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एक तरफ अविरल धारा बहाने को दो करोड़, दूसरी तरफ गंदे पानी की दी जा रही सौगात
Updated Sun, 24 Sep 2017 11:55 PM IST
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माधोटांडा (पीलीभीत)। अवध नगरी समेत 14 शहरों के लिए जीवनदायिनी कही जाने वाली गोमती नदी का दम लगातार घुट रहा है। हाल ही में गोमती की अविरल धारा बहाने को तो प्रदेश सरकार ने सवा दो करोड़ रुपये खर्च करवा दिए, लेकिन जिस गोमती नदी के उद्गम स्थल पर धार्मिक पर्वों के दौरान श्रद्धालु स्नान कर खुद को पवित्र मानते हैं, उसका पानी लगातार दूषित हो रहा है। वजह यह है कस्बे के पानी निकास को बना गंदे पानी का नाला, जो गोमती उद्गम स्थल में जाकर गिरता है। इस गंदे पानी के नाले के जरिए रोजाना हजारों लीटर दूषित पानी और अपशिष्ट गोमती में पहुंच रहा है। इससे यह उद्गम स्थल इस कदर दूषित हो चुका है कि इसका पानी मानव ही नहीं बेजुबानों के लिए भी घातक सिद्ध हो रहा है।
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आस्था स्थलों का भी नहीं ख्याल
गोमती मूलत: भूजल पर आधारित नदी है। नदी का मुख्य स्रोत माधोटांडा की फुलहर झील है। इसके तट पर उद्गम स्थल से लेकर टेल तक प्रत्येक जनपद में आस्था से जुड़े कई मंदिर स्थापित हैं। उद्गम स्थल पर भी बाबा दुर्गानाथ का मंदिर है, जहां हर साल वर्ष में दो बार मेला लगता है, लेकिन आस्था के इस पवित्र स्थल के साथ लंबे समय से खिलवाड़ होता आ रहा है। करीब 15 हजार की आबादी वाले इस कस्बे का सारा गंदा पानी और कचरा एक गंदे नाले के जरिए गोमती में बहाया जा रहा है।
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उदगम स्थल तक देना था 25 क्यूसेक पानी
प्रदेश की तत्कालीन सरकार के सिंचाई मंत्री शिवपाल सिंह यादव ने उद्गम स्थल का दौरा करने के बाद अविरल धारा बहाने को सवा दो करोड़ रुपए स्वीकृत किया था। इससे 25 क्यूसेक पानी उद्गम स्थल तक देना था। माधोटांडा रजवाहा से उद्गम स्थल तक अविरल धारा बहाने को खुदाई करवा दी गई, लेकिन जब पानी छोड़ा गया तो गहराई होने के कारण गंदे नाले का पानी और तेजी से गोमती में जाने लगा। इसको लेकर सिंचाई विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि पहले गोमती को शारदा नदी से जोड़कर पानी देने की बात चली थी, लेकिन जब शारदा का जल स्तर लिया गया तो उसके पानी का स्तर गोमती से 15 फिट नीचे निकला।
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प्रभारी मंत्री ने प्रोजेक्ट बनाने के दिए निर्देश
पिछले दिनों प्रभारी मंत्री मुकुट बिहारी वर्मा के उद्गम स्थल का दौरा किया था। उस दौरान कुछ कस्बावासियों ने उद्गम स्थल में गिराए जा रहे गंदे पानी के नाले का मामला उठाते हुए समस्या से निजात दिलाने की मांग की। इस पर उन्होंने प्रशासन व शारदा सागर के अधिशासी अभियंता को सर्वे कराकर अलग से प्रोजेक्ट बनाने के निर्देश दिए थे।
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वर्जन-
हमने उद्गम स्थल तक खुदाई कर पानी पहुंचा दिया है। नाला वर्षों से गोमती में गिर रहा है। उसके लिए ब्लॉक व ग्राम पंचायत को सर्वे कराकर गंदे नालों की अलग से व्यवस्था करनी चाहिए ताकि पानी प्रदूषित न हो सके।
-धर्म घोष, सहायक अभियंता, शारदा सागर
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गोमती में गिर रहे गंदे पानी के नाले को लेकर प्रभारी मंत्री के समक्ष मामले को रखा गया था। उन्होंने शारदा सागर के अधिशासी अभियंता को सर्वे कराकर समस्या के निस्तारण के निर्देश दिए हैं।
-सूरज यादव, एसडीएम, कलीनगर
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24 पीबीटीपी 6
