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यहां तो चिराग तले अंधेरा ही अंधेरा...
Updated Fri, 15 Dec 2017 10:52 PM IST
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टायलेट
- फोटो : अमर उजाला
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विकास भवन के टॉयलेट बदहाल, जिले को ओडीएफ करने में जुटे
महकमे के 25 विभागों में काम करते हैं लगभग 500 कर्मचारी
पीलीभीत। मोदी सरकार में स्वच्छ भारत मिशन के तहत गांवों को ओडीएफ करने की होड़ लगी है। डीएम से लेकर लेखपाल और पंचायत सचिव तक इस काम में जुटे नजर आते हैं। विकास भवन के अधिकारी जिले को तो ओडीएफ कराने का जिम्मा संभाल रहे हैं, लेकिन खुद के यहां टॉयलेट की स्थिति व्यवस्थाओं की पोल खोलने के लिए काफी है। कहने को विकास भवन की बिल्डिंग में लेडीज और जेन्ट्स के लिए लगभग आधा दर्जन टॉयलेट बनें हैं, लेकिन सब बदहाल हैं। हालात यह है कि करोड़ों रुपये खर्च कर जिले को ओडीएफ कराने वाला विभाग इन दिनों खुद के कार्यालय में बने टॉयलेट की बदहाली को ही दूर नहीं कर पा रहा है। विकास की राह दिखाने वाले अधिकारी भी इसको लेकर संजीदा नहीं दिखते। यही वजह है कि विकास भवन के इन गंदे टॉयलेट पर न तो कभी सीडीओ की नजर पड़ी और न ही डीएम की।
विकास भवन के लगभग 25 विभागों में करीब 500 पुरुष और महिला कर्मचारी हैं। ऐसे में महिला और पुरुष अधिकारियों के लिए तो अलग टॉयलेट बना हुआ है, लेकिन यहां काम करने वाले कर्मचारियों को कोई राहत नहीं दी गई है। मजबूरन उन्हें बदबूदार टॉयलेट में ही जाना पड़ रहा है। सबसे ज्यादा समस्या महिला कर्मचारियों की है वह अपने-अपने विभाग के अधिकारियों से शिकायत कर चुकी है, लेकिन अब तक समस्या का समाधान नहीं हुआ है। विकास भवन के कर्मचारियों के अलावा प्रतिदिन सैकड़ों फरियादी भी यहां पहुंचते हैं, जिन्हें यही बदबूूदार टॉयलेट इस्तेमाल करने पड़ते हैं। सीढ़ियों के करीब विकास भवन में बने इन शौचालयों के चलते समाज कल्याण विभाग, पंचायत राज विभाग, कृषि विभाग, जिला प्रोबेशन अधिकारी के कार्यालय जाने वाले फरियादों को बदबू के बीच होकर गुजरना पड़ता है। इसके अलावा ज्यादातर टॉयलेट में वॉशबेसिन ठीक नहीं हैं, इनमें गंदगी का अंबार लगा हुआ है।
मरम्मत हुई पर दिखती नहीं
विकास भवन के स्थानीय कर्मचारी बताते हैं कि स्वच्छ भारत अभियान के तहत सफाई और मरम्मत के नाम पर कुछ महीने पहले लाखों रुपये खर्च कर टॉयलेट चमकाए गए थे, पर वह अब दिखते नहीं। फर्स्ट फ्लोर और सेकेंड फ्लोर पर बनीं टॉयलेट के बाहर तो गंदगी का अंबार लगा हुआ है। जगह-जगह धूम्रपान करते पकड़े जाने पर 500 रुपये जुर्माना देने के पंफ्लेट चिपका रखे हैं, लेकिन अधिकांश विभागों के बाहर गुटखा की पीक से दीवारें लाल हैं। मानों कभी सफाई ही नहीं हुई हो।
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टॉयलेट में साफ-सफाई होती रहती है, यदि कोई टॉयलेट साफ नहीं हैं या वहां निकासी ठीक नहीं हैं तो उसे ठीक करा दिया जाएगा।
