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...ऐसे तो थमने से रही एचआईवी संक्रमितों की तादाद
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पीलीभीत। एचआईवी/एड्स जैसी घातक बीमारी की रोकथाम को बड़े स्तर पर अभियान चलाए जा रहे हैं, बावजूद इसके एचआईवी संक्रमितों की संख्या कम होने के बजाए बढ़ती जा रही है। बीते चार साल में जिला पुरुष और महिला अस्पताल में हुई जांचों में 288 लोग एचआईवी पॉजिटिव पाए गए हैं। इनमें पुरुषों की संख्या अधिक है।
वैसे कहा जाता है कि चूक तो चूक है। जानबूझ कर हो या अनजाने में, मगर यह चूक ऐसी है जो मौत के सफर तक ले जाती है। इसके मुख्य वजह लोग असुरक्षित यौन संबंध बनाने से गुरेज नहीं करते। जिस कारण वह एचआईवी के शिकार हो जाते हैं। जिले की बात करें तो यहां एड्स रोगियों की पहचान करने को एड्स नियंत्रण सोसायटी द्वारा जिला व पुरुष अस्पताल में एकीकृत परामर्श केंद्र (आईसीटीसी) स्थापित किए गए हैं। यहां परीक्षण और काउंसलिंग की जाती है। इनमें एक-एक काउंसलर की तैनाती है। एड्स रोगियों के इलाज की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने पर एचआईवी पॉजिटिव पाए जाने पर संबंधित को पुन: जांच के लिए एआरटी (एंटी रिट्रोवायरल थेरेपी) बरेली भेजा जाता है। जबकि उसे दवाएं जिला अस्पताल स्थित लिंक एआरटी से मुहैय्या कराई जाती हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक एचआईवी संक्रमित रक्त चढ़ने, संक्रमित रोगी की सिरिंज का दोबारा इस्तेमाल होने, असुरक्षित यौन संबंध बनाने और एचआईवी संक्रमित मां से शिशु को प्रसव से पहले या उसके बाद संक्रमण अपनी चपेट में लेता है। थकान लगने, बहुत कम समय में वजन घटने, पुराना डायरिया, लंबे समय तक रहने वाला बुखार जैसे कुछ लक्षणों में लोगों को एचआईवी की जांच अवश्य कराना चाहिए। बीते वर्ष 2018 में 22 हजार से अधिक का परीक्षण हुआ। इनमें 19 महिलाएं व 47 पुरुष एचआईवी पॉजिटिव पाए गए।
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वैसे कहा जाता है कि चूक तो चूक है। जानबूझ कर हो या अनजाने में, मगर यह चूक ऐसी है जो मौत के सफर तक ले जाती है। इसके मुख्य वजह लोग असुरक्षित यौन संबंध बनाने से गुरेज नहीं करते। जिस कारण वह एचआईवी के शिकार हो जाते हैं। जिले की बात करें तो यहां एड्स रोगियों की पहचान करने को एड्स नियंत्रण सोसायटी द्वारा जिला व पुरुष अस्पताल में एकीकृत परामर्श केंद्र (आईसीटीसी) स्थापित किए गए हैं। यहां परीक्षण और काउंसलिंग की जाती है। इनमें एक-एक काउंसलर की तैनाती है। एड्स रोगियों के इलाज की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने पर एचआईवी पॉजिटिव पाए जाने पर संबंधित को पुन: जांच के लिए एआरटी (एंटी रिट्रोवायरल थेरेपी) बरेली भेजा जाता है। जबकि उसे दवाएं जिला अस्पताल स्थित लिंक एआरटी से मुहैय्या कराई जाती हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक एचआईवी संक्रमित रक्त चढ़ने, संक्रमित रोगी की सिरिंज का दोबारा इस्तेमाल होने, असुरक्षित यौन संबंध बनाने और एचआईवी संक्रमित मां से शिशु को प्रसव से पहले या उसके बाद संक्रमण अपनी चपेट में लेता है। थकान लगने, बहुत कम समय में वजन घटने, पुराना डायरिया, लंबे समय तक रहने वाला बुखार जैसे कुछ लक्षणों में लोगों को एचआईवी की जांच अवश्य कराना चाहिए। बीते वर्ष 2018 में 22 हजार से अधिक का परीक्षण हुआ। इनमें 19 महिलाएं व 47 पुरुष एचआईवी पॉजिटिव पाए गए।
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