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Pilibhit News: बरेली और कोतवाली गेट को किया जाएगा संरक्षित
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शहर की कोतवाली रोड स्थित बाजार गेट । संवाद
पीलीभीत। शहर के ब्रिटिशकॉलीन बरेली और कोतवाली गेट अपना वजूद खोते जा रहे हैं। इनके संरक्षण की जरूरत है। इसको लेकर बीते काफी साल से सामाजिक कार्यकर्ता शासन से मांग करते आ रहे थे। शासन ने अब दोनों गेटों को पुरातत्व विभाग के आधीन कर संरक्षित करने का निर्णय किया है। इसके लिए गजट जारी किया गया है। इसपर लोगों की आपत्ति मांगी गई है।
शहर की पहचान के तौर पर 1734 ई. में अली मुहम्मद खान ने सुरक्षा के लिहाज से चार द्वार, पश्चिम में बरेली दरवाजा, पूर्व में हुसैनी दरवाजा, उत्तर में जहानाबादी दरवाजा और दक्षिण में दखिनी दरवाजा बनवाए थे। इन दरवाजों से ही शहर की पहचान बनी।
इनमें से हुसैनी और जहानाबादी दरवाजा ध्वस्त हो चुके हैं। आजादी के बाद इन गेटों में सरकारी कार्यालयोंं के अलावा पुलिस चौकी भी संचालित होती थी। धीरे-धीरे इन ऐतिहासिक इमारतों की हालत देखरेख के अभाव में दयनीय होती चली गई। इनके संरक्षण को लेकर कोई ध्यान नहीं दिया गया।
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देखरेख के अभाव में मौजूदा समय में गेट काफी जर्जर हो चुके हैं और अपनी पहचान खोने लगे है। कहने को तो देखरेख का जिम्मा नगर पालिका परिषद का है, लेकिन कागजों पर ही संरक्षण हो रहा है। पुरातत्व विभाग ने अब यहां से सामाजिक कार्यकर्ता शुभम कश्यप के पत्राचार के बाद इस पर काम शुरू कर दिया है। इसके लिए पहली अधिसूचना जारी कर एक माह में जिलाधिकारी के माध्यम से आपत्ति मांगी गई हैं।
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दोनों गेटों की इतनी सीमा होगी आधीन
उत्तर प्रदेश सरकार के संस्कृत अनुभाग की ओर से बरेली गेट तथा कोतवाली गेट के लिए पहली अधिसूचना को जारी किया गया है। इसमें कहा गया है बरेली गेट के लिए राजस्व गाटा संख्या 500 एवं 0.053 हेक्टेयर लिया जाएगा। इसमें गाटा संख्या 560 पूर्व में, पश्चिम में गाटा संख्या 499, उत्तर में गाटा संख्या 501, दक्षिण में घाटा संख्या 499 है। इसी तरह से कोतवाली गेट का गाटा संख्या 516 पूर्व की ओर, पश्चिम की ओर गाटा संख्या 337, उत्तर की ओर गाटा संख्या 507, दक्षिण की ओर गाटा संख्या 505 है। संयुक्त सचिव उमा द्विवेदी की ओर से जिला प्रशासन को भेजे गए पत्र में कहा गया है अधिसूचना जारी होने के बाबत कोई आपत्तियां हों तो प्रमुख सचिव संस्कृति विभाग, निदेशक उत्तर प्रदेश राज्य पुरातत्व विभाग अथवा जिला अधिकारी पीलीभीत को संबोधित करते हुए लिखित रूप से भेजी जा सकती हैं। कहा गया है कि केवल उन्हीं आपत्तियों पर विचार किया जाएगा जो इस सूचना के स्मारक पर चस्पा होने के एक माह के भीतर प्राप्त होंगी।
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सामाजिक कार्यकर्ता ने संरक्षण का उठाया है बीड़ा
