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नहीं थमा बुखार का कहर, दो और जान गईं

Thu, 13 Sep 2018 11:45 PM IST
Updated Thu, 13 Sep 2018 11:45 PM IST
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नहीं थमा बुखार का कहर, दो और जान गईं
नहीं थमा बुखार का कहर, दो और जान गई
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लगातार बढ़ रहा बीमारी का प्रकोप, मरने वालों की संख्या 16 हुई
अमर उजाला ब्यूरो
पीलीभीत। बुखार की चपेट में आने से मरने वालों की संख्या में इजाफा प्रतिदिन होता जा रहा है। बीते 24 घंटे में तेज बुखार से एक पूरनुपर और एक बरखेड़ा में मौत हुई है। इसी के साथ बुखार से मरने वालों की संख्या जिले में बढ़कर 16 हो गई है। देहात क्षेत्र में लगातार होने वाले मौतों को कंट्रोल करने में स्वास्थ्य विभाग की तमाम कोशिशें नाकाफी साबित होती दिख रही है।
बरखेड़ा थाना क्षेत्र के मुड़िया हुलास गांव निवासी सुभाष (65) की गुरुवार सुबह मौत हो गई। वह तीन दिन से बुखार से ग्रसित थे। सीएचसी बरखेड़ा में इलाज के बाद उनको जिला अस्पताल भेजा गया था। बुधवार को जिला अस्पताल से छुट्टी कराने के बाद परिवार वाले सुभाष को घर ले गए। गुरुवार सुबह अचानक तबीयत फिर बिगड़ी और सुभाष की मौत हो गई। मृतक के बड़े बेटे ओमप्रकाश ने बताया कि उसके पिता सुभाष रात में स्वस्थ थे, सुबह अचानक पेट में दर्द व हल्का बुखार आने के बाद उनकी जान चली गई। वहीं तेज बुखार से पूरनपुर के मोहल्ला गनेशगंज निवासी विनोद (30) की बुधवार सुबह लखनऊ में इलाज के दौरान मौत हो गई। विनोद को सीएचसी से छह सितंबर को जिला अस्पताल के लिए रेफर किया गया था। हालत में सुधार न होने पर परिवार वाले विनोद को लखनऊ के ट्रामा सेंटर ले गए थे। जहां इलाज के दौरान बुधवार को विनोद में दम तोड़ दिया। विनोद ई रिक्शा चलाकर अपने परिवार का पालन पोषण करता था। मृतक विनोद की तीन बेटी व एक बेटा है।
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अनदेखी से बिगड़ते जा रहे हालत
इलाज के आभाव में मरीजों की हालत दिन प्रतिदिन बिगड़ती जा रही है। ग्रामीण क्षेत्रों की बात करें तो सीएचसी पीएचसी पर सुबह ही डॉक्टर पहुंच जाते हैं, लेकिन मरीजों को भर्ती करने की पर्याप्त जगह नहीं होने पर वह या तो मरीज को दवा देकर काम चला लेते हैं या फिर जिला अस्पताल रेफर कर अपने कर्तव्यों की इतिश्री कर लेते हैं। स्वास्थ्य केंद्रों पर मरीजों को भर्ती करने के लिए जगह नहीं होने के कारण डॉक्टर भी परेशान हैं। अधिकारी भी ग्रामीण क्षेत्रों में मरीजों को बेहतर सुविधाएं और इलाज मुहैया कराने का महज दावा कर रहे हैं। हकीकत इससे इतर है।
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वर्जन
सुभाष की मौत तेज बुखार की वजह से नहीं बल्कि उसकी दोनों किडनी खराब होने की वजह से हुई है। जिला अस्पताल में उसका इलाज चल रहा था। बुधवार रात परिवार वाले अपनी सहमति पर सुभाष की छुट्टी कराकर घर ले गए थे।
डॉ. रतनपाल सिंह सुमन, सीएमएस, जिला अस्पताल
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