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यूरिया मिलाकर बनाई जा रही थी कच्ची शराब, पांच पकड़े
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जहानाबाद (पीलीभीत)। अभी तीन दिन पहले ही बरखेड़ा के गांव पौटाकलां में यूपी की ‘मैकडोवेल नंबर वन’ शराब की बोतल में हरियाणा की सस्ती शराब भरने का मामला पकड़ा गया था कि अब एक और मामला खुल गया। होली से ठीक 24 घंटे पहले यूरिया मिलाकर बनाई जा रही 104 लीटर शराब जहानाबाद पुलिस ने बरामद की है। इसके साथ ही पांच आरोपी भी पुलिस के हत्थे चढ़ गए। सभी के खिलाफ आबकारी अधिनियम के तहत रिपोर्ट दर्ज कर चालान कर दिया गया है।
होली पर शराब की डिमांड बढ़ते ही मिलावटखोर और कच्ची शराब का धंधा करने वाले बड़े पैमाने पर सक्रिय हैं। इन पर शिकंजा कसने के लिए आबकारी विभाग और पुलिस की ओर से अभियान भी चलाया जा रहा है। रविवार को पुलिस को सूचना मिली कि उझैनिया गांव में कुछ लोग ग्राम समाज की जगह पर यूरिया मिलाकर हानिकारक शराब तैयार कर रहे हैं। इसकी होली पर बिक्री की जानी है। इंस्पेक्टर मनीराम सिंह ने पुलिस बल के साथ उझैनिया गांव में छापा मारा तो वहां अवैध शराब की भट्ठी चलती मिली। पुलिस के पहुंचते ही शराब बनाने वाले भागने लगे। हालांकि पीछा कर पुलिस ने सभी पांच लोगों को धर दबोचा। पूछताछ में उन्होंने अपना नाम उझैनिया गांव निवासी प्रेमशंकर, प्रेम कुमार, जबर सिंह, वेदपाल और उमरसड़ गांव निवासी जागन लाल बताए। मौके से 104 लीटर शराब, पांच किग्रा यूरिया और उपकरण बरामद हुए हैं। आरोपियों ने बताया कि शराब में तीव्र नशा के लिए उसमें यूरिया मिला रहे थे। इंस्पेक्टर मनीराम सिंह ने बताया कि पकड़े गए आरोपियों पर आबकारी अधिनियम के तहत रिपोर्ट दर्ज की गई है। आरोपियों का चालान कर दिया है।
नेपाल तक होती है कच्ची शराब की सप्लाई
जनपद में जंगल और नदी से सटे इलाकों में बड़े पैमाने पर कच्ची शराब बनाई जाती है। माधोटांडा और हजारा क्षेत्र में कच्ची शराब का अनाधिकृत धंधा बड़े पैमाने पर होता है। इस कारोबार में संलिप्त लोग कच्ची शराब तैयार कर उसे आसपास के जिलों में ही नहीं, बल्कि पड़ोसी देश नेपाल तक बिक्री करते हैं। माधोटांडा, कलीनगर, मझारा, कटकवारा, वीरखेड़ा समेत कई गांवों की पहचान ही कच्ची शराब के धंधे से है। इन गांवों में कच्ची शराब के कारोबारी जंगल का सहारा लेकर सिस्टम से साठगांठ कर अनाधिकृत कच्ची शराब के धंधे से बेखौफ पनप रहे हैं। जगह-जगह धधकती भट्ठियां इसकी गवाही देती हैं। पुलिस और आबकारी विभाग की ओर से साल भर औपचारिकतापूर्ण कार्रवाई की जाती है। अब होली पर शासन की सख्ती के बाद कार्रवाई की गई तो हकीकत खुलकर सामने आ रही है।
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पूरनपुर सर्किल में सर्वाधिक गांव
कच्ची शराब को लेकर कई इलाके चर्चित हैं। मगर सर्वाधिक कारोबार पूरनपुर सर्किल में होता है। वहीं पर सबसे अधिक गांव कच्ची शराब के लिए चिह्नित हैं। सिटी सर्किल में 55, सदर सर्किल मतें 65, बीसलपुर सर्किल में 82 और पूरनपुर में 136 गांव इसके लिए अलग पहचान रखते हैं।
ऐसे बनाते हैं यूरिया मिलाकर शराब
