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..अब शहर के करीब बाघ ने दी दस्तक
पीलीभीत।
Updated Thu, 01 Nov 2018 06:01 PM IST
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tiger pugmark
- फोटो : amar ujala
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चंदोई गांव के पूर्वी दिशा में देवहा नदी पर मछली मारने पहुंचे ग्रामीण ने लगाई दौड़
वन विभाग ने पगचिह्न ट्रेस किए, हफ्ताभर से जारी है बाघ की चहलकदमी
जंगल से सटे इलाकों में बाघ की चहलकदमी जारी रहने के बीच अब शहर से सटे क्षेत्र में भी बाघ की दस्तक से दहशत है। चंदोई गांव निवासी ग्रामीण के उस समय पसीने छूट गए जब वह गांव के पूर्वी दिशा में मछली मारने के लिए देवहा नदी पर पहुंचा। वहां उसने गन्ने के खेत से बाघ को निकलते देखा। डर से सहमे ग्रामीण ने जान बचाने को दौड़ लगा दी। ग्रामीणों की सूचना पर पहुंचे वनकर्मियों ने जानकारी जुटाकर बाघ के पगचिह्न ट्रेस किए हैं। हालांकि वन विभाग के अधिकारी इसे पांच दिन पुराना बताकर टालने में लगे हुए हैं।
टाइगर रिजर्व के दूर आबादी क्षेत्र में घूम रहे बाघ की दहशत कई इलाकों में कायम है। अमरिया तहसील क्षेत्र तो बाघ के कुनबे का प्रवास स्थल बना हुआ है। बाघ की रोकथाम करने को वन विभाग की ओर से किए जा रहे दावे मात्र जागरूक करने तक सीमित रह गए हैं। वहीं बाघ की सक्रियता जंगल सीमा से सटे इलाकों के साथ शहर की ओर भी बढ़ने लगी है। शहर से सटे चंदोई के ग्रामीणों की माने तो आबादी के निकट सप्ताहभर पूर्व से बाघ की चहलकदमी देखी जा रही है। चंदोई निवासी वहीद मियां गुरुवार तड़के गांव की पूर्वी दिशा में देवहा नदी पर मछली मारने के लिए निकले। वहीद के मुताबिक कुछ दूरी पर गन्ने के खेत की ओर बाघ की चहलकदमी दिखाई देने से उसके पसीने छूट गए। डर के चलते आननफानन में जान बचाने को उसने गांव की ओर दौड़ लगाकर जानकारी ग्रामीणों को दी। सूचना के बाद गांव मे हड़कंप मच गया। शहर निवासी सैय्यद जकी की सूचना पर सामाजिक वानिकी के वनकर्मी मौके पर पहुंच गए। वन रक्षक अंकित कुमार ने ग्रामीणों से जानकारी जुटाकर बाघ के पगचिह्न ट्रेस कर रिपोर्ट तैयार की। वन विभाग के अधिकारियों की मानें तो पगचिह्न पांच दिन पुराने हैं और हाल फिलहाल में बाघ वहां नहीं है।
कुछ देर देखने पर पता लगा बाघ है
भले ही बाघ देख दौड़ लगाकर वहीद ने जान बचा ली हो, लेकिन बाघ की दहशत उसके चेहरे पर साफ दिखाई दे रही है। दिल से बाघ का खौफ पूरी तरह खत्म नहीं हो सका है। वहीद के मुताबिक बाघ से उसकी दूरी मात्र 50 मीटर रह गई थी। सुबह तड़के नदी किनारे कोहरा होने के चलते बाघ को पहचाने में करीब दो मिनट लग गए। बाघ के अंगड़ाई लेते ही जान बचाने को उसने गांव की ओर दौड़ा लगा दी।
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ग्रामीणों ने की कैमरे लगाने की मांग
शहर से सटे चंदोई गांव तक बाघ की लगातार मौजूदगी देखी जा रही है। गुरुवार को बाघ की चहलकदमी के बाद क्षेत्रीय लोगों में दहशत का माहौल है। वहीं देवहा नदी से सटे क्षेत्र में किसानों की गन्ने की फसलें भी खड़ी हैं। शहर निवासी सैय्यद जकी, खालिद हसन समेत अन्य ने लोगों बाघ की लगातार चहलकदमी को देखते हुए कैमरे की सहायता से निगरानी करने के मांग की है।
चंदोई गांव के निकट देवहा नदी के समीप बाघ के पगचिह्न मिले हैं। हालांकि वह करीब पांच दिन पुराने हैं। टीम को चंदोई के आसपास क्षेत्र में भी भेजा गया, जहां बाघ की काई लोकेशन नहीं मिली है। जो पगचिह्न वहां मिले हैं वो करीब पांच दिन पुराने प्रतीत हो रहे हैं। फिलहाल टीमों को निगरानी के लिए लगा दिया गया है।
