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Pilibhit News: कागजों में खूब खरीदा धान... 70 फीसदी पूरा हुआ लक्ष्य
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मंडी समिति में धान खरीद सेंटर । फाइल फोटो
पीलीभीत। धान खरीद के मामले में आखिरकार आंकड़ेबाजी में खाद्य विभाग ने बाजी मार ली। धान खरीद केंद्र भले ही सूने पड़े रहे हों लेकिन कागजों में जमकर खरीद हुई। इस तरह विभाग ने 30 जनवरी तक 161 केंद्रों पर तीन लाख मीट्रिक टन के सापेक्ष 2.13 लाख मीट्रिक टन धान खरीद कर करीब 70 फीसदी लक्ष्य प्राप्त करने का दावा किया।
जिले में पहली अक्तूबर से धान खरीद शुरू हुई। इसके लिए 161 क्रय केंद्र खोले गए। केंद्रों पर शुरुआती करीब एक माह तक खरीद अपनी रफ्तार पर नहीं आ सकी। कुछ ही केंद्रों पर खरीद शुरू हो सकी। धान की खरीद का महीना नवंबर रहता है। फसल काटने के बाद किसान उसे सीधे केंद्रों पर लेकर आते हैं।
नवंबर तक जिले में तय लक्ष्य के सापेक्ष महज दस प्रतिशत ही खरीद हो सकी। इससे लग रहा था कि इस बार खरीद 20 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकेगी। यह हालत तब थी जब नवंबर माह में मंडी में धान की आवक काफी अच्छी थी। नवंबर के बाद मंडी में भी धान की आवक लगभग समाप्त होने लगी। इसके बाद धान खरीद का लक्ष्य बढ़ाने में अधिकारी इस कदर जुटे की जादू ही कर दिया।
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केंद्रों पर धान की आवक न होने के बाद भी खरीद ऐसी बढ़ी की दिसंबर में आंकड़ा 50 प्रतिशत से ऊपर निकल गया। हर कोई हैरान था कि आखिर धान कहां आ रहा है और कहां जा रहा है। धान माफिया और अधिकारियों का गठजोड़ साफ दिखा। इसके बाद जनवरी में भी केंद्रों पर धान और किसान न होने पर भी खरीद की गई।
अब जब खरीद का एक दिन शेष बचा है तो जिले में सरकारी खरीद का आंकड़ा 70 प्रतिशत से अधिक पहुंच गया है। अब तक जिले में 2.13 लाख मीट्रिक टन धान की खरीद हो चुकी है।
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जबरदस्त कोहरे और ठंड में आड़े नहीं आई नमी
अक्तूबर, नवंबर माह में जब किसान धान को क्रय केंद्रों पर लाते हैं तब उन्हें नमी बताकर लौटा दिया जाता है। जबकि दिसंबर व जनवरी में जबरदस्त कोहरा पड़ा। ऐसे में धान में नमी लाजिमी थी ऐसे में जमकर खरीद दिखाई गई। किसान नेताओं का कहना है कि आढ़त पर राइस मिलाें के दलाल बैठाकर धान को पहले ही राइस मिलों में पहुंचा दिया गया। इसके बाद सरकारी खरीद का अमलीजामा पहनाने को बाद में बुलाकर अंगूठे लगवा लिए गए।
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यह एजेंसी रहीं खरीद में शामिल
खाद्य विभाग, पीसीएफ, यूपीएसएस, पीसीयू, मंडी समिति और भारतीय खाद्य निगम।
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जिले में 161 क्रय केंद्रों पर 70 फीसदी से अधिक धान की खरीद की गई है। 31 जनवरी को जिले में सरकारी धान खरीद समाप्त हो जाएगी। अब चावल की रिकवरी को लेकर जोर दिया जा रहा है।
- वीके शुक्ला, डिप्टी आरएमओ
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जिले में पहली अक्तूबर से धान खरीद शुरू हुई। इसके लिए 161 क्रय केंद्र खोले गए। केंद्रों पर शुरुआती करीब एक माह तक खरीद अपनी रफ्तार पर नहीं आ सकी। कुछ ही केंद्रों पर खरीद शुरू हो सकी। धान की खरीद का महीना नवंबर रहता है। फसल काटने के बाद किसान उसे सीधे केंद्रों पर लेकर आते हैं।
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नवंबर तक जिले में तय लक्ष्य के सापेक्ष महज दस प्रतिशत ही खरीद हो सकी। इससे लग रहा था कि इस बार खरीद 20 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकेगी। यह हालत तब थी जब नवंबर माह में मंडी में धान की आवक काफी अच्छी थी। नवंबर के बाद मंडी में भी धान की आवक लगभग समाप्त होने लगी। इसके बाद धान खरीद का लक्ष्य बढ़ाने में अधिकारी इस कदर जुटे की जादू ही कर दिया।
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केंद्रों पर धान की आवक न होने के बाद भी खरीद ऐसी बढ़ी की दिसंबर में आंकड़ा 50 प्रतिशत से ऊपर निकल गया। हर कोई हैरान था कि आखिर धान कहां आ रहा है और कहां जा रहा है। धान माफिया और अधिकारियों का गठजोड़ साफ दिखा। इसके बाद जनवरी में भी केंद्रों पर धान और किसान न होने पर भी खरीद की गई।
अब जब खरीद का एक दिन शेष बचा है तो जिले में सरकारी खरीद का आंकड़ा 70 प्रतिशत से अधिक पहुंच गया है। अब तक जिले में 2.13 लाख मीट्रिक टन धान की खरीद हो चुकी है।
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जबरदस्त कोहरे और ठंड में आड़े नहीं आई नमी
अक्तूबर, नवंबर माह में जब किसान धान को क्रय केंद्रों पर लाते हैं तब उन्हें नमी बताकर लौटा दिया जाता है। जबकि दिसंबर व जनवरी में जबरदस्त कोहरा पड़ा। ऐसे में धान में नमी लाजिमी थी ऐसे में जमकर खरीद दिखाई गई। किसान नेताओं का कहना है कि आढ़त पर राइस मिलाें के दलाल बैठाकर धान को पहले ही राइस मिलों में पहुंचा दिया गया। इसके बाद सरकारी खरीद का अमलीजामा पहनाने को बाद में बुलाकर अंगूठे लगवा लिए गए।
यह एजेंसी रहीं खरीद में शामिल
खाद्य विभाग, पीसीएफ, यूपीएसएस, पीसीयू, मंडी समिति और भारतीय खाद्य निगम।
जिले में 161 क्रय केंद्रों पर 70 फीसदी से अधिक धान की खरीद की गई है। 31 जनवरी को जिले में सरकारी धान खरीद समाप्त हो जाएगी। अब चावल की रिकवरी को लेकर जोर दिया जा रहा है।
- वीके शुक्ला, डिप्टी आरएमओ