{"_id":"122-61460","slug":"Pilibhit-61460-122","type":"story","status":"publish","title_hn":"चार साल में ‘इतिहास’ बन गया वरुण गांधी का केस","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
चार साल में ‘इतिहास’ बन गया वरुण गांधी का केस
Pilibhit
Updated Thu, 28 Feb 2013 05:31 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पीलीभीत। सांसद और भाजपा के राष्ट्रीय सचिव वरुण गांधी पर चल रहे भड़काऊ भाषण और आचार संहिता उल्लंघन के एक मामले में वरुण गांधी बाइज्जत बरी हो गए हैं। हालांकि यह मामला इन चार सालों में इतिहास बन चुका है।
वर्ष 2009 में प्रदेश सरकार ने वरुण गांधी के जेल जाते ही 28 मार्च की रात को ही उन पर रासुका लगाने का तानाबाना बुनना शुरू कर दिया। 29 मार्च की देर रात रविवार का सार्वजनिक अवकाश होने के बावजूद उन पर रासुका लगा दी गई। हो-हल्ला मचने पर दो दिन बाद ही उन्हें एटा जेल भेज दिया गया। पहली बार रासुका को वरुण गांधी के मामले में सीधे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई। मामले की सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि रासुका की कार्रवाई गलत हुई है और रासुका समाप्त करते हुए वरुण की रिहाई का आदेश दिया। कानूनी जानकारों के मुताबिक समूचे प्रदेश का यह पहला मामला है, जब रासुका को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देकर पखवारे भर के अंदर ही किसी की रिहाई हुई हो। बाद में एडवाइजरी बोर्ड ने भी रासुका हटा दी थी। इसी तरह जब वरुण ने कोर्ट में सरेंडर किया था तो पीलीभीत में ऐतिहासिक भीड़ जुटी थी। कुल मिलाकर यह मामला बुधवार को सांसद के बाइज्जत बरी होने तक इतिहास बन गया है।
वरुण बोले, न्यायपालिका से मिला न्याय
न्यायालय से दोष मुक्त होने के बाद वरुण गांधी कोर्ट से निकलते ही मीडिया से मुखातिब हुए और उन्होंने कहा कि न्यायपालिका से उन्हें न्याय मिला है। उन्हें झूंठा फंसाया गया था। न्यायालय के निर्णय से यह साफ हो गया है कि पिछली सरकार ने उनके ऊपर बदले की भावना से कार्रवाई कराई थी। वह हमेशा विकास और राष्ट्र हित की बात की है और पीलीभीत की जनता के दु:ख दर्द में हमेशा साथ रहेंगे।
विज्ञापन
एफआईआर और दोषमुक्त में ‘बुध’ का संयोग
यह एक संयोग ही है कि जब सांसद वरुण गांधी पर 18 मार्च 2009 को इस मामले की एफआईआर दर्ज की गई थी, तब बुधवार था और आज जब वह बाइज्जत बरी हुए हैं तब भी बुधवार ही है।
28 मार्च 2009 को कचहरी में जुटी थी ऐतिहासिक भीड़
वरुण आए थे सरेंडर करने
पीलीभीत। लोकसभा चुनाव के दौरान मुकदमे दर्ज होते ही वरुण गांधी ने कोर्ट में सरेंडर करने का मन बनाया। 28 मार्च 2009 को उनके सरेंडर की भनक लगते ही कचहरी और उसके आसपास ऐतिहासिक भीड़ उमड़ पड़ी। वरुण गांधी हजारों समर्थकों के साथ खुली गाड़ी से कचहरी पहुंचे। टीवी चैनलों पर उस समय वरुण गांधी की खबरें जोरशोर से प्रसारित हो रहीं थीं। 