा खेत नदी की भेंट चढ़ गया। इसके अलावा नदी गांव सिद्धनगर के समीप तेजी से कटान कर रही है। सिद्धनगर के प्रधान महेंंद्र सिंह ने बताया कि गांव के आठ किसानों की जमीन तेजी से कट रही है।
तीन-तीन फुट जमा हो गई रेत
गांव खिरकिया बरगदिया के समीप कटान के अलावा नदी ने कई खेतों में रेत छोड़ी है। कई किसानों के गन्ना के खेतों में तीन-तीन फिट रेत होने से फसल नष्ट हो जाने की आशंका है। रेत ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
तीन फुट तक पानी में घुसकर पहुुंच रहे खेतों पर
शारदा नदी का जलस्तर कम होने पर आबादी से तो जलभराव समाप्त हो गया, लेकिन रास्तों पर अभी तीन फुट तक पानी का बहाव चल रहा है। किसान फसल को देखने को जाने को रास्तों से पानी में घुसकर आवागमन कर रहे हैं। रास्ते जलमग्न होने से ग्रामीणों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

गांव खिरकिया बरगदिया के समीप कटान करती नदी स्रोत: ग्रामीण- फोटो : बाघ के ताजा पगचिह्न मिले।

गांव खिरकिया बरगदिया के समीप कटान करती नदी स्रोत: ग्रामीण- फोटो : बाघ के ताजा पगचिह्न मिले।

गांव खिरकिया बरगदिया के समीप कटान करती नदी स्रोत: ग्रामीण- फोटो : बाघ के ताजा पगचिह्न मिले।

गांव खिरकिया बरगदिया के समीप कटान करती नदी स्रोत: ग्रामीण- फोटो : बाघ के ताजा पगचिह्न मिले।

गांव खिरकिया बरगदिया के समीप कटान करती नदी स्रोत: ग्रामीण- फोटो : बाघ के ताजा पगचिह्न मिले।