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स्तनपान कराएं, शिशुओं की मौतों में 20 फीसदी तक कमी लाएं

Thu, 02 Aug 2018 12:10 AM IST
Updated Thu, 02 Aug 2018 12:10 AM IST
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स्तनपान कराएं, शिशुओं की मौतों में 20 फीसदी तक कमी लाएं
डायरिया, निमोनिया व कुपोषण से बचाता है मां का दूध
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स्तनपान से आती है मृत्युदर में कमी
अमर उजाला ब्यूरो
पीलीभीत। बच्चों के मानसिक व शारीरिक विकास के लिए बच्चे को स्तनपान बहुत महत्वपूर्ण है। इसका शिशुओं के जन्म पर अहम प्रभाव पड़ता है। जन्म के एक घंटे के अंदर स्तनपान शुरू कराने से 20 फीसदी शिशु मृत्यु दर में कमी लाई जा सकती है। छह महीने की आयु तक बच्चे को सिर्फ स्तनपान कराने से बाल्यावस्था के रोग जैसे दस्त, निमोनिया के खतरे में 11 से 15 फीसदी तक कमी लाई जा सकती है।

नेशनल फेमली हेल्थ सर्वे के अनुसार 22 फीसदी महिलाएं ही प्रसव के बाद नवजात को स्तनपान कराती हैं। जिस कारण शिशु मृत्यु दर में कमी नहीं आ रही है। सर्वे के अनुसार प्रदेश में एक घंटे के अंदर स्तनपान की दर अभी मात्र 25.2 फीसदी है जो काफी कम है। छह माह तक स्तनपान की दर 41.6 फीसदी है जो अन्य प्रदेशों की तुलना में काफी कम है। पीलीभीत की बात करें तो यहां एक घंटे के अंदर स्तनपान की दर अभी मात्र 22.5 प्रतिशत ही है। जबकि दस माह तक केवल स्तनपान की दर 22.2 फीसदी है। चौकाने वाले आंकड़े देखने के बाद राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचम) के मिशन निदेशक पंकज कुमार ने सभी जिले के सीएमओ को सात अगस्त तक स्तनपान संबंधी कार्यक्रम आयोजन कराने को कहा है। विशेषज्ञों की मानें तो मां का दूध कम से कम दो साल तक जारी रखना चाहिए। स्तनपान से न सिर्फ शिशुओं और माताओं में बल्कि समाज और देश को भी कई प्रकार के लाभ होते हैं। सीएमओ डॉ. सीमा अग्रवाल ने बताया कि स्तनपान सप्ताह की थीम, स्तपनान जीवन की नींव है। इसके तहत आशा व आंगनबाड़ी कार्यकत्री घर-घर जाकर महिलाओं को नवजात के स्तनपान के लिए जागरूक करेंगी।
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