28 मार्च 2009 को कोतवाली और बरखेड़ा के मुकदमों में भाजपा प्रत्याशी वरुण गांधी ने सरेंडर करने का मन बनाया। जिले की सीमाओं से ही उनके समर्थक सुबह से ही जुटना शुरू हो गए। वरुण दिल् ली से चलकर शहर पहुंचे। नकटादाना चौराहे से एक खुले वाहन में कचहरी पहुंचने में उन्हें घंटों लग गए। कचहरी परिसर और नकटादाना चौराहे से ही पुलिस की नाकेबंदी के बावजूद उनके हजारों समर्थक जुटे थे। कोर्ट में सरेंडर के बाद उन्हें जेल ले जाने में पुलिस के पसीने छूट गए। कचहरी से 200 मीटर दूर जेल तक छोड़ने में पुलिस को दो घंटे से ज्यादा लग गए। पुलिस ने समर्थकों पर आंसू गैस के गोले चलाए। भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और तत्कालीन राज्य सभा सदस्य कलराज मिश्र सुबह से ही कचहरी परिसर में सरेंडर के दिन जमे रहे थे। उनके साथ भाजपा के प्रदेश स्तर के अन्य दर्जनों नेता भी आए थे। यहां वकालत कर रहे कई वरिष्ठ अधिवक्ताओं और बुजुर्ग वादकारियों का कहना है कि वरुण के सरेंडर के दिन जैसी ऐतिहासिक भीड़ जुटी वैसी भीड़ उन्होंने अपने जीवन में नहीं देखी। 30 मार्च 2009 को वरुण की जमानत अर्जी पर सुनवाई थी। उस दिन भी पुलिस और प्रशासन की नाकेबंदी के बावजूद काफी लोग कचहरी पहुंचे थे।
पुलिस की फर्जी कार्रवाई हुई उजागर : रामसरन
पीलीभीत। प्रदेश के पूर्व मंत्री और बीसलपुर के भाजपा विधायक रामसरन वर्मा ने वरुण गांधी की दोष मुक्ति पर हर्ष व्यक्त किया है। उन्होंने कहा है कि न्यायालय के निर्णय से यह साफ हो गया है कि शासन और प्रशासन ने फर्जी मुकदमे दर्ज किए थे। पुलिस की फर्जी कार्रवाई जगजाहिर हो गई है और वरुण गांधी को न्याय मिला है।
कलराज मिश्र पर भी हुआ केस
पीलीभीत। वरुण गांधी ने कोर्ट में सरेंडर क्या किया उस दिन कई बातों ने इतिहास रचा। कचहरी पहुंचे भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष कलराज मिश्र और पूर्व विधायक बीके गुप्ता पर भी पुलिस ने शिकंजा कस दिया। 28 मार्च 2009 को इन दोनों नेताओं के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज कर लिया। बाद में आरोप पत्र भी न्यायालय भेज दिया। कलराज मिश्र और बीके गुप्ता के खिलाफ कोर्ट में मुकदमा अब भी विचाराधीन है। यह दीगर है कि वरुण गांधी दो मुकदमों में दोषमुक्त हो गए हैं।
00
वरुण गांधी प्रकरण : कब क्या हुआ
08 मार्च 09: बरखेड़ा में कथित भड़काऊ भाषण।
17 मार्च: बरखेड़ा में आचार संहिता उल्लंघन और कथित भड़काऊ भाषण मामले में रिपोर्ट दर्ज। (अब सुनवाई पहली मार्च को)
18 मार्च: शहर के मोहल्ला डालचंद में कथित भड़काऊ भाषण और आचार संहिता उल्लंघन मामले में कोतवाली सदर में रिपोर्ट दर्ज। (मामले में दोषमुक्त)
28 मार्च: दोनों मामलों में कोर्ट में सरेंडर और जेल भेजे गए।
28 मार्च को कोतवाली सदर में जेल पर हमला, कर्मचारियों पर जानलेवा हमले की रिपोर्ट दर्ज
29 मार्च 09: रासुका में निरुद्ध किया।
30 मार्च: बरखेड़ा और कोतवाली में पूर्व में दर्ज मामलों में जमानत।
31 मार्च 09: आधी रात को एटा जेल स्थानांतरित किए गए।
08 अप्रैल 09 : कोर्ट में जमानती दाखिल।
08 अप्रैल: सुप्रीम कोर्ट में रासुका को चुनौती की याचिका दायर।
16 अप्रैल: सुप्रीम कोर्ट ने एक मई तक का पैरोल दिया। इसी दिन एटा जेल से रिहा।
22 अप्रैल 09 : मां मेनका गांधी की मौजूदगी में पीलीभीत संसदीय सीट से भाजपा के टिकट पर नामांकन कराया।
28 अप्रैल 09: मौसी अंबिका शुक्ला के साथ लखनऊ में रासुका एडबाइजरी कमेटी के समझ पेश होकर रासुका को गलत ठहराया।
1 मई 09 : सुप्रीम कोर्ट ने पैरोल की अवधि 14 मई तक बढ़ाई।
6 मई 09: शासन ने रासुका समाप्त कर दी।
22 जून फारेंसिक जांच में सीडी असली निकली। छेड़छाड़ की पुष्टि नहीं हुई।
