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झूठ बोल मोदी, योगी ने बनाई सरकार: वीएम
Updated Sun, 08 Oct 2017 08:43 PM IST
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पीलीभीत। किसान मुक्ति यात्रा के संयोजक वीएम सिंह ने कहा कि मोदी और योगी ने जाति-धर्म के नाम पर लोगों में नफरत फैलाकर और किसानों से झूठ बोल कर केंद्र व प्रदेश में सरकार तो बना ली, लेकिन देश का किसान अब जाग उठा है। उन्होंने देश के किसानों का आह्वान किया कि वह इन किसान विरोधी सरकारों न सिर्फ किया वादा पूरा करने पर मजबूर करें बल्कि आने वाले चुनावों में उन्हें जड़ से उखाड़ फेंके।
मंदसौर से चल कर 13 प्रदेशों का भ्रमण करते हुए अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति की किसान मुक्ति यात्रा की यहां यशवंतरी देवी मंदिर प्रांगण में हुई सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि भाजपा ने चुनाव के समय कहा था कि वह किसानों को उनकी फसल की लागत का डेढ़ गुना मूल्य दिलवाएगी। हर किसानों का कर्जा माफ होगा। गन्ना मूल्य का भुगतान 14 दिन के भीतर होगा, लेकिन इसमें से कोई भी वादा मोदी और योगी सरकार ने पूरा नहीं किया। किसानों के कर्जमाफी के नाम पर एक-दो रुपये का कर्जा माफ कर किसानों से भद्दा मजाक किया। डिफाल्टरों का कर्जा माफ किया। खेती घाटे का सौदा हो गई है। तमाम किसान अभी भी सेठ साहूकारों व विभिन्न बैंकों के कर्जे के बोझ में दबे हैं। किसान के बेटे बड़े शहरों में दो जून की रोटी की तलाश में सेठ साहूकारों के यहां नौकरी करने पर मजबूर हैं। वीएम सिंह ने दावा किया कि यदि सरकार किसानों की लागत का डेढ़ गुना मूल्य दिला दे तो फिर किसान खुशहाल हो जाएगा। उन्होंने कहा कि पूरे देश में करीब 200 किसान संगठन हैं। इसमे से 181 संगठन आज एक मंच पर हैं। उन्होंने कहा कि 13 प्रदेशों का भ्रमण कर यह यात्रा पीलीभीत पहुंची है। 20 नवंबर को देश भर से लाखों की संख्या में किसान दिल्ली पहुंच केंद्र सरकार को वादे पूरे करने पर मजबूर करें।
योगेंद्र यादव ने कहा कि किसानों का आलू कोल्ड स्टोर में पड़ा है। किसान आलू सड़क पर फेंकने को मजबूर हैं। धान और गेहूं का भी समर्थन मूल्य किसानों को नहीं मिला। प्रधानमंत्री और उनके मंत्री संसद में झूठ बोलते हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा की सरकार आने से पहले किसान का औसतन दस प्रतिशत बढ़ा था, भाजपा की सरकार आने पर वह तीन प्रतिशत रह गया है। उन्होंने मंच से किसान नेता वीएम सिंह की किसान हित में लड़ी गई लड़ाई के लिए जम कर तारीफ की।
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किसान नेता अखिलेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि योगी सरकार ने कर्जमाफी के नाम पर धोखा दिया है। इसका हिसाब जनता को उनसे लेना होगा। उन्होंने कहा कि जाति धर्म के नाम पर सत्ता में आई भाजपा ने यहां सड़कों पर मुर्गा, बकरा और मछली काटे जाने तक पर पाबंदी लगा दी। भाजपा की इस तानाशाही राजनीति को जड़ से उखाड़ फेंकना होगा।
तेलंगाना से आए आर चंद्रशेखर ने कहा कि किसान राजा होता है। क्योकि वही अन्नदाता है। पर देश में कायम सरकार ने किसान को इस हद तक कर्जदार बना दिया कि वह आत्महत्या करने तक को मजबूर हो रहा है।
राजस्थान से आए किसान महापंचायत के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामपाल जाट ने कहा कि चुनाव के समय किसान जाति-बिरादरी में बंट जाता है। यही वजह है 70 फीसदी किसान वाले इस देश में किसानों की अब तक कोई सरकार नहीं बन सकी।
महाराष्ट्र से आए सांसद राजू सेठी ने कहा कि वह महाराष्ट्र में किसानों के हित की लड़ाई संसद में लड़ते हैं। पिछले साल किसानों को शुद्ध रूप से 338 रुपये प्रति क्विंटल गन्ने का दाम उन्होंने दिलवाया। यही वजह है कि वहां के किसानों ने उन्हें अपने चंदे से दो बार संसद और एक बार विधान सभा चुनाव लड़ा कर भेजा। उन्होंने कहा कि देश के सभी किसानों की दशा एक सी है। इस लिए किसान संगठनों को एक मंच पर आना पड़ा।
