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जंगल में बाघ ने बनाया युवक को निवाला
Updated Wed, 26 Sep 2018 10:36 PM IST
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26 पीबीटीपी 20, 21
ढाई किमी डंडे में लटकाकर लाया गया लक्ष्मण का शव
घने जंगल में साधन न होने से असुविधा, दहशत में पुलिस भी मौके पर शव नहीं कर सकी सील
पूरनपुर (पीलीभीत)। शाहजहांपुर की सीमा में बाघ का निवाला बने स्थानीय युवक का शव मिलने के बाद मौके पर गहमागहमी की स्थिति रही। घने जंगल में लक्ष्मण के शव के पास घायल हिरन मिलने से बाघ की दहशत और बढ़ गई। पुलिस स्टाफ की हिम्मत नहीं पड़ी कि वहां शव सील करके पंचनामा भर लें। वहीं काफी दूर तक वाहन या एंबुलेंस आने के हालात नहीं दिख रहे थे। ऐसे में शव को कपड़े में लपेटकर डंडों के सहारे जंगल से बाहर लाना पड़ा। बीच में नदी की धारा भी पड़ी जिसमें से होकर ग्रामीण और वनकर्मी निकलकर आए।
जंगल में मिले लक्ष्मण प्रसाद के शव को उठाकर लाने के साधन न होने पर उसे एक चादर में लपेटकर डंडे में लटकाकर ढाई किमी तक लाया गया। लोगों का मानना था कि बाघ आसपास ही होगा, लिहाजा उसकी दहशत के चलते पुलिसकर्मी भी घटनास्थल पर लक्ष्मण के शव का पंचनामा भरने का साहस तक नहीं जुटा सके। डंडे के सहारे सड़क किनारे शव लाकर उसको पोस्टमार्टम को भेजा गया। जंगल में जिस स्थान पर लक्ष्मण प्रसाद का शव मिला। वह घुंघचाई-दियोरिया मार्ग से करीब ढाई किमी अंदर जंगल में है। रास्ते से घटनास्थल तक पहुंचने पर तीन स्थानों पर खन्नौत नदी की तीन धार पड़ती हैं। धारों से गुजरकर घटनास्थल पहुंचने पर पुलिसकर्मियों और अन्य अफसरों को जूतों को हाथ में पकड़कर पानी में घुसकर निकलना पड़ा।
....तो क्या धरती के फूल के चक्कर में चली गई जान
चर्चा है कि लक्ष्मण प्रसाद अपने कुछ साथियों के साथ मंगलवार को गांव में धरती के फूल बीनने गया था। हालांकि उसके पिता भगवानदास ने इससे साफ इंकार कर रहे हैं। उनका कहना है कि जंगल रास्ते से पैदल निकलने पर बाघ ने उसे निवाला बनाया है। दियोरिया रेंजर जमुना प्रसाद पांडेय ने बताया कि घटना उनके रेंज में नहीं शाहजहांपुर के बंडा वन क्षेत्र में हुई है। लक्ष्मण प्रसाद की मौत पर उसके परिवारवालों में कोहराम मच गया। परिवार में उसके पिता भगवानदास के अलावा मां कांति देवी, पत्नी गीता, भाई दीनदयाल, ईश्वर दयाल श्रीराम हैं।
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घटना की सूचना मिलने पर मौके पर स्टाफ को भेजा गया था। घटना जंगल के करीब ढाई किमी अंदर की है। ग्रामीणों से पूछताछ व मौके के हालात को देखते हुए प्रथमदृष्ट्या लक्ष्मण के धरती के फूल बीनने को जंगल में जाने की पुष्टि हो रही है। इसकी विस्तार से जांच कराई जाएगी। बाघ ने जंगल के भीतर हिरन को भी अपना शिकार बनाया था। वह बाघ का आहार था, लिहाजा उसे छेड़ा नहीं गया।- आदर्श कुमार, डिप्टी डायरेक्टर, टाइगर रिजर्व
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26 पीबीटीपी 19
तड़पता रहा हिरन, इलाज को भिजवाने की नहीं की जहमत
घुंघचाई (पीलीभीत)। लक्ष्मण प्रसाद का जहां अधखाया शव था उससे करीब 100 मीटर दूरी पर एक घायल हिरन अंतिम सांसें ले रहा था। मौके पर पहुंचे लोगों और दियोरिया रेंज के कर्मचारियों ने बाघ के हमले से उसके घायल होने की आशंका व्यक्त की। घायल हिरन घंटों तड़पता रहा, लेकिन दियोरिया रेंज के कर्मचारियों ने उसको इलाज को भी भिजवाने की जहमत नहीं की। वन दरोगा दिनेश गिरि ने बताया कि पाढ़ा (हिरन) बाघ का आहार था। इसलिए उसे वहीं छोड़ दिया गया। आसपास बाघ मौजूद रहा होगा।
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दो ग्रामीणों को इससे पहले बाघ ने बनाया था निवाला
घुंघचाई। गांव निवासी गोकरन प्रसाद को करीब डेढ़ साल पहले और गांव दिलावरपुर निवासी जमुना प्रसाद को ढाई साल पहले बाघ ने दियोरिया जंगल में निवाला बनाया था। लक्ष्मण प्रसाद की मौत पर इन दोनों घटनाओं की लोग चर्चा करते देखे गए। 00