हमें कोई सर्वे कराने के आदेश नहीं मिले हैं। प्रभारी मंत्री के दौरे पर यह मांग उठाई गई। नालों को अलग सजे खुदाई कराकर सुंदरपुर की झील में डाला जा सकता हैं। दूसरा नालों की खुदाई दिशा बदलकर खारजा नहर में डाला जा सकता है ताकि गोमती में गंदा पानी न जा सके।
-किरन सिंह, ग्राम प्रधान, माधोटांडा
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24 पीबीटीपी 7
माधोटांडा कस्बा आजादी से पहले से बसा है। गंदे पानी के निकास की व्यवस्था अलग से होनी चाहिए। सिंचाई विभाग को अलग से अविरल धारा बहाने को नहर की खुदाई करनी चाहिए थी।
राम औतार, पूर्व प्रधान
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आस्था स्थलों का भी नहीं ख्याल
गोमती मूलत: भूजल पर आधारित नदी है। नदी का मुख्य स्रोत माधोटांडा की फुलहर झील है। इसके तट पर उद्गम स्थल से लेकर टेल तक प्रत्येक जनपद में आस्था से जुड़े कई मंदिर स्थापित हैं। उद्गम स्थल पर भी बाबा दुर्गानाथ का मंदिर है, जहां हर साल वर्ष में दो बार मेला लगता है, लेकिन आस्था के इस पवित्र स्थल के साथ लंबे समय से खिलवाड़ होता आ रहा है। करीब 15 हजार की आबादी वाले इस कस्बे का सारा गंदा पानी और कचरा एक गंदे नाले के जरिए गोमती में बहाया जा रहा है।
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उदगम स्थल तक देना था 25 क्यूसेक पानी
प्रदेश की तत्कालीन सरकार के सिंचाई मंत्री शिवपाल सिंह यादव ने उद्गम स्थल का दौरा करने के बाद अविरल धारा बहाने को सवा दो करोड़ रुपए स्वीकृत किया था। इससे 25 क्यूसेक पानी उद्गम स्थल तक देना था। माधोटांडा रजवाहा से उद्गम स्थल तक अविरल धारा बहाने को खुदाई करवा दी गई, लेकिन जब पानी छोड़ा गया तो गहराई होने के कारण गंदे नाले का पानी और तेजी से गोमती में जाने लगा। इसको लेकर सिंचाई विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि पहले गोमती को शारदा नदी से जोड़कर पानी देने की बात चली थी, लेकिन जब शारदा का जल स्तर लिया गया तो उसके पानी का स्तर गोमती से 15 फिट नीचे निकला।
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प्रभारी मंत्री ने प्रोजेक्ट बनाने के दिए निर्देश
पिछले दिनों प्रभारी मंत्री मुकुट बिहारी वर्मा के उद्गम स्थल का दौरा किया था। उस दौरान कुछ कस्बावासियों ने उद्गम स्थल में गिराए जा रहे गंदे पानी के नाले का मामला उठाते हुए समस्या से निजात दिलाने की मांग की। इस पर उन्होंने प्रशासन व शारदा सागर के अधिशासी अभियंता को सर्वे कराकर अलग से प्रोजेक्ट बनाने के निर्देश दिए थे।
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वर्जन-
हमने उद्गम स्थल तक खुदाई कर पानी पहुंचा दिया है। नाला वर्षों से गोमती में गिर रहा है। उसके लिए ब्लॉक व ग्राम पंचायत को सर्वे कराकर गंदे नालों की अलग से व्यवस्था करनी चाहिए ताकि पानी प्रदूषित न हो सके।
-धर्म घोष, सहायक अभियंता, शारदा सागर
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गोमती में गिर रहे गंदे पानी के नाले को लेकर प्रभारी मंत्री के समक्ष मामले को रखा गया था। उन्होंने शारदा सागर के अधिशासी अभियंता को सर्वे कराकर समस्या के निस्तारण के निर्देश दिए हैं।
-सूरज यादव, एसडीएम, कलीनगर
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24 पीबीटीपी 6
हमें कोई सर्वे कराने के आदेश नहीं मिले हैं। प्रभारी मंत्री के दौरे पर यह मांग उठाई गई। नालों को अलग सजे खुदाई कराकर सुंदरपुर की झील में डाला जा सकता हैं। दूसरा नालों की खुदाई दिशा बदलकर खारजा नहर में डाला जा सकता है ताकि गोमती में गंदा पानी न जा सके।
-किरन सिंह, ग्राम प्रधान, माधोटांडा
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24 पीबीटीपी 7
माधोटांडा कस्बा आजादी से पहले से बसा है। गंदे पानी के निकास की व्यवस्था अलग से होनी चाहिए। सिंचाई विभाग को अलग से अविरल धारा बहाने को नहर की खुदाई करनी चाहिए थी।
राम औतार, पूर्व प्रधान