किसान नेता ईश्वरी प्रसाद ने कहा कि मोदी सरकार पूंजीपतियों की हितैषी है। यही वजह है कि उसे किसान हित से कोई लेना देना नहीं है। सभा को भाकपा (माले) नेत्री कृष्णा अधिकारी, पीलीभीत बार एसोसिएशन के अध्यक्ष किशनलाल, वरष्ठि नेता हारुन खां, यूसुफ मलिक ने भी संबोधित किया। सभा का संचालन किसान नेता अफरोज आलम ने किया।
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मंदसौर से चल कर 13 प्रदेशों का भ्रमण करते हुए अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति की किसान मुक्ति यात्रा की यहां यशवंतरी देवी मंदिर प्रांगण में हुई सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि भाजपा ने चुनाव के समय कहा था कि वह किसानों को उनकी फसल की लागत का डेढ़ गुना मूल्य दिलवाएगी। हर किसानों का कर्जा माफ होगा। गन्ना मूल्य का भुगतान 14 दिन के भीतर होगा, लेकिन इसमें से कोई भी वादा मोदी और योगी सरकार ने पूरा नहीं किया। किसानों के कर्जमाफी के नाम पर एक-दो रुपये का कर्जा माफ कर किसानों से भद्दा मजाक किया। डिफाल्टरों का कर्जा माफ किया। खेती घाटे का सौदा हो गई है। तमाम किसान अभी भी सेठ साहूकारों व विभिन्न बैंकों के कर्जे के बोझ में दबे हैं। किसान के बेटे बड़े शहरों में दो जून की रोटी की तलाश में सेठ साहूकारों के यहां नौकरी करने पर मजबूर हैं। वीएम सिंह ने दावा किया कि यदि सरकार किसानों की लागत का डेढ़ गुना मूल्य दिला दे तो फिर किसान खुशहाल हो जाएगा। उन्होंने कहा कि पूरे देश में करीब 200 किसान संगठन हैं। इसमे से 181 संगठन आज एक मंच पर हैं। उन्होंने कहा कि 13 प्रदेशों का भ्रमण कर यह यात्रा पीलीभीत पहुंची है। 20 नवंबर को देश भर से लाखों की संख्या में किसान दिल्ली पहुंच केंद्र सरकार को वादे पूरे करने पर मजबूर करें।
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योगेंद्र यादव ने कहा कि किसानों का आलू कोल्ड स्टोर में पड़ा है। किसान आलू सड़क पर फेंकने को मजबूर हैं। धान और गेहूं का भी समर्थन मूल्य किसानों को नहीं मिला। प्रधानमंत्री और उनके मंत्री संसद में झूठ बोलते हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा की सरकार आने से पहले किसान का औसतन दस प्रतिशत बढ़ा था, भाजपा की सरकार आने पर वह तीन प्रतिशत रह गया है। उन्होंने मंच से किसान नेता वीएम सिंह की किसान हित में लड़ी गई लड़ाई के लिए जम कर तारीफ की।
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किसान नेता अखिलेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि योगी सरकार ने कर्जमाफी के नाम पर धोखा दिया है। इसका हिसाब जनता को उनसे लेना होगा। उन्होंने कहा कि जाति धर्म के नाम पर सत्ता में आई भाजपा ने यहां सड़कों पर मुर्गा, बकरा और मछली काटे जाने तक पर पाबंदी लगा दी। भाजपा की इस तानाशाही राजनीति को जड़ से उखाड़ फेंकना होगा।
तेलंगाना से आए आर चंद्रशेखर ने कहा कि किसान राजा होता है। क्योकि वही अन्नदाता है। पर देश में कायम सरकार ने किसान को इस हद तक कर्जदार बना दिया कि वह आत्महत्या करने तक को मजबूर हो रहा है।
राजस्थान से आए किसान महापंचायत के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामपाल जाट ने कहा कि चुनाव के समय किसान जाति-बिरादरी में बंट जाता है। यही वजह है 70 फीसदी किसान वाले इस देश में किसानों की अब तक कोई सरकार नहीं बन सकी।
महाराष्ट्र से आए सांसद राजू सेठी ने कहा कि वह महाराष्ट्र में किसानों के हित की लड़ाई संसद में लड़ते हैं। पिछले साल किसानों को शुद्ध रूप से 338 रुपये प्रति क्विंटल गन्ने का दाम उन्होंने दिलवाया। यही वजह है कि वहां के किसानों ने उन्हें अपने चंदे से दो बार संसद और एक बार विधान सभा चुनाव लड़ा कर भेजा। उन्होंने कहा कि देश के सभी किसानों की दशा एक सी है। इस लिए किसान संगठनों को एक मंच पर आना पड़ा।
किसान नेता ईश्वरी प्रसाद ने कहा कि मोदी सरकार पूंजीपतियों की हितैषी है। यही वजह है कि उसे किसान हित से कोई लेना देना नहीं है। सभा को भाकपा (माले) नेत्री कृष्णा अधिकारी, पीलीभीत बार एसोसिएशन के अध्यक्ष किशनलाल, वरष्ठि नेता हारुन खां, यूसुफ मलिक ने भी संबोधित किया। सभा का संचालन किसान नेता अफरोज आलम ने किया।
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