सुशील कुमार उपाध्याय, डीडीओ/प्रभारी सीडीओ
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महकमे के 25 विभागों में काम करते हैं लगभग 500 कर्मचारी
पीलीभीत। मोदी सरकार में स्वच्छ भारत मिशन के तहत गांवों को ओडीएफ करने की होड़ लगी है। डीएम से लेकर लेखपाल और पंचायत सचिव तक इस काम में जुटे नजर आते हैं। विकास भवन के अधिकारी जिले को तो ओडीएफ कराने का जिम्मा संभाल रहे हैं, लेकिन खुद के यहां टॉयलेट की स्थिति व्यवस्थाओं की पोल खोलने के लिए काफी है। कहने को विकास भवन की बिल्डिंग में लेडीज और जेन्ट्स के लिए लगभग आधा दर्जन टॉयलेट बनें हैं, लेकिन सब बदहाल हैं। हालात यह है कि करोड़ों रुपये खर्च कर जिले को ओडीएफ कराने वाला विभाग इन दिनों खुद के कार्यालय में बने टॉयलेट की बदहाली को ही दूर नहीं कर पा रहा है। विकास की राह दिखाने वाले अधिकारी भी इसको लेकर संजीदा नहीं दिखते। यही वजह है कि विकास भवन के इन गंदे टॉयलेट पर न तो कभी सीडीओ की नजर पड़ी और न ही डीएम की।
विकास भवन के लगभग 25 विभागों में करीब 500 पुरुष और महिला कर्मचारी हैं। ऐसे में महिला और पुरुष अधिकारियों के लिए तो अलग टॉयलेट बना हुआ है, लेकिन यहां काम करने वाले कर्मचारियों को कोई राहत नहीं दी गई है। मजबूरन उन्हें बदबूदार टॉयलेट में ही जाना पड़ रहा है। सबसे ज्यादा समस्या महिला कर्मचारियों की है वह अपने-अपने विभाग के अधिकारियों से शिकायत कर चुकी है, लेकिन अब तक समस्या का समाधान नहीं हुआ है। विकास भवन के कर्मचारियों के अलावा प्रतिदिन सैकड़ों फरियादी भी यहां पहुंचते हैं, जिन्हें यही बदबूूदार टॉयलेट इस्तेमाल करने पड़ते हैं। सीढ़ियों के करीब विकास भवन में बने इन शौचालयों के चलते समाज कल्याण विभाग, पंचायत राज विभाग, कृषि विभाग, जिला प्रोबेशन अधिकारी के कार्यालय जाने वाले फरियादों को बदबू के बीच होकर गुजरना पड़ता है। इसके अलावा ज्यादातर टॉयलेट में वॉशबेसिन ठीक नहीं हैं, इनमें गंदगी का अंबार लगा हुआ है।
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मरम्मत हुई पर दिखती नहीं
विकास भवन के स्थानीय कर्मचारी बताते हैं कि स्वच्छ भारत अभियान के तहत सफाई और मरम्मत के नाम पर कुछ महीने पहले लाखों रुपये खर्च कर टॉयलेट चमकाए गए थे, पर वह अब दिखते नहीं। फर्स्ट फ्लोर और सेकेंड फ्लोर पर बनीं टॉयलेट के बाहर तो गंदगी का अंबार लगा हुआ है। जगह-जगह धूम्रपान करते पकड़े जाने पर 500 रुपये जुर्माना देने के पंफ्लेट चिपका रखे हैं, लेकिन अधिकांश विभागों के बाहर गुटखा की पीक से दीवारें लाल हैं। मानों कभी सफाई ही नहीं हुई हो।
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टॉयलेट में साफ-सफाई होती रहती है, यदि कोई टॉयलेट साफ नहीं हैं या वहां निकासी ठीक नहीं हैं तो उसे ठीक करा दिया जाएगा।
सुशील कुमार उपाध्याय, डीडीओ/प्रभारी सीडीओ