-01 जुलाई 2009 को वीएम सिंह ने वरुण गांधी का निर्वाचन निरस्त करने और मेनका गांधी को चुनाव लड़ने के अयोग्य ठहराने के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की।
-15 जुलाई 2009 को वरुण गांधी के खिलाफ दर्ज दो मुकदमों में से बरखेड़ा थाने में दर्ज मुकदमे की चार्जशीट सीजेएम कोर्ट में दाखिल कर दी गई।
विज्ञापन
वर्ष 2009 में प्रदेश सरकार ने वरुण गांधी के जेल जाते ही 28 मार्च की रात को ही उन पर रासुका लगाने का तानाबाना बुनना शुरू कर दिया। 29 मार्च की देर रात रविवार का सार्वजनिक अवकाश होने के बावजूद उन पर रासुका लगा दी गई। हो-हल्ला मचने पर दो दिन बाद ही उन्हें एटा जेल भेज दिया गया। पहली बार रासुका को वरुण गांधी के मामले में सीधे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई। मामले की सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि रासुका की कार्रवाई गलत हुई है और रासुका समाप्त करते हुए वरुण की रिहाई का आदेश दिया। कानूनी जानकारों के मुताबिक समूचे प्रदेश का यह पहला मामला है, जब रासुका को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देकर पखवारे भर के अंदर ही किसी की रिहाई हुई हो। बाद में एडवाइजरी बोर्ड ने भी रासुका हटा दी थी। इसी तरह जब वरुण ने कोर्ट में सरेंडर किया था तो पीलीभीत में ऐतिहासिक भीड़ जुटी थी। कुल मिलाकर यह मामला बुधवार को सांसद के बाइज्जत बरी होने तक इतिहास बन गया है।
विज्ञापन
वरुण बोले, न्यायपालिका से मिला न्याय
न्यायालय से दोष मुक्त होने के बाद वरुण गांधी कोर्ट से निकलते ही मीडिया से मुखातिब हुए और उन्होंने कहा कि न्यायपालिका से उन्हें न्याय मिला है। उन्हें झूंठा फंसाया गया था। न्यायालय के निर्णय से यह साफ हो गया है कि पिछली सरकार ने उनके ऊपर बदले की भावना से कार्रवाई कराई थी। वह हमेशा विकास और राष्ट्र हित की बात की है और पीलीभीत की जनता के दु:ख दर्द में हमेशा साथ रहेंगे।
विज्ञापन
एफआईआर और दोषमुक्त में ‘बुध’ का संयोग
यह एक संयोग ही है कि जब सांसद वरुण गांधी पर 18 मार्च 2009 को इस मामले की एफआईआर दर्ज की गई थी, तब बुधवार था और आज जब वह बाइज्जत बरी हुए हैं तब भी बुधवार ही है।
28 मार्च 2009 को कचहरी में जुटी थी ऐतिहासिक भीड़
वरुण आए थे सरेंडर करने
पीलीभीत। लोकसभा चुनाव के दौरान मुकदमे दर्ज होते ही वरुण गांधी ने कोर्ट में सरेंडर करने का मन बनाया। 28 मार्च 2009 को उनके सरेंडर की भनक लगते ही कचहरी और उसके आसपास ऐतिहासिक भीड़ उमड़ पड़ी। वरुण गांधी हजारों समर्थकों के साथ खुली गाड़ी से कचहरी पहुंचे। टीवी चैनलों पर उस समय वरुण गांधी की खबरें जोरशोर से प्रसारित हो रहीं थीं। 28 मार्च 2009 को कोतवाली और बरखेड़ा के मुकदमों में भाजपा प्रत्याशी वरुण गांधी ने सरेंडर करने का मन बनाया। जिले की सीमाओं से ही उनके समर्थक सुबह से ही जुटना शुरू हो गए। वरुण दिल् ली से चलकर शहर पहुंचे। नकटादाना चौराहे से एक खुले वाहन में कचहरी पहुंचने में उन्हें घंटों लग गए। कचहरी परिसर और नकटादाना चौराहे से ही पुलिस की नाकेबंदी के बावजूद उनके हजारों समर्थक जुटे थे। कोर्ट में सरेंडर के बाद उन्हें जेल ले जाने में पुलिस के पसीने छूट गए। कचहरी से 200 मीटर दूर जेल तक छोड़ने में पुलिस को दो घंटे से ज्यादा लग गए। पुलिस ने समर्थकों पर आंसू गैस के गोले चलाए। भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और तत्कालीन राज्य सभा सदस्य कलराज मिश्र सुबह से ही कचहरी परिसर में सरेंडर के दिन जमे रहे थे। उनके साथ भाजपा के प्रदेश स्तर के अन्य दर्जनों नेता भी आए थे। यहां वकालत कर रहे कई वरिष्ठ अधिवक्ताओं और बुजुर्ग वादकारियों का कहना है कि वरुण के सरेंडर के दिन जैसी ऐतिहासिक भीड़ जुटी वैसी भीड़ उन्होंने अपने जीवन में नहीं देखी। 