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Pilibhit News: मौसम बदला तो बच्चों पर भारी पड़ा रोटा वायरस, दस दिन में ढाई हजार मासूम चपेट में

Thu, 24 Sep 2026 12:06 AM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत
संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत Updated Thu, 24 Sep 2026 12:06 AM IST
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As the weather changed, rotavirus took a heavy toll on children, affecting 2,500 children in ten days.
पीकू वार्ड में खुद बच्चें की मशीन छूते परिजन। संवाद
पीलीभीत। मौसम में बदलाव के साथ बच्चों में रोटा वायरस का खतरा बढ़ गया है। बुधवार को अकेले परामर्श कक्ष में ग्रामीण क्षेत्रों से पहुंचे 250 से अधिक बच्चों का चिकित्सकीय परीक्षण किया गया। इनमें बड़ी संख्या पेट संबंधी समस्या से जूझ रहे बच्चों की रही। अस्पताल प्रशासन के अनुसार, दस दिनों में करीब 2500 बच्चे ऐसी समस्या से ग्रसित होकर इलाज के लिए आ चुके है।
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गंभीर मरीजों के लिए संचालित पीकू वार्ड में भी सभी बेड भरे हैं, जबकि छह माह तक के नवजातों के इलाज के लिए बने एसएनसीयू (विशेष नवजात शिशु देखभाल इकाई) के सभी 12 बेड फुल चल रहे हैं।
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अस्पताल के बाल रोग विभागाध्यक्ष डॉ. सुमित सचान ने बताया कि इन दिनों अस्पताल में सबसे अधिक बच्चे पेट के संक्रमण की शिकायत लेकर पहुंच रहे हैं। करीब 30 प्रतिशत भर्ती बच्चे पेट संबंधी समस्याओं से पीड़ित हैं। उन्होंने कहा कि मौसम बदलने के दौरान बच्चों पर विशेष निगरानी जरूरी है। अभिभावक बच्चों को बासी भोजन न दें और साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें।
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क्या है रोटावायरस और क्यों बच्चों के लिए खतरनाक
डॉ. सुमित सचान ने बताया रोटा वायरस एक अत्यधिक संक्रामक वायरस है, जो खासतौर पर छोटे बच्चों में तेज दस्त और उल्टी का कारण बनता है। संक्रमित व्यक्ति के मल के सूक्ष्म कणों से दूषित हाथ, पानी, भोजन या सतह के संपर्क में आने से इसका संक्रमण फैल सकता है। लगातार दस्त और उल्टी के कारण बच्चे के शरीर में पानी व इलेक्ट्रोलाइट की कमी हो जाती है। छोटे बच्चों में यह स्थिति तेजी से गंभीर रूप ले सकती है। बच्चे को बार-बार दस्त या उल्टी होने, पेशाब कम आने, अत्यधिक कमजोरी, सुस्ती या मुंह सूखने जैसे लक्षण दिखाई देने पर इसे सामान्य समस्या समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।डॉ. सुमित सचान ने अभिभावकों को बच्चों को बासी भोजन, रात में दही, मट्ठा, अचार, आइसक्रीम और कोल्ड ड्रिंक देने से बचने की सलाह दी है। साथ ही साफ पानी का इस्तेमाल करने, खाना खिलाने से पहले हाथ धुलाने और भोजन को ढककर रखने पर जोर दिया है।
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पीकू वार्ड में गंभीर बच्चे, तीमारदारों की भीड़ बढ़ा रही संक्रमण का खतरा
गंभीर अवस्था में भर्ती बच्चों के इलाज के लिए जिला अस्पताल में पीडियाट्रिक इंटेंसिव केयर यूनिट यानी पीकू वार्ड संचालित है। इसे बच्चों का आईसीयू भी कहा जाता है। इस वार्ड में गंभीर मरीजों के भर्ती होने के कारण संक्रमण नियंत्रण बेहद महत्वपूर्ण है। इसके बावजूद कुछ तीमारदारों की बेरोकटोक आवाजाही चिंता का कारण बनी हुई है।
वार्ड में कुछ तीमारदार बच्चों के बिस्तर पर बैठने के साथ वहीं खानपान करते दिखाई देते हैं। निर्धारित व्यवस्था के अनुसार एक मरीज के साथ एक ही तीमारदार को रहने की अनुमति होती है। इसके बावजूद अधिक लोगों की आवाजाही होने से वार्ड में भीड़ बढ़ती है, जिससे गंभीर बच्चों में संक्रमण का अतिरिक्त खतरा पैदा हो सकता है।

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एसएनसीयू में सभी 12 बेड फुल, नवजातों पर भी संक्रमण की मार
छह माह तक के नवजात और गंभीर शिशुओं के उपचार के लिए संचालित एसएनसीयू में भी मरीजों का दबाव लगातार बना हुआ है। 12 बेड की क्षमता वाली यूनिट पूरी तरह भर चुकी है। ठंड लगने, सांस लेने में परेशानी और अन्य स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतों के चलते नवजातों को भर्ती किया जा रहा है। बेड उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में कुछ परिवारों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। निशुल्क उपचार की उम्मीद में ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले परिवारों के लिए यह स्थिति और मुश्किल पैदा कर रही है।
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डॉक्टर बोले, बच्चों को लेकर यह रखें खास ख्याल
- छोटे बच्चों को गीले कपड़े व बिस्तर से तुरंत हटाए।
- बच्चों को जितना हो पाए अपने हाथों से ही भोजन कराएं व हाथों को पहले धोए।
- पार्क में शाम को बच्चों को ज्यादा देर खेलने से रोकें।
- बच्चों को आइस्क्रीम, कोल्ड ड्रिंक, दही, मठ्ठा, अचार आदि देने से बचे।
- खाने में दलिया, मूंग की खिचड़ी, ओटस, सूजी का हलवा आदि दें।
- बच्चों के सोने के स्थान पर मच्छरदानी या मच्छर मारने का स्प्रे करें।

पीकू वार्ड में खुद बच्चें की मशीन छूते परिजन। संवाद

पीकू वार्ड में खुद बच्चें की मशीन छूते परिजन। संवाद

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