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12 घंटे चला ड्रामा, फिर प्रयास में बदल गई तीन लाख की चोरी
Updated Mon, 16 Oct 2017 10:23 PM IST
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पीलीभीत।
रोडवेज के कैश रूम में छत के रास्ते घुसकर छोटी तिजोरी से करीब तीन लाख कैश चोरी होने की वारदात 12 घंटे चली कार्रवाई के बाद चोरी की कोशिश में तब्दील हो गई। तीन कर्मचारियों के पुलिस हिरासत में जाने और कड़ी पूछताछ के बाद अफसरों के बयान भी बदल गए। अंत में एआरएम ने नकदी चोरी न होने की बात पुलिस को लिखकर दी। हालांकि वारदात एक बड़े खेल की ओर इशारा कर गई है, जिसकी चर्चाएं महकमे में भी तेज हो गई हैं।
सोमवार सुबह छह बजे रोडवेज के कैश रूम में रखी छोटी तिजोरी से तीन लाख रुपये चोरी होने की सूचना कर्मचारियों की ओर से पुलिस को दी गई। बताया गया कि चोर सीमेंट की छत को हटाकर भीतर घुसे और नकदी ले गए। सीओ सिटी धर्म सिंह मार्छाल, कोतवाल एसके सिंह ने फील्ड यूनिट और डॉग स्क्वाड संग पहुंचकर मौका-मुआयना किया। इसमें रोडवेज अफसरों की ओर से बताई गई कहानी गले न उतरने पर चौकीदारी का जिम्मा संभाल रहे तीन कर्मचारियों को हिरासत में लिया गया। बरेली से रोडवेज की एक टीम भी मौके पर पहुंच गई। पुलिस की जांच में मामला संदिग्धता की ओर इशारा करता गया। उधर रोडवेज के अधिकारी चुप्पी साध बचते नजर आए। 12 घंटे बाद दो से तीन लाख की चोरी का कयास लगाने वाले रोडवेज अफसरों के सुर बदल गए। उन्होंने चोरी की कोशिश की बात कहना शुरू कर दी और शाम को पुलिस को भी लिखित में चोरी की कोशिश की घटना बताई। कोतवाल एसके सिंह ने बताया कि मामला शुरूआत से संदिग्ध प्रतीत हो रहा था। रोडवेज के अधिकारी शाम को कैश चोरी न होने की बात लिखकर दे गए है। मामले की छानबीन की जा रही है।
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एआरएम ने बताई ये कहानी
दिन भर मीडिया से बचने के बाद एआरएम एसके नागर ने शाम को बताया कि कैशियर ने कैश दूसरी तिजोरी में रख दिया था, जो बाद में मिल गया। छोटी तिजोरी खुलने पर इसका पता लगा, जबकि सुबह कैशियर ओमप्रकाश में तिजोरी खुली मिलने पर ही चोरी का पता लगने की बात कही थी। सवाल यह भी है कि कैश अगर कहीं और रखा था, फिर कैशियर ने सुबह दो से तीन लाख गायब होने बात क्यों कहीं? इसके पीछे क्या मकसद रहा। इन सवालों के जवाब रोडवेज के अफसर नहीं दे सके हैं।
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रोडवेज के कैश रूम में छत के रास्ते घुसकर छोटी तिजोरी से करीब तीन लाख कैश चोरी होने की वारदात 12 घंटे चली कार्रवाई के बाद चोरी की कोशिश में तब्दील हो गई। तीन कर्मचारियों के पुलिस हिरासत में जाने और कड़ी पूछताछ के बाद अफसरों के बयान भी बदल गए। अंत में एआरएम ने नकदी चोरी न होने की बात पुलिस को लिखकर दी। हालांकि वारदात एक बड़े खेल की ओर इशारा कर गई है, जिसकी चर्चाएं महकमे में भी तेज हो गई हैं।
सोमवार सुबह छह बजे रोडवेज के कैश रूम में रखी छोटी तिजोरी से तीन लाख रुपये चोरी होने की सूचना कर्मचारियों की ओर से पुलिस को दी गई। बताया गया कि चोर सीमेंट की छत को हटाकर भीतर घुसे और नकदी ले गए। सीओ सिटी धर्म सिंह मार्छाल, कोतवाल एसके सिंह ने फील्ड यूनिट और डॉग स्क्वाड संग पहुंचकर मौका-मुआयना किया। इसमें रोडवेज अफसरों की ओर से बताई गई कहानी गले न उतरने पर चौकीदारी का जिम्मा संभाल रहे तीन कर्मचारियों को हिरासत में लिया गया। बरेली से रोडवेज की एक टीम भी मौके पर पहुंच गई। पुलिस की जांच में मामला संदिग्धता की ओर इशारा करता गया। उधर रोडवेज के अधिकारी चुप्पी साध बचते नजर आए। 12 घंटे बाद दो से तीन लाख की चोरी का कयास लगाने वाले रोडवेज अफसरों के सुर बदल गए। उन्होंने चोरी की कोशिश की बात कहना शुरू कर दी और शाम को पुलिस को भी लिखित में चोरी की कोशिश की घटना बताई। कोतवाल एसके सिंह ने बताया कि मामला शुरूआत से संदिग्ध प्रतीत हो रहा था। रोडवेज के अधिकारी शाम को कैश चोरी न होने की बात लिखकर दे गए है। मामले की छानबीन की जा रही है।
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एआरएम ने बताई ये कहानी
दिन भर मीडिया से बचने के बाद एआरएम एसके नागर ने शाम को बताया कि कैशियर ने कैश दूसरी तिजोरी में रख दिया था, जो बाद में मिल गया। छोटी तिजोरी खुलने पर इसका पता लगा, जबकि सुबह कैशियर ओमप्रकाश में तिजोरी खुली मिलने पर ही चोरी का पता लगने की बात कही थी। सवाल यह भी है कि कैश अगर कहीं और रखा था, फिर कैशियर ने सुबह दो से तीन लाख गायब होने बात क्यों कहीं? इसके पीछे क्या मकसद रहा। इन सवालों के जवाब रोडवेज के अफसर नहीं दे सके हैं।
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