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राजकीय कॉलेजों में मुखिया ही नहीं, तो कैसे बने शिक्षा का माहौल
Updated Thu, 02 Aug 2018 12:15 AM IST
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01 पीबीटीपी 10
राजकीय कॉलेजों में मुखिया ही नहीं तो कैसे बने शिक्षा का माहौल
17 प्रवक्ताओं के सहारे 14 राजकीय कॉलेजों में हो रही पढ़ाई
क्रासर...
माध्यमिक स्कूल कॉलेजों में शिक्षकों की कमी पढ़ाई में बन रही रोड़ा
अमर उजाला ब्यूरो
पीलीभीत। जिले के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी बेहतर पढ़ाई में बड़ा रोड़ा बनी हुई है। माध्यमिक स्कूल-कॉलेजों में प्रधानाचार्य समेत कई शिक्षकों के पद रिक्त चल रहे हैं। शिक्षकों की कमी के चलते ही शिक्षा की बेहतरी को अपनाए जा रहे सरकारी प्रयास भी गति नहीं पकड़ पा रहे हैं। जिले के राजकीय इंटर कॉलेजों को ही देखे तो आलम यह हैं कि जिले के सभी 14 राजकीय कॉलेजों में मात्र 17 प्रवक्ताओं के सहारे ही विद्यार्थियों की नैया पार लगाई जा रही है।
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जिले में राजकीय इंटर कॉलेज 14, प्रवक्ता मात्र 17
माध्यमिक शिक्षा परिषद द्वारा जिले में पंडित दीनदयाल उपाध्याय राजकीय मॉडल इंटर कॉलेज समेत कुल 14 राजकीय इंटर कॉलेज हैं। खास बात यह है कि इन 14 राजकीय कॉलेजों में से मात्र एक कॉलेज में ही प्रधानाचार्य तैनात हैं। शेष कॉलेज बिना प्रधानाचार्य के संचालित किए जा रहे हैं। इससे भी खास बात यह है कि इन कॉलेजों में 136 प्रवक्ताओं की जरूरत है लेकिन मौजूदा समय में मात्र 17 प्रवक्ता ही तैनात हैं। 119 प्रवक्ताओं के पद लंबे अरसे से खाली चल रहे हैं।
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राजकीय हाईस्कूलों में शिक्षकों के 80 में से 74 रिक्त
राजकीय हाईस्कूलों का हाल भी कमोवेश राजकीय इंटर कॉलेजों जैसा ही है। जिले में 14 राजकीय हाईस्कूल हैं। इसमें भी तीन राजकीय हाईस्कूल बिना प्रधानाचार्य के ही चल रहे हैं। इन स्कूलों में सहायक अध्यापक के 80 पद सृजित है, लेकिन वर्तमान में इनमें मात्र छह सहायक अध्यापक ही तैनात है और 74 पद आज भी खाली ही चल रहे हैं।
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ये हैं माध्यमिक स्कूल कॉलेजों की स्थिति
राजकीय इंटर कॉलेज गभिया सहराई में एक प्रधानाचार्य, नौ प्रवक्ता, 12 सहायक अध्यापक के पद सृजित है लेकिन वर्तमान में यहां प्रधानाचार्य समेत एक प्रवक्ता ही तैनात हैं, जबकि यहां 1000 से अधिक बच्चे पढ़ते हैं। खास बात यह है कि अभिभावक की मांग पर जब शिक्षकों की तैनाती नहीं हुई तो उन्होंने अभिभावक संघ बनाकर यहां पढ़ाई के लिए प्राइवेट शिक्षकों को रखा है। राजकीय इंटर कॉलेज पौटाकलां में तो खेल मैदान न होनेे के बावजूद दो-दो खेल शिक्षक है, एक जीव विज्ञान प्रवक्ता भी है। यहां 500 से अधिक बच्चे पढ़ते हैं। कमोवेश राजकीय हाईस्कूल लुहिचा, बूंदीभूड़ समेत कुछ अन्य राजकीय स्कूलों का भी यही हाल है। ऐसे में इन स्कूलों में गुणवत्तापरक पढ़ाई का दावा करना बेमानी के सिवा कुछ नहीं है। इसके बावजूद शासन राजकीय हाईस्कूलों के माध्यम से सस्ती शिक्षा दिलाने का ढ़िढोरा पीट रहा है। वहीं स्कूलों के हालात देखकर विद्यार्थी भी यहां कम ही पहुंच रहे हैं।
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राजकीय इंटर कॉलेजों में शिक्षकों की स्थिति
पद स्वीकृत कार्यरत रिक्त
प्रधानाचार्य 14 01 11
प्रवक्ता 136 17 119
सहायक अध्यापक 181 54 127
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राजकीय हाईस्कूलों में शिक्षकों की स्थिति:
पद स्वीकृत कार्यरत रिक्त
प्रधानाचार्य 14 11 03
सहायक अध्यापक 80 06 74
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वर्जन:
राजकीय स्कूल कॉलेजों में शिक्षकों की कमी को देखते हुए शिक्षण व्यवस्था प्रभावित न हो, इसके पूरे प्रयास किए जा रहे हैं। शासन द्वारा भर्ती प्रक्रिया भी शुरू की जा रही है। उम्मीद है कि जल्द ही शिक्षकों की कमी पूरी हो सकेगी। - संतप्रकाश, डीआईओएस
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राजकीय कॉलेजों में मुखिया ही नहीं तो कैसे बने शिक्षा का माहौल
17 प्रवक्ताओं के सहारे 14 राजकीय कॉलेजों में हो रही पढ़ाई
क्रासर...
