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धान खरीद में खेल पर पांच लेखपाल निलंबित
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अमरिया (पीलीभीत)। धान खरीद में धांधली पर बिचौलियों पर कार्रवाई के बाद आरोपी लेखपालों पर गाज गिरना शुरू हो गई है। क्रय केंद्रों पर पहुंचने वाले किसानों के कागजों के सत्यापन में लापरवाही बरते वाले अमरिया तहसील के पांच लेखपालों को निलंबित कर दिया गया है। यह कार्रवाई तहसीलदार की जांच के बाद डीएम के निर्देश पर की गई है।
एक अक्तूबर 2020 से धान खरीद शुरू हुई थी। जिले में धान खरीद के साथ बिचौलिए सक्रिय हो गए थे। इन बिचौलियों ने कुछ अफसरों और कर्मचारियों से मिलकर धन खरीद में खूब धांधली की। जिले में धान खरीद का लक्ष्य 32.5 लाख क्विंटल था, जिसे पूरा कर लिया गया है। डीएम पुलकित खरे ने धान खरीद पारदर्शिता से संपन्न कराने के लिए केंद्रों पर लेखपालों लगाया था। उन्हें छोटे किसानों का धान क्रय केंद्र पर लाकर तौल कराने की जिम्मेदारी दी गई थी। इसके अलावा सौ क्विंटल से अधिक धान बेचने वालों के कागजों का सत्यापन गंभीरता से करने को कहा था। बावजूद इसके धान खरीद में खूब खेल किया गया। डीएम के निर्देश पर अधिकारियों ने सत्यापन कराया तो धांधली सामने आ गई। यानी जमीन किसी और के नाम पर दर्ज है और उसके नाम पर तौल किसी अन्य धानों की करा दी गई। खास बात यह रही कि जिन लोगों के पास जमीन नहीं है उनके भी पंजीकरण हो गए थे, और इसके बाद उनके नाम पर धान की तौल भी करा दी गई। इसका लेखपालों ने भी सत्यापन कर दिया।
धांधली का खुलासा होने पर बिचौलियों पर अमरिया, माधोटांडा, जहानाबाद थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। डीएम के निर्देश पर तहसीलदार जनार्धन ने मामले की जांच की। उनकी जांच में लेखपालों पर लगे आरोप सही पाए गए। इस पर सोमवार को अमरिया तहसील क्षेत्र के निसरा के लेखपाल अब्दुल मुकीज, अड़ौली गांव के लेखपाल दिनेश मिश्रा, उदयपुर के लेेखपाल गजेंद्रपाल सिंह, सुस्यार गांव के लेखपाल छत्रपाल और करगैना गांव के लेखपाल अनुराग गंगवार को निलंबित कर दिया गया। आरोप हैं कि इन लेखपालों ने बिचौलियों की ओर से कराए गए ऑनलाइन पंजीकरण में कागजात का सत्यापन गलत किया था। इसके चलते आसानी से जमीन न होने के बावजूद धान खरीद लिया गया था। एसडीएम अमरिया चंद्रभानु सिंह ने जांच रिपोर्ट डीएम को भेजी थी। डीएम के निर्देश पर पांचों लेखपालों को निलंबित कर दिया गया।
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धान खरीद को पारदर्शिता से कराने केनिर्देश दिए गए हैं। अब तक हो चुकी खरीद का सत्यापन कराया जा रहा है। कइयों पर गड़बड़ी मिलने पर रिपोर्ट दर्ज कराई जा चुकी है। अब तक जिन लेखपालों घपलेबाजी पाई गई उन्हें निलंबित किया गया है। - पुलकित खरे डीएम
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एक अक्तूबर 2020 से धान खरीद शुरू हुई थी। जिले में धान खरीद के साथ बिचौलिए सक्रिय हो गए थे। इन बिचौलियों ने कुछ अफसरों और कर्मचारियों से मिलकर धन खरीद में खूब धांधली की। जिले में धान खरीद का लक्ष्य 32.5 लाख क्विंटल था, जिसे पूरा कर लिया गया है। डीएम पुलकित खरे ने धान खरीद पारदर्शिता से संपन्न कराने के लिए केंद्रों पर लेखपालों लगाया था। उन्हें छोटे किसानों का धान क्रय केंद्र पर लाकर तौल कराने की जिम्मेदारी दी गई थी। इसके अलावा सौ क्विंटल से अधिक धान बेचने वालों के कागजों का सत्यापन गंभीरता से करने को कहा था। बावजूद इसके धान खरीद में खूब खेल किया गया। डीएम के निर्देश पर अधिकारियों ने सत्यापन कराया तो धांधली सामने आ गई। यानी जमीन किसी और के नाम पर दर्ज है और उसके नाम पर तौल किसी अन्य धानों की करा दी गई। खास बात यह रही कि जिन लोगों के पास जमीन नहीं है उनके भी पंजीकरण हो गए थे, और इसके बाद उनके नाम पर धान की तौल भी करा दी गई। इसका लेखपालों ने भी सत्यापन कर दिया।
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धांधली का खुलासा होने पर बिचौलियों पर अमरिया, माधोटांडा, जहानाबाद थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। डीएम के निर्देश पर तहसीलदार जनार्धन ने मामले की जांच की। उनकी जांच में लेखपालों पर लगे आरोप सही पाए गए। इस पर सोमवार को अमरिया तहसील क्षेत्र के निसरा के लेखपाल अब्दुल मुकीज, अड़ौली गांव के लेखपाल दिनेश मिश्रा, उदयपुर के लेेखपाल गजेंद्रपाल सिंह, सुस्यार गांव के लेखपाल छत्रपाल और करगैना गांव के लेखपाल अनुराग गंगवार को निलंबित कर दिया गया। आरोप हैं कि इन लेखपालों ने बिचौलियों की ओर से कराए गए ऑनलाइन पंजीकरण में कागजात का सत्यापन गलत किया था। इसके चलते आसानी से जमीन न होने के बावजूद धान खरीद लिया गया था। एसडीएम अमरिया चंद्रभानु सिंह ने जांच रिपोर्ट डीएम को भेजी थी। डीएम के निर्देश पर पांचों लेखपालों को निलंबित कर दिया गया।
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धान खरीद को पारदर्शिता से कराने केनिर्देश दिए गए हैं। अब तक हो चुकी खरीद का सत्यापन कराया जा रहा है। कइयों पर गड़बड़ी मिलने पर रिपोर्ट दर्ज कराई जा चुकी है। अब तक जिन लेखपालों घपलेबाजी पाई गई उन्हें निलंबित किया गया है। - पुलकित खरे डीएम