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मनरेगा से खुदेंगे मछली पालन को तालाब
Updated Wed, 16 May 2018 01:48 AM IST
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मनरेगा से खुदेंगे मछली पालन को तालाब
लघु एवं सीमांत किसानों को बीज व चारा भी मिलेगा
अमर उजाला ब्यूरो
पीलीभीत।
जिले में निजी भूमि पर मछली पालन करने के इच्छुक लोगों के लिए मनरेगा से तालाब खुदवाया जा सकेगा। इसके लिए सीडीओ ने सहायक निदेशक मत्स्य से प्रत्येक ब्लॉक में ऐसे इच्छुक लोगों की सूची तैयार करने के निर्देश दिए हैं। तालाब खुदने पर लघु एवं सीमांत कृषकों को मनरेगा से ही बीज और चारा भी उपलब्ध कराया जा सकेगा।
तराई के इस जनपद में गेहूं, धान गन्ने के साथ मछली पालन भी बेहतर व्यवसाय बन सकता है। इसके लिए मत्स्य विभाग की ओर से पहले से ही तालाब खुदवाए गए हैं। लगभग प्रत्येक ग्राम पंचायत में ग्राम पंचायत की भूमि पर मछुआ समुदाय के लोगों को पट्टा दिया गया है। इनके लिए मछली बीज एवं अन्य सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जा रही है। वर्तमान में करीब 600 हेक्टेयर क्षेत्रफल में मछली पालन किया जा रहा है। पिछले दिनों सीडीओ डॉ. दिनेश कुमार सिंह ने सहायक निदेशक मत्स्य डीके दुबे के साथ पूरनपुर रोड पर बिठौराकलां के निकट स्थित हैचरी का निरीक्षण किया साथ ही मछली पालकों के साथ बैठक की। इस दौरान कई ऐसे लोग भी पहुंचे जिन्होंने निजी जमीन पर मछली पालन की इच्छा व्यक्त की। इसके लिए सीडीओ ने सहायक निदेशक मत्स्य को सभी ब्लॉकों में ऐसे लोगों को चिह्नित करने एवं आवेदन लेने के निर्देश दिए। सीडीओ ने बताया कि निजी जमीन पर मछली पालन करने के इच्छुक मछली पालक/किसानों की जमीन पर मनरेगा से तालाब खुदवाए जाएंगे साथ ही लघु एवं सीमांत कृषकों को मनरेगा के माध्यम से ही मछली बीज एवं उनका चारा भी उपलब्ध कराया जाएगा। जरूरत पड़ने पर कृषि विभाग से अनुदान पर ट्यूबवेल भी दिलाया जा सकता है।
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मनरेगा से खुदेंगे मछली पालन को तालाब
लघु एवं सीमांत किसानों को बीज व चारा भी मिलेगा
अमर उजाला ब्यूरो
पीलीभीत।
जिले में निजी भूमि पर मछली पालन करने के इच्छुक लोगों के लिए मनरेगा से तालाब खुदवाया जा सकेगा। इसके लिए सीडीओ ने सहायक निदेशक मत्स्य से प्रत्येक ब्लॉक में ऐसे इच्छुक लोगों की सूची तैयार करने के निर्देश दिए हैं। तालाब खुदने पर लघु एवं सीमांत कृषकों को मनरेगा से ही बीज और चारा भी उपलब्ध कराया जा सकेगा।
तराई के इस जनपद में गेहूं, धान गन्ने के साथ मछली पालन भी बेहतर व्यवसाय बन सकता है। इसके लिए मत्स्य विभाग की ओर से पहले से ही तालाब खुदवाए गए हैं। लगभग प्रत्येक ग्राम पंचायत में ग्राम पंचायत की भूमि पर मछुआ समुदाय के लोगों को पट्टा दिया गया है। इनके लिए मछली बीज एवं अन्य सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जा रही है। वर्तमान में करीब 600 हेक्टेयर क्षेत्रफल में मछली पालन किया जा रहा है। पिछले दिनों सीडीओ डॉ. दिनेश कुमार सिंह ने सहायक निदेशक मत्स्य डीके दुबे के साथ पूरनपुर रोड पर बिठौराकलां के निकट स्थित हैचरी का निरीक्षण किया साथ ही मछली पालकों के साथ बैठक की। इस दौरान कई ऐसे लोग भी पहुंचे जिन्होंने निजी जमीन पर मछली पालन की इच्छा व्यक्त की। इसके लिए सीडीओ ने सहायक निदेशक मत्स्य को सभी ब्लॉकों में ऐसे लोगों को चिह्नित करने एवं आवेदन लेने के निर्देश दिए। सीडीओ ने बताया कि निजी जमीन पर मछली पालन करने के इच्छुक मछली पालक/किसानों की जमीन पर मनरेगा से तालाब खुदवाए जाएंगे साथ ही लघु एवं सीमांत कृषकों को मनरेगा के माध्यम से ही मछली बीज एवं उनका चारा भी उपलब्ध कराया जाएगा। जरूरत पड़ने पर कृषि विभाग से अनुदान पर ट्यूबवेल भी दिलाया जा सकता है।
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