माध्यमिक स्कूल कॉलेजों में शिक्षकों की कमी पढ़ाई में बन रही रोड़ा
अमर उजाला ब्यूरो
पीलीभीत। जिले के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी बेहतर पढ़ाई में बड़ा रोड़ा बनी हुई है। माध्यमिक स्कूल-कॉलेजों में प्रधानाचार्य समेत कई शिक्षकों के पद रिक्त चल रहे हैं। शिक्षकों की कमी के चलते ही शिक्षा की बेहतरी को अपनाए जा रहे सरकारी प्रयास भी गति नहीं पकड़ पा रहे हैं। जिले के राजकीय इंटर कॉलेजों को ही देखे तो आलम यह हैं कि जिले के सभी 14 राजकीय कॉलेजों में मात्र 17 प्रवक्ताओं के सहारे ही विद्यार्थियों की नैया पार लगाई जा रही है।
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जिले में राजकीय इंटर कॉलेज 14, प्रवक्ता मात्र 17
माध्यमिक शिक्षा परिषद द्वारा जिले में पंडित दीनदयाल उपाध्याय राजकीय मॉडल इंटर कॉलेज समेत कुल 14 राजकीय इंटर कॉलेज हैं। खास बात यह है कि इन 14 राजकीय कॉलेजों में से मात्र एक कॉलेज में ही प्रधानाचार्य तैनात हैं। शेष कॉलेज बिना प्रधानाचार्य के संचालित किए जा रहे हैं। इससे भी खास बात यह है कि इन कॉलेजों में 136 प्रवक्ताओं की जरूरत है लेकिन मौजूदा समय में मात्र 17 प्रवक्ता ही तैनात हैं। 119 प्रवक्ताओं के पद लंबे अरसे से खाली चल रहे हैं।
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राजकीय हाईस्कूलों में शिक्षकों के 80 में से 74 रिक्त
राजकीय हाईस्कूलों का हाल भी कमोवेश राजकीय इंटर कॉलेजों जैसा ही है। जिले में 14 राजकीय हाईस्कूल हैं। इसमें भी तीन राजकीय हाईस्कूल बिना प्रधानाचार्य के ही चल रहे हैं। इन स्कूलों में सहायक अध्यापक के 80 पद सृजित है, लेकिन वर्तमान में इनमें मात्र छह सहायक अध्यापक ही तैनात है और 74 पद आज भी खाली ही चल रहे हैं।
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ये हैं माध्यमिक स्कूल कॉलेजों की स्थिति
राजकीय इंटर कॉलेज गभिया सहराई में एक प्रधानाचार्य, नौ प्रवक्ता, 12 सहायक अध्यापक के पद सृजित है लेकिन वर्तमान में यहां प्रधानाचार्य समेत एक प्रवक्ता ही तैनात हैं, जबकि यहां 1000 से अधिक बच्चे पढ़ते हैं। खास बात यह है कि अभिभावक की मांग पर जब शिक्षकों की तैनाती नहीं हुई तो उन्होंने अभिभावक संघ बनाकर यहां पढ़ाई के लिए प्राइवेट शिक्षकों को रखा है। राजकीय इंटर कॉलेज पौटाकलां में तो खेल मैदान न होनेे के बावजूद दो-दो खेल शिक्षक है, एक जीव विज्ञान प्रवक्ता भी है। यहां 500 से अधिक बच्चे पढ़ते हैं। कमोवेश राजकीय हाईस्कूल लुहिचा, बूंदीभूड़ समेत कुछ अन्य राजकीय स्कूलों का भी यही हाल है। ऐसे में इन स्कूलों में गुणवत्तापरक पढ़ाई का दावा करना बेमानी के सिवा कुछ नहीं है। इसके बावजूद शासन राजकीय हाईस्कूलों के माध्यम से सस्ती शिक्षा दिलाने का ढ़िढोरा पीट रहा है। वहीं स्कूलों के हालात देखकर विद्यार्थी भी यहां कम ही पहुंच रहे हैं।
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राजकीय इंटर कॉलेजों में शिक्षकों की स्थिति
पद स्वीकृत कार्यरत रिक्त
प्रधानाचार्य 14 01 11
प्रवक्ता 136 17 119
सहायक अध्यापक 181 54 127
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राजकीय हाईस्कूलों में शिक्षकों की स्थिति:
पद स्वीकृत कार्यरत रिक्त
प्रधानाचार्य 14 11 03
सहायक अध्यापक 80 06 74
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वर्जन:
राजकीय स्कूल कॉलेजों में शिक्षकों की कमी को देखते हुए शिक्षण व्यवस्था प्रभावित न हो, इसके पूरे प्रयास किए जा रहे हैं। शासन द्वारा भर्ती प्रक्रिया भी शुरू की जा रही है। उम्मीद है कि जल्द ही शिक्षकों की कमी पूरी हो सकेगी। - संतप्रकाश, डीआईओएस