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वाटर कूलर की तरह निकलेगा मटके से पानी
Pilibhit
Updated Mon, 14 May 2012 12:00 PM IST
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पीलीभीत। भीषण गर्मी से राहत पाने को ठंडे पानी से भला कौन इंकार कर सकता है। पानी अगर मटके का हो तो बात ही निराली है। फ्रिज से वंचित लोगों के लिए मटके का पानी ही गर्मी से राहत दिलाने का अच्छा साधन माना जाता है। आधुनिकता का बोलबाला अब मटकों पर भी नजर आने लगा है। लोग टोंटी युक्त मटके अधिक पसंद कर रहे हैं।
मटके के पानी को यूं ही पसंद नहीं किया जाता। इस पानी में ठंडक के साथ ही सोंधापन और शुद्धता अधिक पाई जाती है। कई लोग फ्रिज होते हुए भी मटके का इस्तेमाल करते हैं। कुछ लोग सुराही पसंद करते हैं। वजह यह कि सुराही से पानी लेना मटके के मुकाबले अधिक आसान होता है, लेकिन सुराही बहुत अधिक समय तक पानी को ठंडा नहीं रख पाती। इसलिए लोगों का ध्यान मटके पर अधिक रहता है। ग्राहकों की मंशा भांप कुम्हारों ने भी दिमाग लगाकर मटके को नए लुक में पेश किया है। वाटर कूलर में लगने वाली टोंटी को मटके में फिट करने से मटके की बिक्री भी काफी बढ़ गई है और इसकी कीमत भी।
मटका बनाने वाले राज कुमार का कहना है कि पहले मटके कम बिक पाते थे और सुराही की मांग अधिक रहती थी। इसलिए सुराही के कारीगर भी मंहगे हो गए हैं। लोग सुराही की लागत देने में आना कानी करते हैं। इससे बचने के लिए मटके में नई तकनीक अपनाने की कोशिश की। सफलता मिली तो बाजार में उतार दिए। उनका कहना है कि पहले की अपेक्षा मटके की बिक्री में काफी बढ़ोत्तरी हुई है।
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मटके के पानी को यूं ही पसंद नहीं किया जाता। इस पानी में ठंडक के साथ ही सोंधापन और शुद्धता अधिक पाई जाती है। कई लोग फ्रिज होते हुए भी मटके का इस्तेमाल करते हैं। कुछ लोग सुराही पसंद करते हैं। वजह यह कि सुराही से पानी लेना मटके के मुकाबले अधिक आसान होता है, लेकिन सुराही बहुत अधिक समय तक पानी को ठंडा नहीं रख पाती। इसलिए लोगों का ध्यान मटके पर अधिक रहता है। ग्राहकों की मंशा भांप कुम्हारों ने भी दिमाग लगाकर मटके को नए लुक में पेश किया है। वाटर कूलर में लगने वाली टोंटी को मटके में फिट करने से मटके की बिक्री भी काफी बढ़ गई है और इसकी कीमत भी।
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मटका बनाने वाले राज कुमार का कहना है कि पहले मटके कम बिक पाते थे और सुराही की मांग अधिक रहती थी। इसलिए सुराही के कारीगर भी मंहगे हो गए हैं। लोग सुराही की लागत देने में आना कानी करते हैं। इससे बचने के लिए मटके में नई तकनीक अपनाने की कोशिश की। सफलता मिली तो बाजार में उतार दिए। उनका कहना है कि पहले की अपेक्षा मटके की बिक्री में काफी बढ़ोत्तरी हुई है।
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