{"_id":"5bd21d08bdec22694d431a76","slug":"21540496648-pilibhit-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"भगवान से सुख नहीं कृपा मांगना चाहिए- साध्वी राधा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
भगवान से सुख नहीं कृपा मांगना चाहिए- साध्वी राधा
Updated Fri, 26 Oct 2018 01:14 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
खेकड़ा (बागपत)। क्षेत्र के ग्राम मुबारिकपुर स्थित सिद्ध बाबा मंदिर में चल रही राम कथा के चौथे दिन बृहस्पतिवार को महामंडलेश्वर भैयादास महाराज की धर्म बेटी बाल साध्वी राधा देवी जी ने शिव पार्वती प्रसंग सुनाते हुए कहा कि जहां सच्चा प्रेम होता है वहां निश्चित ही भगवान प्रगट हो जाते हैं। भगवान निस्वार्थ ओर सच्चे प्रेम से ही प्रसन्न होते हैं। भगवान से सुख नहीं उनकी कृपा मांगना चाहिए। जब मनुष्य भगवान को निस्वार्थ भाव से पुकारता है तो वह दीन दयालु अवश्य अपने भक्त पर कृपा करते हैं।
उन्होंने राम कथा सुनाते हुए कहा कि जब सती ने राम पर संशय किया और सीताजी का रूप धारण कर रामजी की परीक्षा ली तो शिव रुष्ट हो गए परंतु शिव ने सती को नहीं बताया कि मैं आप से रुष्ट हूं। शिव ने सती का मन ही मन त्याग कर दिया। जब सती ने शिव की उदासी देखी तो सती समझ गई और उन्होंने अपने पिता के घर जाने का आग्रह किया और शिव गणों के साथ प्रजापति दक्ष के यहां चली गई और वहां उन्होंने शिव का अपमान अपने पिता के द्वारा देखा तो बर्दाश्त नहीं कर सकी और अपना शरीर योगाग्नि से त्याग दिया। शिवप्रेम में अंत समय में यही प्रार्थना की कि नाथ मैं जहां भी जन्म लूं तो शिव चरणों की ही सेवा प्राप्त करूं। वहीं सती राजा हिमाचल के यहां पार्वती रूप में जन्मी ओर उन्होंने घोर तपस्या कर शिव को प्राप्त किया। जहां सच्चा प्रेम होता है तो निश्चित ही लक्ष्य की प्राप्ति होती है। इस दौरान अनिल त्यागी, बब्बू त्यागी, शिवराज मास्टर, अमित त्यागी, बॉबी, अमरीश त्यागी, रीता, पुष्पा, चंचल, रेखा, सुनीता, ममता, पुष्पा आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन
उन्होंने राम कथा सुनाते हुए कहा कि जब सती ने राम पर संशय किया और सीताजी का रूप धारण कर रामजी की परीक्षा ली तो शिव रुष्ट हो गए परंतु शिव ने सती को नहीं बताया कि मैं आप से रुष्ट हूं। शिव ने सती का मन ही मन त्याग कर दिया। जब सती ने शिव की उदासी देखी तो सती समझ गई और उन्होंने अपने पिता के घर जाने का आग्रह किया और शिव गणों के साथ प्रजापति दक्ष के यहां चली गई और वहां उन्होंने शिव का अपमान अपने पिता के द्वारा देखा तो बर्दाश्त नहीं कर सकी और अपना शरीर योगाग्नि से त्याग दिया। शिवप्रेम में अंत समय में यही प्रार्थना की कि नाथ मैं जहां भी जन्म लूं तो शिव चरणों की ही सेवा प्राप्त करूं। वहीं सती राजा हिमाचल के यहां पार्वती रूप में जन्मी ओर उन्होंने घोर तपस्या कर शिव को प्राप्त किया। जहां सच्चा प्रेम होता है तो निश्चित ही लक्ष्य की प्राप्ति होती है। इस दौरान अनिल त्यागी, बब्बू त्यागी, शिवराज मास्टर, अमित त्यागी, बॉबी, अमरीश त्यागी, रीता, पुष्पा, चंचल, रेखा, सुनीता, ममता, पुष्पा आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन