Pilibhit: फ्लाईओवर के निर्माण में बाधक मंदिर को ढहाया, देवी-देवताओं की मूर्तियां दूसरी जगह स्थापित
मंदिर के महंत से कई दौर की वार्ता के बाद इस बात पर सहमति बनी। इसके बाद मंदिर को ढहा दिया गया। निर्माण पूरा होने के बाद कार्यदायी संस्था तय स्थान पर मंदिर बनाएगी।
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पीलीभीत के असम हाईवे पर फ्लाईओवर के निर्माण की राह रोक रहा मंदिर कार्यदायी संस्था ने ढहा दिया है। मंदिर में स्थापित मां काली और बजरंगबली की मूर्तियों को हाईवे किनारे ही लोकनिर्माण विभाग की जमीन पर अस्थाई मंदिर बनाकर स्थापित कर दिया गया है। हालांकि वहां आम श्रद्धालुओं को पूजा-अर्चना करने की अनुमति नहीं होगी। सिर्फ मंदिर के महंत ही सेवा करेंगे। मंदिर का भवन तोड़ने के बाद जगह भी समतल कर दी गई है, ताकि निर्माण कार्य में कोई बाधा न रहे। उम्मीद है कि फ्लाईओवर का निर्माण कार्य अब तेजी पकड़ेगा।
करीब एक साल पहले असम चौराहे पर फ्लाईओवर का निर्माण कार्य शुरू कराया गया था। वर्तमान में फ्लाईओवर के पिलर बनाने का काम चल रहा है। निर्माण के दौरान फ्लाईओवर की राह में पुलिस चौकी, दुकानों का अतिक्रमण और मंदिर मुख्य आड़े आ गए। प्रशासन ने दुकानों का अतिक्रमण तो उसी वक्त तुड़वा दिया, लेकिन मंदिर का मामला फंसा गया। हाईवे पर स्थित इस प्राचीन मंदिर को हटाना प्रशासन के लिए बड़ी था।
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मंदिर के महंत से कई दौर की वार्ता के बाद इस बात पर सहमति बनी कि मूर्तियों को अन्यत्र स्थापित कर मंदिर का भवन तोड़कर फ्लाईओवर का निर्माण कराया जाएगा। निर्माण पूरा होने के बाद कार्यदायी संस्था उसी स्थान पर मंदिर का भवन बनाएगी और फिर प्रतिमाओं को वापस वहां स्थापित कर दिया जाएगा। दो दिन पूर्व मंदिर से मूर्तियों को हटाकर हाईवे किनारे लोक निर्माण विभाग की जमीन पर अस्थाई मंदिर बनाकर स्थापित करा दिया गया है। भवन ध्वस्त होने के बाद संभावना जताई जा रही है कि अब फ्लाईओवर का निर्माण कार्य तेजी पकड़ेगा
मंदिर में स्थापित थीं कई देवी-देवताओं की मूर्तियां
मंदिर में एक मां काली की बड़ी मूर्ति के अलावा श्री हनुमान, शंकर जी समेत अन्य देवी-देवताओं की मूर्तियां स्थापित थीं। प्रमुख धार्मिक पर्वों पर यहां भंडारे का आयोजन भी होता था। लोगों का कहना है मंदिर तीस साल से अधिक पुराना है।
बिजली के पोल अब भी बने हैं बाधा
फ्लाईओवर के निर्माण में बाधक बन रहे मंदिर और पुलिस चौकी का मामला हल हो जाने के बाद अब बिजली के पोल बाधा बने हुए हैं। निर्माण के दायरे में करीब 90 खंभे आ रहे हैं। हालांकि इन्हें हटाने के लिए पावर कॉरपोरेशन और कार्यदाई संस्था के बीच अनुबंध हो चुका है। जल्दी ही बिजली के पल भी अन्यत्र शिफ्ट किए जाएंगे।