बरहा कॉलोनी के रहने वाले सामाजिक कार्यकर्ता शिवम कश्यप ने शहर की इन ऐतिहासिक धरोहरों को सहेजने के लिए प्रयास शुरू किया था। इसके लिए वह लगातार पुरातत्व विभाग से पत्राचार कर रहे थे। इस बाबत 15 जून को पत्र भेजा था। इसके बाद टीम ने यहां आकर सर्वे किया था। अब उनकी मुहिम रंग लाती दिख रही है।
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शहर की पहचान के तौर पर 1734 ई. में अली मुहम्मद खान ने सुरक्षा के लिहाज से चार द्वार, पश्चिम में बरेली दरवाजा, पूर्व में हुसैनी दरवाजा, उत्तर में जहानाबादी दरवाजा और दक्षिण में दखिनी दरवाजा बनवाए थे। इन दरवाजों से ही शहर की पहचान बनी।
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इनमें से हुसैनी और जहानाबादी दरवाजा ध्वस्त हो चुके हैं। आजादी के बाद इन गेटों में सरकारी कार्यालयोंं के अलावा पुलिस चौकी भी संचालित होती थी। धीरे-धीरे इन ऐतिहासिक इमारतों की हालत देखरेख के अभाव में दयनीय होती चली गई। इनके संरक्षण को लेकर कोई ध्यान नहीं दिया गया।
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देखरेख के अभाव में मौजूदा समय में गेट काफी जर्जर हो चुके हैं और अपनी पहचान खोने लगे है। कहने को तो देखरेख का जिम्मा नगर पालिका परिषद का है, लेकिन कागजों पर ही संरक्षण हो रहा है। पुरातत्व विभाग ने अब यहां से सामाजिक कार्यकर्ता शुभम कश्यप के पत्राचार के बाद इस पर काम शुरू कर दिया है। इसके लिए पहली अधिसूचना जारी कर एक माह में जिलाधिकारी के माध्यम से आपत्ति मांगी गई हैं।
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दोनों गेटों की इतनी सीमा होगी आधीन
उत्तर प्रदेश सरकार के संस्कृत अनुभाग की ओर से बरेली गेट तथा कोतवाली गेट के लिए पहली अधिसूचना को जारी किया गया है। इसमें कहा गया है बरेली गेट के लिए राजस्व गाटा संख्या 500 एवं 0.053 हेक्टेयर लिया जाएगा। इसमें गाटा संख्या 560 पूर्व में, पश्चिम में गाटा संख्या 499, उत्तर में गाटा संख्या 501, दक्षिण में घाटा संख्या 499 है। इसी तरह से कोतवाली गेट का गाटा संख्या 516 पूर्व की ओर, पश्चिम की ओर गाटा संख्या 337, उत्तर की ओर गाटा संख्या 507, दक्षिण की ओर गाटा संख्या 505 है। संयुक्त सचिव उमा द्विवेदी की ओर से जिला प्रशासन को भेजे गए पत्र में कहा गया है अधिसूचना जारी होने के बाबत कोई आपत्तियां हों तो प्रमुख सचिव संस्कृति विभाग, निदेशक उत्तर प्रदेश राज्य पुरातत्व विभाग अथवा जिला अधिकारी पीलीभीत को संबोधित करते हुए लिखित रूप से भेजी जा सकती हैं। कहा गया है कि केवल उन्हीं आपत्तियों पर विचार किया जाएगा जो इस सूचना के स्मारक पर चस्पा होने के एक माह के भीतर प्राप्त होंगी।
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सामाजिक कार्यकर्ता ने संरक्षण का उठाया है बीड़ा
बरहा कॉलोनी के रहने वाले सामाजिक कार्यकर्ता शिवम कश्यप ने शहर की इन ऐतिहासिक धरोहरों को सहेजने के लिए प्रयास शुरू किया था। इसके लिए वह लगातार पुरातत्व विभाग से पत्राचार कर रहे थे। इस बाबत 15 जून को पत्र भेजा था। इसके बाद टीम ने यहां आकर सर्वे किया था। अब उनकी मुहिम रंग लाती दिख रही है।

शहर की कोतवाली रोड स्थित बाजार गेट । संवाद