30 मार्च 2009 को वरुण की जमानत अर्जी पर सुनवाई थी। उस दिन भी पुलिस और प्रशासन की नाकेबंदी के बावजूद काफी लोग कचहरी पहुंचे थे।
पुलिस की फर्जी कार्रवाई हुई उजागर : रामसरन
पीलीभीत। प्रदेश के पूर्व मंत्री और बीसलपुर के भाजपा विधायक रामसरन वर्मा ने वरुण गांधी की दोष मुक्ति पर हर्ष व्यक्त किया है। उन्होंने कहा है कि न्यायालय के निर्णय से यह साफ हो गया है कि शासन और प्रशासन ने फर्जी मुकदमे दर्ज किए थे। पुलिस की फर्जी कार्रवाई जगजाहिर हो गई है और वरुण गांधी को न्याय मिला है।
कलराज मिश्र पर भी हुआ केस
पीलीभीत। वरुण गांधी ने कोर्ट में सरेंडर क्या किया उस दिन कई बातों ने इतिहास रचा। कचहरी पहुंचे भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष कलराज मिश्र और पूर्व विधायक बीके गुप्ता पर भी पुलिस ने शिकंजा कस दिया। 28 मार्च 2009 को इन दोनों नेताओं के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज कर लिया। बाद में आरोप पत्र भी न्यायालय भेज दिया। कलराज मिश्र और बीके गुप्ता के खिलाफ कोर्ट में मुकदमा अब भी विचाराधीन है। यह दीगर है कि वरुण गांधी दो मुकदमों में दोषमुक्त हो गए हैं।
00
वरुण गांधी प्रकरण : कब क्या हुआ
08 मार्च 09: बरखेड़ा में कथित भड़काऊ भाषण।
17 मार्च: बरखेड़ा में आचार संहिता उल्लंघन और कथित भड़काऊ भाषण मामले में रिपोर्ट दर्ज। (अब सुनवाई पहली मार्च को)
18 मार्च: शहर के मोहल्ला डालचंद में कथित भड़काऊ भाषण और आचार संहिता उल्लंघन मामले में कोतवाली सदर में रिपोर्ट दर्ज। (मामले में दोषमुक्त)
28 मार्च: दोनों मामलों में कोर्ट में सरेंडर और जेल भेजे गए।
28 मार्च को कोतवाली सदर में जेल पर हमला, कर्मचारियों पर जानलेवा हमले की रिपोर्ट दर्ज
29 मार्च 09: रासुका में निरुद्ध किया।
30 मार्च: बरखेड़ा और कोतवाली में पूर्व में दर्ज मामलों में जमानत।
31 मार्च 09: आधी रात को एटा जेल स्थानांतरित किए गए।
08 अप्रैल 09 : कोर्ट में जमानती दाखिल।
08 अप्रैल: सुप्रीम कोर्ट में रासुका को चुनौती की याचिका दायर।
16 अप्रैल: सुप्रीम कोर्ट ने एक मई तक का पैरोल दिया। इसी दिन एटा जेल से रिहा।
22 अप्रैल 09 : मां मेनका गांधी की मौजूदगी में पीलीभीत संसदीय सीट से भाजपा के टिकट पर नामांकन कराया।
28 अप्रैल 09: मौसी अंबिका शुक्ला के साथ लखनऊ में रासुका एडबाइजरी कमेटी के समझ पेश होकर रासुका को गलत ठहराया।
1 मई 09 : सुप्रीम कोर्ट ने पैरोल की अवधि 14 मई तक बढ़ाई।
6 मई 09: शासन ने रासुका समाप्त कर दी।
22 जून फारेंसिक जांच में सीडी असली निकली। छेड़छाड़ की पुष्टि नहीं हुई।
-01 जुलाई 2009 को वीएम सिंह ने वरुण गांधी का निर्वाचन निरस्त करने और मेनका गांधी को चुनाव लड़ने के अयोग्य ठहराने के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की।
-15 जुलाई 2009 को वरुण गांधी के खिलाफ दर्ज दो मुकदमों में से बरखेड़ा थाने में दर्ज मुकदमे की चार्जशीट सीजेएम कोर्ट में दाखिल कर दी गई।