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आस्तान-ए-आलिया ने लगाया दावत-ए-इस्लामी के लोगों के आने पर प्रतिबंध

Mon, 04 Jul 2022 01:03 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Mon, 04 Jul 2022 01:03 AM IST
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Astan-e-Alia imposed restrictions on the arrival of the people of Dawat-e-Islami
मौलाना जरताब रजा खां। - फोटो : PILIBHIT
पीलीभीत। उदयपुर घटना के तार दावत-ए-इस्लामी संगठन से जुड़े होने की चर्चाओं के बीच आस्तान-ए- आलिया हशमतिया ने संगठन के लोगों के आस्ताने आने पर प्रतिबंध लगा दिया है। सज्जादानशीन और शहर काजी मौलाना जरताब रजा खां ने बयान जारी कर कहा कि यह पाकिस्तानी तंजीम है और प्रदेश सरकार को इस संगठन की गतिविधियों पर तत्काल रोक लगानी चाहिए।
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मौलाना जरताब रजा का कहना कि दावत-ए-इस्लामी पाकिस्तानी संगठन है और यह भारत के साथ दुनिया के कई मुल्कों में सक्रिय है। संगठन जिले से ही लाखों रुपये का चंदा जमा करता है। जिले में भी कई मदरसे संचालित हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि संगठन चंदे के पैैसे को कहां खर्च कर रहा है। इसकी जांच होनी चाहिए। संगठन के लोग पूरे जिले में मदरसा, रमजान, कुर्बानी के नाम पर लाखों रुपये का चंदा लेते हैं। ये पैसा पाकिस्तान भेजा जा रहा है और देश विरोध गतिविधियों में खर्च किया जा रहा है।
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उन्होंने कहा कि उनके पिता मौलाना मुशाहिद रजा खां ने भी 1999 में संगठन पर प्रतिबंध लगाने की मांग उठाई थी लेकिन सरकारों ने ध्यान नहीं दिया। ऐसे संगठन देश विरोधी गतिविधियों को अंजाम दे रहे हैं। संगठन का मुखिया कराची में बैठकर पूरी दुनिया में गतिविधियां संचालित करता है। भारत से इकट्ठा हुए चंदे का इस्तेमाल दशहतगर्दी के लिए किया जाता है। उन्होंने सवाल भी उठाया कि ऐसे संगठन के मदरसों को मान्यता कैसे मिल रही है। संगठन के लोग मदरसों और मजिस्दों में जाते हैं। दीनी तालीम के नाम पर युवाओं को गुमराह करते हैं।
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इस्लाम इंसानियत से मोहब्बत करना सिखाता है न कि नफरत फैलाना। इसलिए आस्ताने आलिया और मस्जिद बादशाह बेगम में तंजीम से जुड़े लोगों पर प्रतिबंध लगाया है। उन्होंने यह भी कहा कि संगठन के खिलाफ आवाज उठाने के कारण उनकी जान को भी खतरा हो सकता है। इसलिए प्रदेश सरकार से गुजारिश है कि जिस तरह से कश्मीर में कई संगठनों पर प्रतिबंध लगाया गया वैसे उत्तर प्रदेश में भी दावत-ए-इस्लामी पर प्रतिबंध तत्काल लगाया जाए।
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