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ढाई किमी डंडे में लटकाकर लाया गया लक्ष्मण का शव
घने जंगल में साधन न होने से असुविधा, दहशत में पुलिस भी मौके पर शव नहीं कर सकी सील
पूरनपुर (पीलीभीत)। शाहजहांपुर की सीमा में बाघ का निवाला बने स्थानीय युवक का शव मिलने के बाद मौके पर गहमागहमी की स्थिति रही। घने जंगल में लक्ष्मण के शव के पास घायल हिरन मिलने से बाघ की दहशत और बढ़ गई। पुलिस स्टाफ की हिम्मत नहीं पड़ी कि वहां शव सील करके पंचनामा भर लें। वहीं काफी दूर तक वाहन या एंबुलेंस आने के हालात नहीं दिख रहे थे। ऐसे में शव को कपड़े में लपेटकर डंडों के सहारे जंगल से बाहर लाना पड़ा। बीच में नदी की धारा भी पड़ी जिसमें से होकर ग्रामीण और वनकर्मी निकलकर आए।
जंगल में मिले लक्ष्मण प्रसाद के शव को उठाकर लाने के साधन न होने पर उसे एक चादर में लपेटकर डंडे में लटकाकर ढाई किमी तक लाया गया। लोगों का मानना था कि बाघ आसपास ही होगा, लिहाजा उसकी दहशत के चलते पुलिसकर्मी भी घटनास्थल पर लक्ष्मण के शव का पंचनामा भरने का साहस तक नहीं जुटा सके। डंडे के सहारे सड़क किनारे शव लाकर उसको पोस्टमार्टम को भेजा गया। जंगल में जिस स्थान पर लक्ष्मण प्रसाद का शव मिला। वह घुंघचाई-दियोरिया मार्ग से करीब ढाई किमी अंदर जंगल में है। रास्ते से घटनास्थल तक पहुंचने पर तीन स्थानों पर खन्नौत नदी की तीन धार पड़ती हैं। धारों से गुजरकर घटनास्थल पहुंचने पर पुलिसकर्मियों और अन्य अफसरों को जूतों को हाथ में पकड़कर पानी में घुसकर निकलना पड़ा।
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....तो क्या धरती के फूल के चक्कर में चली गई जान
चर्चा है कि लक्ष्मण प्रसाद अपने कुछ साथियों के साथ मंगलवार को गांव में धरती के फूल बीनने गया था। हालांकि उसके पिता भगवानदास ने इससे साफ इंकार कर रहे हैं। उनका कहना है कि जंगल रास्ते से पैदल निकलने पर बाघ ने उसे निवाला बनाया है। दियोरिया रेंजर जमुना प्रसाद पांडेय ने बताया कि घटना उनके रेंज में नहीं शाहजहांपुर के बंडा वन क्षेत्र में हुई है। लक्ष्मण प्रसाद की मौत पर उसके परिवारवालों में कोहराम मच गया। परिवार में उसके पिता भगवानदास के अलावा मां कांति देवी, पत्नी गीता, भाई दीनदयाल, ईश्वर दयाल श्रीराम हैं।
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घटना की सूचना मिलने पर मौके पर स्टाफ को भेजा गया था। घटना जंगल के करीब ढाई किमी अंदर की है। ग्रामीणों से पूछताछ व मौके के हालात को देखते हुए प्रथमदृष्ट्या लक्ष्मण के धरती के फूल बीनने को जंगल में जाने की पुष्टि हो रही है। इसकी विस्तार से जांच कराई जाएगी। बाघ ने जंगल के भीतर हिरन को भी अपना शिकार बनाया था। वह बाघ का आहार था, लिहाजा उसे छेड़ा नहीं गया।- आदर्श कुमार, डिप्टी डायरेक्टर, टाइगर रिजर्व
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26 पीबीटीपी 19
तड़पता रहा हिरन, इलाज को भिजवाने की नहीं की जहमत
घुंघचाई (पीलीभीत)। लक्ष्मण प्रसाद का जहां अधखाया शव था उससे करीब 100 मीटर दूरी पर एक घायल हिरन अंतिम सांसें ले रहा था। मौके पर पहुंचे लोगों और दियोरिया रेंज के कर्मचारियों ने बाघ के हमले से उसके घायल होने की आशंका व्यक्त की। घायल हिरन घंटों तड़पता रहा, लेकिन दियोरिया रेंज के कर्मचारियों ने उसको इलाज को भी भिजवाने की जहमत नहीं की। वन दरोगा दिनेश गिरि ने बताया कि पाढ़ा (हिरन) बाघ का आहार था। इसलिए उसे वहीं छोड़ दिया गया। आसपास बाघ मौजूद रहा होगा।
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दो ग्रामीणों को इससे पहले बाघ ने बनाया था निवाला
घुंघचाई। गांव निवासी गोकरन प्रसाद को करीब डेढ़ साल पहले और गांव दिलावरपुर निवासी जमुना प्रसाद को ढाई साल पहले बाघ ने दियोरिया जंगल में निवाला बनाया था। लक्ष्मण प्रसाद की मौत पर इन दोनों घटनाओं की लोग चर्चा करते देखे गए। 00
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