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जिम्मेदारों की लापरवाही से खूनी बन रहा असर हाईवे

Fri, 24 Jun 2022 12:48 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Fri, 24 Jun 2022 12:48 AM IST
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Assam highway becoming bloody due to negligence of the responsible
असम हाईवे किनारे बने इसी गड्ढा के कारण हादसा होने की चर्चा। संवाद - फोटो : PILIBHIT
सर्वेश कुमार शर्मा
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पीलीभीत। जिम्मेदारों की लापरवाही से असम हाईवे खूनी बनता जा रहा है। कई बड़े हादसों में लोग जान गवां चुके हैं। प्रदेश सरकार भले ही सड़क हादसों में कमी लाने के लिए जिम्मेदारों को पाठ पड़ा रही हो, मगर धरातल पर कोई ठोस काम दिखाई नहीं दे रहा है। फरवरी से अब तक 15 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं।
बृहस्पतिवार को जिस स्थान पर हादसा हुआ उससे कुछ पहले कटना नदी का पुल है। इसके बाद भी ध्यान नहीं दिया जा रहा है। हाईवे किनारे अगर गड्ढा नहीं होता तो शायद मरने वालों की संख्या इतनी नहीं बढ़ती, मगर इसको लेकर कोई देखने वाला नहीं। खास बात यह है कि हादसे के स्थान से पांच किलोमीटर के दायरे में लगातार हादसों में लोग जान गवां रहे है, मगर सुधारात्मक कार्य कोई नहीं हुआ।
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13 फरवरी को दंपती की जान जा चुकी है, नौ अप्रैल को एक, 13 अप्रैल को एक, दो जून को एक व्यक्ति की मौत हो चुके है। अब इस हादसे में दस लोग काल के गाल में समा चुके हैं। इसके अलावा कई और हादसों में भी लोग इसी स्थल के आसपास जान गवां चुके हैं, मगर ओवर स्पीड और फुटपाथ की ओर कोई ध्यान नहीं है। नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) की लापरवाही इन हादसों की बनी वजह बन रही है। संवाद
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तीन अप्रैल 2022: 15 फुट गहरी खाई में गिरी थी पिकअप, दो ने गंवाई थी जान
बदायूं के थाना जरीफनगर क्षेत्र के गांव शादीपुर, सुआनगला, दुधवा के श्रद्धालुओं से भरी पिकअप असम हाईवे पर जहानाबाद थाना क्षेत्र के गांव जतीपुर के पास निर्माणाधीन पुलिया की 15 फुट गहरी खाई में गिर गई। पुलिया के चौकीदार धनीराम, बदायूं के थाना जरीफनगर के गांव शादीपुर निवासी विजय पाल सिंह के 18 वर्षीय पुत्र अवधेश सिंह की मौत हो गई। जबकि आठ लोग घायल हो गए। सभी लोग मां पूर्णागिरि के दर्शन को जा रहे थे। बीच सड़क पर बनी खाई में कोई रोकथाम के इंतजाम नहीं होने के कारण पिकअप खाई में गिरी थी।
30 मार्च, 2019: कार में आग लगने से पांच लोग जिंदा जले थे
न्यूरिया के ससुर-दामाद समेत पांच लोग बरेली से लौट रहे थे। जतीपुर के पास नेपाली बस से कार की टक्कर की हो गई और दोनों वाहन खाई में चले गए थे। कार में आग लग गई थी। इससे कार सवार पांचों लोगों की जिंदा जलकर मौत हुई थी। उनके शव भी पहचान लायक नहीं बच सके थे। इस हादसे में भी वाहनों की रफ्तार और हाईवे किनारे लगे मिट़्टी के ढेर से दुर्घटना की वजह सामने आई थी। हादसों के कुछ दिनों तक तो सुधार कराने को लेकर दावे किए जाते रहे, मगर इसके बाद नतीजतन शून्य हो गया।
26 जुलाई, 2019, पूर्णागिरी से दर्शन कर लौटते समय सात की गई थी जान
अलीगढ़ के छर्रा निवासी 25 वर्षीय हरदेश शर्मा पुत्र रामेश्वर दयाल, उनकी पत्नी 23 वर्षीय पल्लवी, एक साल का बेटा उत्कर्ष, तीन वर्षीय पुत्री आराध्या, 28 वर्षीय राजीव, उनकी पत्नी सविता, एक साल की बेटी भक्ति, 27 वर्षीय रिशांत पुत्र हरिओम शर्मा सभी लोग आल्टो कार से उत्तराखंड के मां पूर्णागिरी धाम से दर्शन कर लौट रहे थे। जतीपुर-खमरिया पुल के बीच पहुंचते ही सामने से आ रही टनकपुर डिपो की बस से आमने-सामने भिड़ंत हो गई। इसमें कार सवार सात लोगों की मौत हो गई, जबकि मासूम उत्कर्ष घायल हो गया। हादसे की मुख्य वजह तेज रफ्तार व घटनास्थल पर लगा मिट्टी का ढेर सामने आई।
22 जून 2022, और ग्यारह लोग समा के काल के गाल में
हरिद्वार से लखीमपुर जा रही गाड़ी (टाटा ऐस) भले ही चालक को झपकी आने के बाद अनियंत्रित होकर खाई में गिरी हो, मगर अगर हाईवे किनारे बड़ा से गड्ढा नहीं होता और फुटपाथ पक्का होता तो शायद चालक गाड़ी को नियंत्रित कर लेता और मासूमों समेत दस लोगों में से कुछ की जान बच गई होती। मगर लापरवाही का आलम ऐसा कि जिम्मेदारों को कोई परवाह भी नहीं। लोगों के मुताबिक इतने बड़े हादसे का मुख्य कारण हाईवे किनारे बना गढ्डा है। इससे गाड़ी गड्ढा में जाते की खाई में चली गई और दस लोगों की मौत हो गई।

असम हाईवे पर हादसा काफी दर्दनाक हुआ है। हालांकि हाईवे कहीं भी टूटा हुआ नहीं है। लगातार हाईवे पर सुधारात्मक कार्य कराएं जा रहे हैं। तेज स्पीड से हादसे हो रहे हैं। फिर भी अगर किसी मोड़ या फिर हाईवे किनारे गड्ढा है, तो तत्काल दुरुस्त कराया जाएगा। - नारायण सिंह, एक्सईएन, एनएचएआई बरेली

असम हाईवे पर हादसा स्थल से आगे इस खतरनाक मोड़ पर भी नहीं है कोई पहचान चिह्न। संवाद

असम हाईवे पर हादसा स्थल से आगे इस खतरनाक मोड़ पर भी नहीं है कोई पहचान चिह्न। संवाद- फोटो : PILIBHIT

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