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सर्दी बढ़ी तो आबादी और खेतों की ओर रुख करने लगे बाघ-तेंदुए

Tue, 01 Dec 2020 01:07 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Tue, 01 Dec 2020 01:07 AM IST
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As winter progresses, tigers and leopards turn to the population and fields
गजरौला, माधोटांडा और अमरिया क्षेत्र मेें दोनों वन्य जीवों की चहलकदमी एकाएक बढ़ी
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जानकारों ने सर्दी में बाघों की बिवाई फटना और दूसरा शिकार की तलाश बताए कारण
पीलीभीत।। बढ़ती ठंड के बीच टाइगर रिजर्व के बाघों और तेंदुओं ने जंगलों से निकलकर आबादी की ओर रुख करना शुरू कर दिया है। ऐसे में मवेशियों के साथ इंसानों के लिए भी पिछले सालों की तरह खतरा बढ़ता जा रहा है।
जानकारों ने इसके दो कारण बताए हैं। एक तो बाघ और तेंदुए जंगल से अपने शिकार का पीछा करते हुए आबादी क्षेत्र तथा खेतों में पहुंच रहे हैं। वहीं दूसरा ठंड में बाघ के पैरों की बिवाई फटने लगती है, जिससे वह शिकार करने में एक तरह से लाचार हो जाते हैं। ऐसे में आबादी क्षेत्र में आसानी से शिकार मिलने के कारण रुख करने लगते हैं। फिलहाल वन महकमे के पास इसकी रोकथाम के कोई इंतजाम नहीं हैं।
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खेतों और नहर क्षेत्र में जमा रहे डेरा
जनपद में करीब 73,000 हेक्टेयर में फैले टाइगर रिजर्व के जंगल मेें वास कर रहे बाघों के बाहर निकलने का सिलसिला यूं तो अरसे से जारी है, मगर सर्दी शुरू होते ही जंगल से बाहर निकलने वाले बाघों की संख्या में इजाफा होता जा रहा है। बाघों के बाहर निकलने के कारणों पर वन्यजीव विशेषज्ञों की राय जुदा है, मगर मामला जो भी हो टाइगर रिजर्व से सटे पांच से दस किमी के आबादी क्षेत्र और खेतों में बाघों की चहलकदमी बढ़ने लगी है। बाघ समेत अन्य वन्यजीव कोहरे में कई किमी तक शिकार की तलाश में निकल रहे हैं और फिर वापस नहीं लौट रहे हैं।
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बिवाई फटने के बाद खेतों और रेतीले स्थानों पर ढूंढते हैं शिकार
जंगल क्षेत्र से सटे गांवों के खेतों और खारजा नहर के आसपास बड़े पैमाने पर जंगली सुअर और नीलगाय आते जाते रहते हैं। वन अफसरों के मुताबिक, सर्दी में बाघों के बाहर निकलने की वजह शिकार का पीछा करना है। दूसरे इनके पैरों की बिवाई फटने की वजह से यह रेत और मिट्टी वाले स्थानों पर रहना और चलना पसंद करते हैं। जंगल से सटे इलाकों में अन्य वन्यजीवों की अधिकता के चलते उन्हें लंबी भागदौड़ न कर आसानी से शिकार मिल जाता है और यदि सुअर या नीलगाय जान बचाने को समीप के गन्ने के खेतों की तरफ भागते हैं तो बाघ भी अपने शिकार कर पीछा करते हुए गन्ने के खेतों तक पहुंच जाते हैं।
गजरौला और माधोटांडा में बाघों की चहलकदमी जारी
इन दिनों माला रेंज से गजरौला क्षेत्र, बराही रेंज से माधोटांडा और दियूरिया रेंज के आसपास के गांवों में बाघों की चहलकदमी लगातार जारी है। पिछले कुछ सालों से इन क्षेत्रों में बाघ की खासी मौजूदगी देखी जा रही है। अमरिया में एक बार फिर तेंदुए ने दस्तक दे दी है। ग्रामीणों का कहना है कि इस समय गन्ने की फसल की कटाई चल रही है। सुरक्षा की बात पर वन विभाग खेतों में समूह में जाने की बात कहकर अपना पल्ला झाड़ लेता है, मगर यह खेती किसानी के बीच करना आसान नहीं होता।

बाघों के जंगल क्षेत्र से बाहर आने का मुख्य कारण शिकार है, जिसका पीछा करते हुए वह खेतों तक पहुंच जाते हैं। इस सीजन में बाघ के पैरों में विमाइयां फटने लगती हैं। जंगल में झाड़ झंकाड़ से बचने को वह जंगल के चिकने और साफ रोड का सहारा ले रहे हैं। किसानों से सतर्क रहने और खेतों में समूह से जाने की सलाह दी जा रही है।
- उमेश चंद्र राय, उप प्रभागीय वनाधिकारी, टाइगर रिजर्व
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