पहले गुड़ या शीरा का लहन तैयार करते हैं। इसके बाद भट्ठी बनाकर उस पर ड्रम रखकर लहन भर देते हैं। शराब बनाने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली अन्य चीजें डालते हैं। इसके अलावा उसमें यूरिया का इस्तेमाल भी होता है। जल्दी उबालने के लिए कई बार उसमें चूना भी डाल दिया जाता है। यूरिया का इस्तेमाल शराब को तीव्र बनाने में करते हैं।
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होली पर शराब की डिमांड बढ़ते ही मिलावटखोर और कच्ची शराब का धंधा करने वाले बड़े पैमाने पर सक्रिय हैं। इन पर शिकंजा कसने के लिए आबकारी विभाग और पुलिस की ओर से अभियान भी चलाया जा रहा है। रविवार को पुलिस को सूचना मिली कि उझैनिया गांव में कुछ लोग ग्राम समाज की जगह पर यूरिया मिलाकर हानिकारक शराब तैयार कर रहे हैं। इसकी होली पर बिक्री की जानी है। इंस्पेक्टर मनीराम सिंह ने पुलिस बल के साथ उझैनिया गांव में छापा मारा तो वहां अवैध शराब की भट्ठी चलती मिली। पुलिस के पहुंचते ही शराब बनाने वाले भागने लगे। हालांकि पीछा कर पुलिस ने सभी पांच लोगों को धर दबोचा। पूछताछ में उन्होंने अपना नाम उझैनिया गांव निवासी प्रेमशंकर, प्रेम कुमार, जबर सिंह, वेदपाल और उमरसड़ गांव निवासी जागन लाल बताए। मौके से 104 लीटर शराब, पांच किग्रा यूरिया और उपकरण बरामद हुए हैं। आरोपियों ने बताया कि शराब में तीव्र नशा के लिए उसमें यूरिया मिला रहे थे। इंस्पेक्टर मनीराम सिंह ने बताया कि पकड़े गए आरोपियों पर आबकारी अधिनियम के तहत रिपोर्ट दर्ज की गई है। आरोपियों का चालान कर दिया है।
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नेपाल तक होती है कच्ची शराब की सप्लाई
जनपद में जंगल और नदी से सटे इलाकों में बड़े पैमाने पर कच्ची शराब बनाई जाती है। माधोटांडा और हजारा क्षेत्र में कच्ची शराब का अनाधिकृत धंधा बड़े पैमाने पर होता है। इस कारोबार में संलिप्त लोग कच्ची शराब तैयार कर उसे आसपास के जिलों में ही नहीं, बल्कि पड़ोसी देश नेपाल तक बिक्री करते हैं। माधोटांडा, कलीनगर, मझारा, कटकवारा, वीरखेड़ा समेत कई गांवों की पहचान ही कच्ची शराब के धंधे से है। इन गांवों में कच्ची शराब के कारोबारी जंगल का सहारा लेकर सिस्टम से साठगांठ कर अनाधिकृत कच्ची शराब के धंधे से बेखौफ पनप रहे हैं। जगह-जगह धधकती भट्ठियां इसकी गवाही देती हैं। पुलिस और आबकारी विभाग की ओर से साल भर औपचारिकतापूर्ण कार्रवाई की जाती है। अब होली पर शासन की सख्ती के बाद कार्रवाई की गई तो हकीकत खुलकर सामने आ रही है।
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पूरनपुर सर्किल में सर्वाधिक गांव
कच्ची शराब को लेकर कई इलाके चर्चित हैं। मगर सर्वाधिक कारोबार पूरनपुर सर्किल में होता है। वहीं पर सबसे अधिक गांव कच्ची शराब के लिए चिह्नित हैं। सिटी सर्किल में 55, सदर सर्किल मतें 65, बीसलपुर सर्किल में 82 और पूरनपुर में 136 गांव इसके लिए अलग पहचान रखते हैं।
ऐसे बनाते हैं यूरिया मिलाकर शराब
पहले गुड़ या शीरा का लहन तैयार करते हैं। इसके बाद भट्ठी बनाकर उस पर ड्रम रखकर लहन भर देते हैं। शराब बनाने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली अन्य चीजें डालते हैं। इसके अलावा उसमें यूरिया का इस्तेमाल भी होता है। जल्दी उबालने के लिए कई बार उसमें चूना भी डाल दिया जाता है। यूरिया का इस्तेमाल शराब को तीव्र बनाने में करते हैं।