- संजीव कुमार, निदेशक, सामाजिक वानिकी
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वन विभाग ने पगचिह्न ट्रेस किए, हफ्ताभर से जारी है बाघ की चहलकदमी
जंगल से सटे इलाकों में बाघ की चहलकदमी जारी रहने के बीच अब शहर से सटे क्षेत्र में भी बाघ की दस्तक से दहशत है। चंदोई गांव निवासी ग्रामीण के उस समय पसीने छूट गए जब वह गांव के पूर्वी दिशा में मछली मारने के लिए देवहा नदी पर पहुंचा। वहां उसने गन्ने के खेत से बाघ को निकलते देखा। डर से सहमे ग्रामीण ने जान बचाने को दौड़ लगा दी। ग्रामीणों की सूचना पर पहुंचे वनकर्मियों ने जानकारी जुटाकर बाघ के पगचिह्न ट्रेस किए हैं। हालांकि वन विभाग के अधिकारी इसे पांच दिन पुराना बताकर टालने में लगे हुए हैं।
टाइगर रिजर्व के दूर आबादी क्षेत्र में घूम रहे बाघ की दहशत कई इलाकों में कायम है। अमरिया तहसील क्षेत्र तो बाघ के कुनबे का प्रवास स्थल बना हुआ है। बाघ की रोकथाम करने को वन विभाग की ओर से किए जा रहे दावे मात्र जागरूक करने तक सीमित रह गए हैं। वहीं बाघ की सक्रियता जंगल सीमा से सटे इलाकों के साथ शहर की ओर भी बढ़ने लगी है। शहर से सटे चंदोई के ग्रामीणों की माने तो आबादी के निकट सप्ताहभर पूर्व से बाघ की चहलकदमी देखी जा रही है। चंदोई निवासी वहीद मियां गुरुवार तड़के गांव की पूर्वी दिशा में देवहा नदी पर मछली मारने के लिए निकले। वहीद के मुताबिक कुछ दूरी पर गन्ने के खेत की ओर बाघ की चहलकदमी दिखाई देने से उसके पसीने छूट गए। डर के चलते आननफानन में जान बचाने को उसने गांव की ओर दौड़ लगाकर जानकारी ग्रामीणों को दी। सूचना के बाद गांव मे हड़कंप मच गया। शहर निवासी सैय्यद जकी की सूचना पर सामाजिक वानिकी के वनकर्मी मौके पर पहुंच गए। वन रक्षक अंकित कुमार ने ग्रामीणों से जानकारी जुटाकर बाघ के पगचिह्न ट्रेस कर रिपोर्ट तैयार की। वन विभाग के अधिकारियों की मानें तो पगचिह्न पांच दिन पुराने हैं और हाल फिलहाल में बाघ वहां नहीं है।
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कुछ देर देखने पर पता लगा बाघ है
भले ही बाघ देख दौड़ लगाकर वहीद ने जान बचा ली हो, लेकिन बाघ की दहशत उसके चेहरे पर साफ दिखाई दे रही है। दिल से बाघ का खौफ पूरी तरह खत्म नहीं हो सका है। वहीद के मुताबिक बाघ से उसकी दूरी मात्र 50 मीटर रह गई थी। सुबह तड़के नदी किनारे कोहरा होने के चलते बाघ को पहचाने में करीब दो मिनट लग गए। बाघ के अंगड़ाई लेते ही जान बचाने को उसने गांव की ओर दौड़ा लगा दी।
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ग्रामीणों ने की कैमरे लगाने की मांग
शहर से सटे चंदोई गांव तक बाघ की लगातार मौजूदगी देखी जा रही है। गुरुवार को बाघ की चहलकदमी के बाद क्षेत्रीय लोगों में दहशत का माहौल है। वहीं देवहा नदी से सटे क्षेत्र में किसानों की गन्ने की फसलें भी खड़ी हैं। शहर निवासी सैय्यद जकी, खालिद हसन समेत अन्य ने लोगों बाघ की लगातार चहलकदमी को देखते हुए कैमरे की सहायता से निगरानी करने के मांग की है।
चंदोई गांव के निकट देवहा नदी के समीप बाघ के पगचिह्न मिले हैं। हालांकि वह करीब पांच दिन पुराने हैं। टीम को चंदोई के आसपास क्षेत्र में भी भेजा गया, जहां बाघ की काई लोकेशन नहीं मिली है। जो पगचिह्न वहां मिले हैं वो करीब पांच दिन पुराने प्रतीत हो रहे हैं। फिलहाल टीमों को निगरानी के लिए लगा दिया गया है।
- संजीव कुमार, निदेशक, सामाजिक वानिकी