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बेमतलब साबित हो रहीं हैं सहकारी समितियां

Mon, 14 May 2012 12:00 PM IST
Pilibhit
Pilibhit Updated Mon, 14 May 2012 12:00 PM IST
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पीलीभीत। जिले में किसानों की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ बनाने के लिए 76 साधन सहकारी समितियां संचालित हो रही हैं। इनमें से अधिकांश समितियां मात्र दिखावा साबित हो रही हैं। मानीटरिंग के अभाव में समितियों का लेखाजोखा तक पर्याप्त रूप से तैयार नहीं है। जिससे किसानों के हित में समितियों के योगदान की मूल भावना प्रभावित हो रही है। इन समितियों के जुड़े करीब 1.25 लाख किसानों को अपेक्षित लाभ नहीं मिल रहा है।
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वैद्यनाथन कमेटी की सिफारिशों पर सहकारी समितियों की कार्यप्रणाली में सुधार के प्रयास शुरु किए गए हैं। इस क्रम में नाबार्ड ने ऑडिट करवा चुकी समितियों को आर्थिक मजबूती प्रदान करने की योजना है। मकसद यह है कि किसानों को उनकी जरूरत के मुताबिक समितियां समय से ऋण उपलब्ध करवा सकें। ऋण सीमा बढ़ाने का भी प्रावधान किया गया है। आडिट के दौरान सामने आ रहा है कि न तो किसानों की ऋण सीमा बढ़ाई जा रही है और न ही प्रबंधकीय सूचना प्रणाली (एमआईएस) तैयार की जा रही हैं। जिससे समन्वय नहीं बन रहा है।
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केस-1
जमुनिया महुआ साधन सहकारी समिति का संचालन दियोरिया कलां में किया जा रहा है। शुक्रवार को इस समिति का आडिट करने पहुंचे नाबार्ड के एजीएम अनिल कुमार रावत को समिति सचिव संजीव कुमार कोई भी दस्तावेज उपलब्ध नहीं करवा सके। सचिव ने मौखिक रूप से उन्हें बताया कि समिति से 1300 किसान जुड़े हैं। इनमें से करीब 600 सदस्य लेनदेन करते हैं।
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केस-2
पूर्व में रूद्रपुर साधन सहकारी समिति पूरनपुर के अभिलेख परीक्षण में भी तमाम खामियां मिली थीं। समिति सचिव श्री रावत को समिति का जनरल लेजर, डे बुक और कैश बुक नहीं दिखा सके थे। यह दस्तावेज ऑडिटर के घर पर खटीमा में होना बताए गए थे। समिति की व्यवसायिक विकास योजना नहीं बनी थी। न ही नो ड्यूज का कोई ब्योरा मिला था।
केस-3
शाही समिति में वैद्यनाथन कमेटी की सिफारिश पर मिली 13.42 लाख रुपए की धनराशि का लेजर में कोई उल्लेख ही नहीं मिला था। इस धनराशि की इंट्री सिर्फ कैशबुक में की गई थी। शाही समिति का आडिट 2007 के बाद हुआ ही नहीं था। ऐमी समिति के सचिव गायब मिले थे। मौजूद कर्मचारी के अनुसार दस्तावेज काम पूरा करने के लिए घर ले जाए गए थे।

बाक्स
मामला संज्ञान में नहीं, दिखवाएंगे
जिला सहकारी बैंक के सचिव आरके धवन से इस बाबत बात की गई तो उन्होंने हैरानी जताते हुए कहा कि समितियों के दस्तावेज समिति कार्यालय में मिलने चाहिए। मामला उनके संज्ञान में नहीं है। यदि ऐसा हो रहा है तो गलत है। इसे दिखवाएंगे।
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