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उफनाई शारदा, कई गांव बाढ़ के पानी से घिरे
Updated Sun, 13 Aug 2017 06:43 PM IST
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पीलीभीत/हजारा। पहाड़ों पर हुई बारिश के बाद उफनाई शारदा के चलते ट्रांस क्षेत्र के प्रमुख हजारा-सिद्धनगर मार्ग समेत कई मार्गों पर तीन से चार फिट तक पानी बहने से आवागमन ठप हो गया है। कई गांव बाढ़ के पानी से घिर गए हैं। बाढ़ का पानी खेतों में भर जाने से क्षेत्र के किसानों की हजारों एकड़ गन्ने की फसल जलमग्न हो गई है।
पहाड़ों पर हुई बारिश से पिछले दो दिनों से शारदा का जल स्तर बढ़ा चल रहा है। ग्राम सिद्धनगर के पीछे हो रहे नदी कटान को रोकने का प्रयास बाढ़ खंड द्वारा न किए जाने के चलते नदी का पानी कृषि भूमि कटान करने के बाद नई धार के रूप में हजारा-सिद्धनगर मार्ग पर बहने लगा है। करीब एक किमी लंबाई में इस मार्ग पर करीब तीन से चार फिट पानी तेज धार में बहने के कारण इस मार्ग पर वाहनों का आवागमन बंद हो गया है। इसके अलावा बाढ़ का पानी रामनगर से चंद्रनगर, राणाप्रताप नगर-नहरोसा मार्गों पर भी बह रहा है। इससे कई गांवों का एक दूसरे से संपर्क कट जाने से लोगों को खासी दिक्कत हो रही है। ग्रामीणों को अपने पशुओं के लिए चारा व अन्य जरूरत की वस्तुएं लेने जाने के लिए जान जोखिम में डाल जाना-आना पड़ रहा है। क्षेत्र में कहीं भी नाव की कोई व्यवस्था नहीं है। जिसके चलते लोगों को खासी असुविधा हो रही है। प्रशासन की ओर से अभी तक राहत बचाव कार्य शुरू नहीं हो सका है। बाढ़ का पानी लोगों के खेतों में भी भर गया है। जिससे किसानों की गन्ने की फसल हवा चलने पर पानी में गिर कर नष्ट होनी शुरू हो गई हैं। किसानों का कहना है कि यदि शीघ्र ही खेत से पानी नहीं निकला तो उनकी काफी फसल नष्ट हो जाएगी। चंद्रनगर, बहादुर नगर, सिद्धनगर, लक्ष्मन नगर, अयोध्यानगर, श्रीनगर, नहरोसा व राणाप्रताप नगर गांव के चारों ओर पानी भरा होने से बाढ़ से घिर गए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पानी का जल स्तर अभी लगातार बढ़ रहा है। गांवों को जाने वाले मार्ग पहले से ही पानी में डूबे हैं ऐसे में यदि उनके गांव व घरों में यदि बाढ़ का पानी घुसता है तो उन्हें सामान निकाल सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने में भी खासी कठिनाई होगी। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन ने शीघ्र ही नावों की व्यवस्था करने की मांग की है।
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पहाड़ों पर हुई बारिश से पिछले दो दिनों से शारदा का जल स्तर बढ़ा चल रहा है। ग्राम सिद्धनगर के पीछे हो रहे नदी कटान को रोकने का प्रयास बाढ़ खंड द्वारा न किए जाने के चलते नदी का पानी कृषि भूमि कटान करने के बाद नई धार के रूप में हजारा-सिद्धनगर मार्ग पर बहने लगा है। करीब एक किमी लंबाई में इस मार्ग पर करीब तीन से चार फिट पानी तेज धार में बहने के कारण इस मार्ग पर वाहनों का आवागमन बंद हो गया है। इसके अलावा बाढ़ का पानी रामनगर से चंद्रनगर, राणाप्रताप नगर-नहरोसा मार्गों पर भी बह रहा है। इससे कई गांवों का एक दूसरे से संपर्क कट जाने से लोगों को खासी दिक्कत हो रही है। ग्रामीणों को अपने पशुओं के लिए चारा व अन्य जरूरत की वस्तुएं लेने जाने के लिए जान जोखिम में डाल जाना-आना पड़ रहा है। क्षेत्र में कहीं भी नाव की कोई व्यवस्था नहीं है। जिसके चलते लोगों को खासी असुविधा हो रही है। प्रशासन की ओर से अभी तक राहत बचाव कार्य शुरू नहीं हो सका है। बाढ़ का पानी लोगों के खेतों में भी भर गया है। जिससे किसानों की गन्ने की फसल हवा चलने पर पानी में गिर कर नष्ट होनी शुरू हो गई हैं। किसानों का कहना है कि यदि शीघ्र ही खेत से पानी नहीं निकला तो उनकी काफी फसल नष्ट हो जाएगी। चंद्रनगर, बहादुर नगर, सिद्धनगर, लक्ष्मन नगर, अयोध्यानगर, श्रीनगर, नहरोसा व राणाप्रताप नगर गांव के चारों ओर पानी भरा होने से बाढ़ से घिर गए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पानी का जल स्तर अभी लगातार बढ़ रहा है। गांवों को जाने वाले मार्ग पहले से ही पानी में डूबे हैं ऐसे में यदि उनके गांव व घरों में यदि बाढ़ का पानी घुसता है तो उन्हें सामान निकाल सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने में भी खासी कठिनाई होगी। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन ने शीघ्र ही नावों की व्यवस्था करने की मांग की है।
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